मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

देशवासियों के सुझाव पर लॉकडाउन 3 मई तक प्रधानमंत्री मोदी जी ने घोषणा की -



आज सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की देशवासियों और मुख्यमंत्रियों के सुझाव को ध्यान में  रखते हुए  लॉकडाउन 3 मई तक बढाया जा रहा है अभी तक लॉकडाउन ही करोना वायरस से लड़ने का सबसे सव्र्शेष्ठ तरीका है। क्योंकि अभी तक कोरोना वायरस से बचने के लिए कोई भी दवाई का अविष्कार नहीं हुआ भारत में कोरोना वायरस  लेकर 25 अप्रेल से लॉकडाउन किया गया है इसका परिणाम है कि भारत अभी यूरोप और अमेरिका जैसे गंभीर स्थिति में नहीं पहुँचा है। प्रधानमंत्री ने वेद के वाक्य का उद्घोषित किया कि  वयं राष्ट्रे जागृयाम - हम सभी राष्ट्र को जीवंत और जागृत बनाए रखेंगे। 

लॉकडाउन घोषित होने के बाद 28 मई को तमिलनाडु पुलिस के द्वारा जाँच में पता चला की निजामुद्दीन दरगाह के पास इस्लामिक संस्था तबलीगी जमात का मरकज़ में 2300 से अधिक लोग रुके हुए है उनमे से एक व्यक्ति जो तमिलनाडु का था, जो घर पहुँचते ही कोरोना वायरस से गसित था उसकी मौत हो गई है। जिन व्यक्ति मरकज से संबध तो कोरोना गर्सित होने पर पुलिस जाँच शुरू की, तथा जम्मूकश्मीर तथा तेलंगाना से मौत की खबर ने पुरे देश को हिला दिया।  इसी बीच इस्लामिक संस्था तबलीगी जमात का मरकज़ के मौलाना का तकरीर वारल होने लगा की मरना है तो मस्जिद से अच्छा जगह क्या हो सकता है कोरोना तो मुसलमानों को मस्जिद में आने से रोकना है इसे हम नहीं मानेगे ऐसा ही यु-तुबे पर रिकार्डिंग चलने इसका हेतु या था की मुसलमान इस लॉकडाउन को नहीं माने और मस्जिद में जाकर नमाज पढ़े       



शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

इस्लामी धार्मिक संस्था तबलीगी जमात ने फैला दिया covid19 देश भर में


हजरत निजामुद्दीन ( औलिया ) दरगाह के पास ही इस्लामी धार्मिक संस्था तबलीग़ी जमात ने लॉकडाउन के पूर्व दिल्ली के अपने मुख्यालय में एक बड़े सम्मलेन का आयोजन किया था दिल्ली पुलिस और प्रशासन को खबर मिली तो सभी के हाथ पैर फुले की कोरोना वायरस के बीच ये सम्मलेन कराना एक भारी भूल थी  इससे पूरे समाज को कोरोना वायरस से प्रभावित होने का ख़तरा पैदा हो गया है। यह आशंका सही साबित हो रहा है, लगभग 9 हजार लोगों ने तबलीगी जमात के सम्मेलन में शामिल हुए थे। इसमें  हजारों विदेशी लोग इंडोनेशिया, मलेशिया , गल्फ देशों से भी लोग शामिल हुए थे इन्ही लोगों विदेशी लोगों के माध्यम से 15 दिनों में हजारों तबलीगी के द्वारा पुरे भारत में फैल गया है।  तबलीग़ी जमात के माध्यम से, उन्होंने देश के हर कोने में कोरोना बम लगाए हैं, अगर वे अपने मक़सद में क़ामयाब हो जाते हैं तो यह देश पर अब तक का सबसे बड़ा जिहादी हमला साबित होगा, निज़ामुद्दीन में जमात के हज़ारों लोगों का जमा होना, जिनमें कई विदेशी तबलीगी जमात के लोग भी शामिल थे जो भारत भर से मस्जिदों से उमड़ रहे हैं और जिनमें कोरोना वायरस के कई मामले हैं ये कुछ और नहीं बल्कि कोरोना जिहाद द्वारा भारत को बर्बाद करने की एक कोशिश है

  
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बेंगलुरु में होने वाली तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक बेंगलुरु में 15 से 17 मार्च को कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण स्थगित कर दिया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने यहां ट्विटर पर कहा- महामारी कोविड-19 की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के निर्देशों और परामर्श के प्रकाश में बेंगलुरु में होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक को स्थगित किया जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सभी स्वयंसेवकों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में जागरुकता लाने और इस चुनौती का सामना करने के लिए शासन-प्रशासन का सहयोग करें। 

