शनिवार, 24 अप्रैल 2021

गुस्ताखी हुई है तो उसके लिए मैं माफी चाहता हूं - केजरीवाल



आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ ऑनलाइन बैठक में अजीब घटना सामने आया। बैठक का मुद्दा कोरोना से बिगड़ते हालात थे, लेकिन पूरी बात इस बैठक का दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा लाइव टेलीकास्ट कर दिए जाने पर जा अटकी। जैसे ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बोलने की बारी आई तो मीटिंग का लाइव टेलीकास्ट देश के टीवी चैनलों पर चलने लगा। प्रधानमंत्री मोदी को सुचना मिली तो उन्होंने ने टोका कहा कि हमारी जो परंपरा हैहमारे जो प्रोटोकॉल हैंउसके खिलाफ हो रहा है कि कोई मुख्यमंत्री ऐसी इनहाउस मीटिंग को लाइव टेलीकास्ट करे। ये उचित नहीं हैहमें हमेशा संयम पालन करना चाहिए।’  इसमें अरविन्द केजरीवाल की मक्करी दीखता है, काम नही करना अपने को काम दिखना  जैसा कि  प्रत्येक चैनल पर केजरीवाल का विज्ञापन दिखया जा रहा लेकिन कुछ भी नहीं करते हुआ दिखते है 



केजरीवाल प्रधानमंत्री से कह रहे थे- हम आभारी हैं कि केंद्र सरकार ने दिल्ली का ऑक्सीजन कोटा बढ़ा दिया, लेकिन हालात बहुत गंभीर हो चुके हैं। हम किसी को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। हमने पिछले दिनों केंद्र के कई मंत्रियों को फोन किए। उन्होंने पहले मदद की, पर अब तो वो भी थक गए हैं।

प्रधानमंत्री जी अगर दिल्ली में ऑक्सीजन की फैक्ट्री नहीं है तो क्या दो करोड़ लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी? जिन राज्यों में ऑक्सीजन प्लांट हैं, वो दूसरों की ऑक्सीजन रोक सकते हैं क्या? अगर किसी अस्पताल में एक-दो घंटे की ऑक्सीजन बच जाए या ऑक्सीजन रुक जाए और लोगों की मौत की नौबत आ जाए तो मैं फोन उठाकर किससे बात करूं? कोई ट्रक रोक ले तो किससे बात करूं? आप बस ये बता दीजिए।

हमें लोगों को भरोसा दिलाना होगा कि एक-एक जिंदगी कीमती है। हम दिल्ली के लोगों की तरफ से हाथ जोड़कर अपील कर रहे हैं कि तुरंत कोई कदम नहीं उठाया गया तो दिल्ली में बड़ी त्रासदी हो सकती है। मैं आपका मार्गदर्शन चाहता हूं।

सबसे ज्यादा ऑक्सीजन के ट्रक रोके जा रहे हैं। अगर आप उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक फोन लगा दें तो वह बहुत होगा। मैं मुख्यमंत्री होते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा। ईश्वर न करे कि कुछ अनहोनी हो गई, तो हम कभी अपने आप को माफ नहीं कर पाएंगे।

एक नेशनल प्लान बनना चाहिए। इसके तहत देश के सभी ऑक्सीजन प्लांट को आर्मी के जरिए सरकार टेकओवर करे। हर ट्रक के साथ आर्मी का एस्कॉर्ट व्हीकल रहेगा तो कोई उसे नहीं रोक पाएगा। 100 टन ऑक्सीजन ओडिशा और बंगाल से आनी है। हम कोशिश कर रहे हैं उसे दिल्ली लाने के लिए। हो सके तो हमें हवाई जहाज से उपलब्ध कराएं या आपका जो आइडिया है ऑक्सीजन एक्सप्रेस का, तो उससे से ही हमें ऑक्सीजन मिले।

इस पर प्रधानमंत्री ने टोका। बोले, ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस ऑलरेडी चल रही है।

केजरीवाल ने कहा, ‘जी लेकिन दिल्ली में नहीं आ रही। बाकी राज्यों में चल रही।

फिर बोले, ‘वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने अभी कहा है कि केंद्र सरकार को वैक्सीन 150 रुपए में एक और राज्यों का रेट 400 रुपए का होगा। एक ही देश में वैक्सीन के दो रेट कैसे हो सकते हैं? वैक्सीन का वन नेशन, वन रेट होना चाहिए। हर जान हमारे लिए कीमती है। सबको दवाई, वैक्सीन और ऑक्सीजन बिना किसी विवाद और रुकावट मिले। कोरोना के खिलाफ एक नेशनल प्लान होगा, तो हम सब मिलकर काम करेंगे। अब वो बोल रहे थे, ‘मेरा विश्वास है कि इस देश में अगर एक नेशनल प्लान होगा तो हम सभी राज्य सरकारें केंद्र के साथ मिलकर काम करेंगे। सर कोरोना की वजह से दिवंगत आत्माओं को शांति मिले...

