गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

म्यांमार की सेना ने की तख्ता पटल ...चीनियों का हाथ तो नहीं .....

भारत के पडोसी देश म्यांमार की महिला अरोबिग डांसर खिंग हनिन वाई, वह अपना एक्सरसाइज डांस कर रही है। वही पीछे में सेना देश की संसद में घुसकर तख्ता पटल कर, म्यांमार में आपातकाल १ वर्ष के लिए लगा दिया है। उस महिला ने बताया कि म्यांमार की संसद भवन के पास ही एक्सरसाइज करते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी। इसी समय म्यांमार की सेना ने काफिले के साथ संसद भवन में घुस रही थी। जिसे महिला अरोबिग डांसर खिंग हनिन वाई केइस वीडियो को सोशल मीडिया पर 1 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है।

म्यांमार की सेना ने एक वर्ष के लिए आपातकाल के तहत देश की सत्ता को अपने कब्ज़ा में कर लिया है। खबरों में बताया गया है कि स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। भारत सहित विश्व भर की सरकारों एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने तख्तापलट की घोर निंदा की है इससे म्यांमार में सीमित लोकतांत्रिक सुधारों को बहुत बड़ा झटका लगा है। एक प्रकार से म्यांमार में लोकतंत्र की सेना ने हत्या कर दिया। रोहिंग्या के अत्याचार के कारण विश्व मंच पर म्यांमार की  कमजोर साख है, साथ ही सेना ने सत्ता पर कब्ज़ा कर को बट्टा लग गया है। अत में इसके पीछे चीन का हाथ तो नहीं है ...... 

म्यांंमार में तख्तातपलट पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा है, 'म्यांमार में जो कुछ हुआ है, हमने उसका संज्ञान लिया है चीन, म्यांमार का मित्र और पड़ोसी देश है। हमें उम्मीद है कि म्यामांर में सभी पक्ष संविधान और कानूनी ढांचे के तहत अपने मतभेदों को दूर करेंगे और राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखनी चाहिए।' चीन की इस प्रतिक्रिया पर अधिकांश देश शक की नजरों से देख रहे है। क्योंकि चीन-म्यांतमार आर्थिक कॉरिडोर को ड्रैगन आगे बढ़ाना चाहता है। लेकिन आने वाले महीने एक महीने पहले की स्थिति की तुलना में उसके लिए अनिश्चित होने जा रहे हैं। पाकिस्तान में सीपेक ( चीन पाकिस्तान आर्थिक कारीडोर ) का भारी विरोध हो रहा है। जिसमे चीन को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, इस आर्थिक नुकसान की भरपाई करने के लिए चीन म्यांमार की तरफ ध्यान देना शुरू किया था। लेकिन म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की कोरोना काल में भारत के तरफ ज्यादा झुकाव हो रहा था। चीन म्यांमार की सेना के सहारे म्यांमार की सत्ता तक पहुचना चाह रहा था। यहाँ पर म्यांमार की सेना पाकिस्तान की तरह नहीं है।

बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

बोफोर्स का जिन्न अभी भी जिन्दा है -

CBI के पूर्व चीफ श्री आर. के. राघवन ने कहा है कि एक पार्टी की सरकार ने बोफोर्स की जांच में पलीता लगा दिया। राघवन ने अपनी आत्मकथा ‘अ रोड वेल ट्रैवल्ड’ में कहा कि- मामला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि किस तरह एक पार्टी की सरकार ने एक सही मामले की जांच को पलीता लगा दिया, जिसके पास बहुत कुछ छिपाने को है। पूर्व सीबीआई चीफ ने कहा कि अदालत में मामला न टिक पाने के लिए वे लोग दोषी हैं जिन्होंने 1990 के दशक में और 2004 से 2014 तक जांच एजेंसी को नियंत्रित किया। 