संदर्भ यह है कि भारत में WHO के गाइड लाईन के अनुसार की भारत में भी कोरोना वायरस फैल सकता है। इसलिए भारत सरकार ने बार बार एद्वाजरी जारी किया कि 200 से ज्यादा नहीं इकठ्ठा होना है। कुछ दिन बाद भी 50 से अधिक नहीं होना चाहिए फिर 5 लोगों से ज्यादा एकत्रित नहीं हो।  इस सूचना का अक्षर से पालन करते हुए। अपनी सबसे बड़ी बैठक तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक को स्थगित कर दिया। लेकिन कुछ और लोग है कहते है कि मोदी सरकार या भारत सरकार जो भी कहेगा उसका विरोध करेगें। जैसे शाहीन बाग में धरना जारी रखा था धरना में शामिल खातून कहते देखा गया कि कोरोना तो कुरान से निकला है हम मुसलमानों को कोरोना नहीं हो सकता। दिल्ली में सरकार ने धारा 144 लागू होने के बाद भी शाहीन बाग का धरना खत्म नहीं हुआ तो 24 मार्च को अचानक दिल्ली पुलिस ने धरना के तम्बू को उखाड़ फेका तथा विरोधियों को गिरप्तार किया। 



सोमवार, 30 मार्च 2020

दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण, 33 वर्ष पूर्व भारत की राजनीति को बदल दिया


भारत के  टीवी सीरियल के इतिहास में 1987 में रामायण सीरियल दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था, एक इतिहास रच दिया था पहली बार 25 जनवरी 1987 में दूरदर्शन पर रामायण का प्रसारण  हुआ था, लगभग 78 एपिसोड के बाद इसे 31 जुलाई 1988 तक प्रसारित कर समाप्त कर दिया गया था कोरोना वारस के कारण पुरे देश में घोषित बंद ( Lockdown ) के बाद में इसे कई बार री-टेलीकास्ट किया गयाइस बीच केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को साफ किया कि जनता की मांग पर दूरदर्शन में शनिवार से रामायण सीरियल का प्रसारण होगा। पहला एपिसोड कल सुबह 9 बजे और दूसरा कल ही रात 9 बजे दिखाया जाएगा। 

सोमवार, 23 मार्च 2020

100 Days बाद शाहीनबाग का खेल खत्म,




आज ही लगभग 100 दिनों के बाद शाहीनबाग में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हटा दिया है। 15 दिसंबर से नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में तथाकथित वामपंथीकांग्रेस तथा आप पार्टी के समर्थन से चल रहा था शाहीनबाग का आन्दोलन का खेल को पुलिस ने खत्म कर दिया पुरे विश्व में कोरोना वायरस के खतरे के कारण  से दिल्ली समेत पूरे भारत में लॉकडाउन तथा धारा 144 लागू किया गया है। लेकिन इसके बाद भी शाहीनबाग में प्रदर्शनकारी मंगलवार सुबह भी प्रदर्शन की तैयारी में थे। लेकिन अब पुलिस ने वहां महिला प्रदर्शनकारियों को पूरी तरह से हटाकर दिया है। 

गृहमंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) कानून भारत की संसद के दोनों सदनों पटल पर रखा और 12 दिसंबर को पारित तथा राष्ट्रपति महोदय ने भी अपनी मुहर लगा दे दी। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र लगातार सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे थे। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागु होने के पहला शुक्रवार 15 दिसंबर 2019 को नमाज खत्म होने के बाद जामिया नगर के लोग सीएए के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। इस प्रदर्शन में जामिया मिल्लिया के छात्रों भी घुस आये, दिल्ली की सड़को पर हिंसा करना शुरू कर दिए।जामिया मिल्लिया के छात्रों के अचानक इस प्रदर्शन ने हिसंक रूप में बसों में तोड़फोड़ औऱ उसे जलाने लगे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पथराव शुरू हो गयाजिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इतना ही नहीं पुलिस ने जामिया की लाइब्रेरी में घुसकर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कियाजिसमें कई छात्र भी घायल हुए। वामपथी मीडियाकर्मियों तथा कांग्रेस, आप पार्टी और विपक्षी पार्टियों ने इस आन्दोलन को हाथों हाथ ले लिया। चारों तरफ से आलोचनाओं के कारण दिल्ली पुलिस बैकफुट पर आ गई और आगे से कोई दूसरी कार्रवाई नहीं करना चाहती थी। जामिया का हिंसक प्रदर्शन से परेशान प्रशासन ने इलाके को चारों तरफ से बंद कर दिया था। शाम से आठ बजे से शाहीन बाग इलाके की कुछ महिलाएं रोड पर आ कर बैठ गईं। दिल्ली पुलिस से सबसे बड़ी गलती यही हुई कि ये महिलाएं रात में वापस चली जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह दिल्ली पुलिस की गलती ने देश के देशदोहियो को एकजुट कर दिया  