बोफोर्स कांड में भ्रष्टाचार का यह मामला 24 मार्च 1986 को भारत सरकार और स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स के बीच 1,437 करोड़ रुपये का सौदा हुआ। यह सौदा भारतीय थल सेना को 155 एमएम की 400 होवित्जर तोप की सप्लाई के लिए हुआ था। हॉवित्जर तोप सौदे में कथित रिश्वत से जुड़ा है जिसकी वजह से 1989 में राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से बाहर जाना पड़ा था। आरोप था कि कंपनी ने नेताओं, कांग्रेस के नेताओं और नौकरशाहों को करीब 64 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। 16 अप्रैल 1987 स्वीडन के रेडियों से एक समाचार का प्रसारण किया गया। पूरे भारत में हडकम मच गया । यह समाचार था कि बोफोर्स के खरीदी में दलाली दी गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस समाचार को रोकने के लिए पूरी कोशिश किया कई समाचार पत्र को मैनेज कर लिया गया। लेकिन इंडियनएक्प्रेस ने इस समाचार को प्रमुखता से छापा, पूरे देश इस समाचार से स्तब्ध होगा। राजीव गाधी की छवि एक सामान्य जनक नेता की थी । भारत के लोगों को विश्वास नही हुआ कि राजीव गांधी ऐसा भी कर सकते है। बोफोर्स घोटला के नाम से जाना गया और कांग्रेस का ग्राफ गिरता ही गया । 

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया गांधी के करीबी दोस्त माने जाने वाले क्वात्रोच्चि पर इस सौदे में एजेंट की भूमिका निभाया था। सोनिया के मित्र क्वात्रोच्चि पर आरोप था कि इस सौदे के बदले उसे दलाली की रकम का बड़ा हिस्सा मिला। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संसद को आश्वासन दिया था कि बोफोर्स तोप खरीद में कोई घोटाला नहीं हुआ है। देश ने इस घोटाले में राजीच गांधी को दोषी मानते हुए 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया

शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

ताइवान नेशनल पर भारतीयों का जोश देखकर चीन बौराया...

आज भारत सहित पूरी दुनिया HappyNationalDayTaiwan मना रहा है। चीन को पता था कि भारत के लोग TaiwanNationalDay मनाएंगे। इसलिए भारत सरकार से कहा था कि भारत में कोई भी नहीं #ताईवान_दिवस मनाये। भारत सरकार ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक मूल्यों का राष्ट्र है। यहाँ पर प्रेस मीडिया को स्वतंत्र है इन्हें सरकार द्वारा नहीं रोक जा सकता है। आज इंडियन एक्सप्रेस ने एक पेज विज्ञापन छापा है। हम भारतीयों की एक खास विशेषता है जिस काम को मना किया जा है उस काम को पहले करते हैं। लेकिन #China यह बात नही समझा।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

6 दिसंबर1992 को विवादित ढांचा गिरने के 28 साल बाद, सभी आरोपी बरी

 

6 दिसंबर 1992 का दिन भारतीय राजनीति में टर्निग पॉइंट रहा है। राम मंदिर आन्दोलन ने भारत की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया है। इसी आंदोलन से भाजपा का उदय हुआ और कांग्रेस के पतन की शुरुआत हुई।

इसी दिन लाखों कारसेवकों ने मिलकर बाबरी मस्जिद नाम से विवादित ढांचे को गिरा दिया था। 1992 में अयोध्या में जो हुआ, उसकी नींव 1990 में बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के साथ ही पड़ गई थी। उस वक्त 'कसम राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे' का नारा काफी चला था। इसके बाद धीरे-धीरे मुद्दे ने रंग पकड़ा और 1992 में 'एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो' के साथ मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया गया। 6 दिसंबर को आखिर 28 साल पहले क्या हुआ था

सुबह करीब 10.30 बजे वरिष्ठ नेता बीजेपी और वीएचपी नेताओं ने विवादित ढांचे के पास पहुंचकर राम शिला की पूजा-अर्चना की गई। इसमें एल के आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के साथ कई संत भी शामिल थे। इनके पीछे थे करीब 1.5 लाख कारसेवक। 

सोमवार, 31 अगस्त 2020

प्रणब दा .. बहुमुखी प्रतिभा के धनी

 


भारत के 13 पूर्व राष्ट्रपति, भारतरत्न से समानित श्री प्रणब मुखर्जी दा अब हमारे बीच में नहीं रहे है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को उन्हें संघ के लिये एक मार्गदर्शक करार दिया और कहा कि वह राजनीतिक छुआछूत में विश्वास नहीं करते थे। प्रधानमंत्री मोदी जी पिता तुल्य प्रणब दा को मानते थे । मोदी जी ने प्रणब मुखर्जी को एक पत्र लिखा था।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता

विश्व की दो शक्ति देश जो आपस में दुश्‍मन देश इजरायल और संयुक्‍त अरब अमीरात करीब 72 साल बाद 'दोस्‍त' बन गए हैं। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इस मध्यस्थता के बाद इजरायल और यूएई ने शांति समझौते पर हस्‍ताक्षर किया है। अमेरिका  के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू और अबूधाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद अल नहयान के बीच हुए इस समझौते को 'एक वास्‍तविक ऐतिहासिक मौका' करार दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डील न केवल ईरान और चीन की दोस्‍ती का जवाब है, बल्कि भारत के लिए भी बड़ी खुशखबरी है।


रविवार, 2 अगस्त 2020

भारत में फ्रांस से राफेल आने के बाद पाकिस्तान और चीन का हाल


जब से फ्रांस से पहुंचे पांच राफेल विमान अंबाला के एयरबेस पर पंहुचा वैसे पूरा भारत स्वागत किया। बुधवार को फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाए गए इन लड़ाकू विमानों के भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद भारत की ताकत में बढ़ गई है। राफेल विमानों के भारत पहुंचने के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन की चिंता भी बढ़ है। पाकिस्तान के विदेश विभाग ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा जरुरतों से ज्यादा सैन्य क्षमता जुटाना जारी रखे हुए है तथा चीन ने अपने सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के माध्यम से कह रहा है राफेल एक थर्ड जनरेशन का प्लेन जबकि हमारा J-20 फिप्ट जनरेशन का जेट प्लेन है यह J-20 के सामने नहीं टिकने वाला है लेकिन पूर्व एयर चीफ बी एस धनोरा ने चीन की J-20 की औकात बता दिया तो चीन की बोलती बंद हो गई। 

दुसरे दिन बृहस्पतिवार को पाकिस्तान के विदेश विभाग की प्रवक्ता आयशा फारुकी ने अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय वायुसेना द्वारा फ़्रांस से प्राप्त किए गए राफेल विमानों से दक्षिण एशिया में परेशानी का सबब हैकि भारत अपनी सुरक्षा जरुरतों से ज्यादा सैन्य क्षमता जुटाना जारी रखे हुए है। उन्होंने कहाकि  अत्याधुनिक प्रणाली का हस्तांतरण  जहां स्पष्ट मंशा उसे परमाणु हथियार ले जाने लायक बनाने की हैयह परमाणु हथियार जमा नहीं करने के अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं से किए गए वादे पर सवाल खड़े करता है। आगे कहा कि  दक्षिण एशिया में हथियारों की दौड़ के खिलाफ अपने रूख पर कायम रहते हुए,  पाकिस्तान इन घटनाक्रमों के प्रति बेखबर बना नहीं रह सकता है  और वह गलत मंशा के साथ आक्रमकता के किसी भी कदम को नाकाम करने की अपनी क्षमता के प्रति आश्वस्त है।  भारत द्वारा क्षमता से ज्‍यादा हथियार जुटाना पाकिस्‍तान के लिए भी शुभ संकेत नहीं हैं। यह परेशान करने वाली बात है। अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को इस पर ध्‍यान देना चाहिए।

पाकिस्तान में फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से चार साल बाद भारत को पांच राफेल विमानों की पहली खेप प्राप्त होने के बाद खौफ का आलम बन गया है कि इन विमानों के आने से ठीक पहले पाकिस्‍तान के एयरफोर्स चीफ को आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा से आपात बैठक करनी पड़ी है।

ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक एक्सपर्ट को सामने रख कर कहा कि भारत का राफेल चीन के J-20 के सामने कहीं गिनती में नहीं है।  उसने बताया कि राफेल थर्ड जेनेरेशन फाइटर जेट है और J-20 फोर्थ जेनेरेशन फाइटर जेट है जो ज्यादा आधुनिक है। भारत में राफेल आने से चीन की चिंता बढ़ी और जलनखोर ने चीन ने जलन से कहा कि उसका J-20 भारत के राफेल से कहीं बढ़ कर है 

फिर चीन को आइना दिखाया भारत के पूर्व वायु सेनाध्यक्ष बी.एस. धनोआ ने तुरंत चीन के दावे की हवा निकल दी की चीन को बता दिया कि फ्रांस में बना फाइटर जेट राफेल चीन के J-20 फाइटर जेट से कई गुना श्रेष्ठ है।  चीन ने कहा आधुनिक हथियार और सीमित तकनीक के कारण  राफेल की थर्ड जेनेरेशन दूसरे फाइटर जेट से तो तुलना की जा सकती किन्तु फोर्थ जेनेरेशन के J-20 जैसे जंगी जहाज़ से ये मुकाबला नहीं कर सका।  राफेल 4.5 जेनरेशन का गेमचेंजर है और इसके सामने चीन का फाइटर जेट जे-20 कहीं नहीं टिकता।  उन्होंने कहा कि जे-20 इतना कुशल नहीं है कि उसे फिफ्थ जेनेरेशन फाइटर जेट कहा जा सके।  जे-20 का के रडार सिग्‍नेचर के कारण यह राफेल के लॉन्‍ग-रेंज मीटॉर मिसाइल की पकड़ में बच नहीं पाता है और राफेल सुपरक्रूज है जबकि जे-20 के भीतर सुपरक्रूज़ेबिलिटी नहीं है।  

1999 कारगिल विजय के बाद तत्कालीन अटल बिहारी सरकार ने भारत की वायुसेना के आवश्यकता नए जेनेरेशन फाइटर जेट खरीदने को कहा गया। लेकिन इस प्रस्ताव की अपचौरिकता पूरी होती की उनकी सरकार 2004 में लोकसभा चुनाव हार गई तब मनमोहन सरकार ने पुरे 10 वर्ष में नये फाइटर जेट नहीं खरीद पाई 2014 में मोदी सरकार ने फिर से वायुसेना की आवश्यकतानुसार फ़्रांस जाकर  राफेल खरीदने की शुरुवात किया जिसका परिणाम की भारत ने रुस से खरीदे गए सुखोई विमानों के पश्चात करीब 23 साल बाद वायुसेना ने नये जेनरेशन का लड़ाकू जेट राफेल प्राप्त किया है। राफेल के भारत पहुंचने पर सरकार, वायुसेना तथा आम लोगों में बहुत ही उत्साह था कि भारत की वायु सेना की शक्ति जो की लड़ाकू जेट की मारक क्षमता बढ़ गई हैं। राफेल 4.5 जेनरेशन का मल्टी रोल कांबेट एयरक्रॉफ्ट है, जो आकाश से जमीन पर और आकाश से आकाश दोनों में ही दुश्मन पर धावा बोलने में सक्षम है। एक बार ईधन भरने पर 10 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है। इसकी स्पीड इतनी है कि एक मिनट में ही राफेल 60000 फीट की उंचाई पर जा सकता है और 2130 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से यह उड़ान भरने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता करीब 3700 किमी तक है। राफेल जेट मिटियोरस्कैल्प और बीवीआर जैसे अति आधुनिक मिसाइलों और हथियारों से लैस हैं। इसकी रडार प्रणाली भी बेहद मजबूत है और यह परमाणु मिसाइलों के संचालन की भी पूरी क्षमता रखता है।