16 दिसंबर की शाम में करीब 500 महिलाएं इस प्रदर्शन में शामिल हो चुकी थीं इसी बीच जेएनयू और जामिया के छात्र-छात्राएं शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए इसके बाद इस प्रदर्शन की कमान महिलाओं ने अपने हाथों में ले ली और क्षेत्र के लोग वॉलिंटियर के रूप में लग गए।  शाहीन बाग के आंदोलन में 29 दिन की बच्ची को मां गोद में लेकर धरने पर बैठी नजर आई तो 80 साल की दादी इस प्रोटेस्ट का हिस्सा बनी इतना ही नहीं शाम होते ही आसपास की महिलाएं आंदोलन स्थल पर पहुंच जाती हैं



गुरुवार, 19 मार्च 2020

अंततः निर्भया के चारों दोषियों को एक साथ फांसी दी गई



निर्भया केस को आज 7 साल बीत चुके हैं और अभी भी पूरे देश को दोषी मुकेश, विनय और अक्षय और पवन की फांसी का इंतजार है, लेकिन चार बार  निर्भया के दरिंदों को फांसी के डेथ वारंट जारी हुआ कानून की दावपेच के कारण बचते रहे आज सभी विकल्प गुरुवार को रात्रि में समाप्त हो गए। आज सुबह शुक्रवार को नई सुबह कोर्ट इनके फांसी की अगली तारीख 20 मार्च को घोषित कर दी है। निर्भया के चारों दोषियों पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा और मुकेश सिंह की फांसी तय है। 


16 दिसंबर 2012 ये वो तारीख है, जिस दिन दिल्ली की सड़कों पर रात के अंधेरे में चलती बस में निर्भया के साथ 6 कुकर्मियों ने जघन्य अपराध की सारी हदें पार कर दी थीं।  इन 6 में एक ने जेल में आत्महत्या कर ली। उसका नाम राम सिंह था, जो बस ड्राइवर और मुख्य आरोपी था। एक नाबालिग था, जो 3 साल की सजा काटकर 20 दिसंबर 2015 को रिहा हो चुका है और केजरीवाल की सिलाई मशीन के साथ कहीं चैन से अपनी जिंदगी जी रहा है।
इनके नाम थे- मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर। इन दोषियों को उनके गुनाह की सजा 7 साल 3 महीने और 4 दिन बाद मिली। चारों दोषियों को तिहाड़ की जेल नंबर-3 में 20 मार्च की सुबह साढ़े 5 बजे फांसी पर लटकाया गया। फांसी देने के लिए जल्लाद पवन 17 तारीख को ही तिहाड़ पहुंच चुका था। 

डोनाल्ड ट्रंप और इस्लामिक आतंक, CAA , कश्मीर में धारा 370 तथा दिल्ली में प्रायोजित दंगा


दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने दो दिवसीय दौरे के लिए सोमवार भारत पहुंचे। गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्रंप का गले लगाकर स्वागत किया है।

रविवार, 19 जनवरी 2020

कश्मीरी पंडित 30 वर्षो से अपने ही भूमि से विस्थापित


19 जनवरी 1990 का दिन भारत के इतिहास का एक ऐसा काला दिन है, जिसको याद करके से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं जब भारत के कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में मस्जिदों में ऐलान हुआ और उसके बाद लाखों कश्मीरी पंडितों को देश का स्वर्ग कहे जाने वाला कश्मीर छोड़ना पड़ा था जब संविधान भी था अदालत भी कानून भी पुलिस भी सेना भी लेकिन राजनेताओं के पास इच्छा शक्ति की कमी ही थी 

4 जनवरी 1990 के दिन उर्दू अखबार आफताब में हिज्बुल मुजाहिदीन ने छुपाया था कि सभी कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़ दे यही नहीं बल्कि अल सफा नाम के अखबार में यह बात दोबारा छापी जब यह आलम था कि मस्जिदों और चौराहों पर लाउडस्पीकर के द्वारा अनाउंस किया गया कि पंडित लोग यहां से चले जाए नहीं तो बुरा होगा इसके बाद से ही कश्मीर में लोग हत्या और रेप जैसी घटनाओं को अंजाम देने लगे और कहते कि पंडित लोग यहां से भाग जाओ और अपनी औरत छोड़ जाओ