तभी मोदी केजरीवाल को टोकते हुए कहते हैं, ‘एक मिनट, एक बात मैं कहना चाहूंगा कि ये हमारी जो परंपरा है, हमारे जो प्रोटोकॉल हैं, उसके खिलाफ हो रहा है कि कोई मुख्यमंत्री ऐसी इनहाउस मीटिंग को लाइव टेलीकास्ट करे। ये उचित नहीं है, हमें हमेशा संयम पालन करना चाहिए।’ इस पर केजरीवाल शांत हो जाते हैं। उनका टोन भी ढीला पड़ जाता है और बोलते हैं, ‘ठीक है सर, इसका ध्यान रखेंगे आगे से। सर मैं सभी आत्माओं को शांति मिले जिन-जिन लोगों का इस दौरान कोरोना की वजह से देहांत हो गया और उनके परिवारों को दुख सहने की शक्ति दे। अगर सर मेरी तरफ से कोई गुस्ताखी हुई है... मैंने कुछ कठोर बोल दिया, मेरे आचरण में कोई गलती हुई है, गुस्ताखी हुई है तो उसके लिए मैं माफी चाहता हूं। अभी तक जितने प्रेजेंटेशन हुए, वो अच्छे थे। आपने जो हमें निर्देश दिए हैं उसका पालन करेंगे।इसके बाद चैतरफा आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।

इस घटना ने सोशल मिडिया से लेकर सभी चैनलों पर केजरीवाल की हरकत पर लोग कमेन्ट करने लगे। अरविन्द केजरीवाल अपनी राजनीति चमकाने में लगे है सारे चैनल पर केजरीवाल का चेहरा दीखता है। इतना ही काम उन्होंने ठीक से किया होता तो दिल्ली की हाल इतनी नहीं खराब नहीं होती। वकील मोनिका अरोरा ने ट्विट किया की केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को आक्सीजन प्लांट लगाने की अनुमति और पैसा दिया था लेकिन अरविन्द केजरीवाल ने अपना काम ही ठीक से नहीं किया सारा ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ना चाह है वही 18 अप्रेल को केजरीवाल कह रहा थे की हमने आक्सीजन के लिए दिल्ली के सारे प्लांट में सरकारी आदमी लगा दिए की वे मोंट्रिंग करेगे की हास्पिटल तक आक्सीजन पहुचे। यह सब बातें अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ जा रहे है।      




सोमवार, 19 अप्रैल 2021

पाकिस्तान गृह युद्ध के मुहाने पर खड़ा

 



1920 में अंग्रेजों ने तुर्की के खलीफा को हटाकर युवा नेता कमाल पाशा को लोकतंत्र तरीके से सत्ता सौफ दिया। इससे भारत के मुसलमान नाराज हो गए और भारत में अंग्रेजों के खिलाफ खिलाफत आन्दोलन शुरू किया। इसी बीच महात्मा गाँधी ने खिलाफत आन्दोलन से उन्हें एक मौका मिल गया है। उनका मानना था कि भारत के हिन्दू और मुसलमान दोनों मिलकर अंग्रेजो से लड़कर का भारत को स्वंतत्र कराए। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को खिलाफत आन्दोलन में सहयोग करने के लिए 1920 में कलकत्ता अधिवेशन में मना लिया और फिर महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन शुरू किया। इसी बीच में मोहम्मद अली और शौकत अली बंधुओ के साथ-साथ अनेक मुस्लिम नेताओं ने गाँधी जी और कांग्रेस पार्टी को समझ लिया और उन्होंने अपना एजेंडा शुरू किया नया मुस्लिम देश पाकिस्तान बनाने का। इसी आन्दोलन से भारत के मुसलमानों के दिमाग में अलग देश पाकिस्तान का विचार को लोगों के दिमाग मे भरा गया। इस खिलाफत के आन्दोलन के गर्भ में पाकिस्तान नाम का देश आया और 15 अगस्त 1947 में जन्म हुआ।  

कोई भी विचार नकारात्मक हो तो उसका असर भी नकारात्मक होता है। पाकिस्तान का जन्म भारत से अलग एक मुस्लिम देश की नकारत्मकता से हुआ है। इसलिए पकिस्तान में आये दिन हो रही हिंसात्मक रूप का भी वह नकारात्मकता के मूल कारण है। 2015 में फ्रांस की पत्रिक में छपे मोहम्मद साहब के कार्टून से जिसके बाद मुस्लिम आतंकी ने चार्ली हेब्दो के कार्यालय में गोलीबारी से 14 कर्मचारियों की हत्या कर दिया गया था। 2020 में इस घटना पर फ़ांस के सरकारी भवनों में उन कार्टून को लगाया गया। इसे लेकर पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) ने आंदोलन किया की फ्रांस के दूतावास को पाकिस्तान से तुरंत हटाया जाए। 

फ्रांस के मंत्री ने फ्रांस के न्यूज़ चैनल 24 पर कहा कि पाकिस्तान में जो फ्रांस के विरुद्ध आंदोलन चल रहा है, पाकिस्तान को तुरंत प्रतिबंध लगाना ही होगा। इमरान खान सरकार ने आतंकी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर प्रतिबन्ध लगाया। लाहौर में रविवार दोपहर जब सुरक्षाबल इस संगठन के धरने को खत्म कराने पहुंचे तो कट्टरपंथियों ने उन पर हमला कर दिया। इस घटना में 3 लोगों के मारे जाने की खबर और लेकिन मीडिया में यह संख्या काफी  होने की आशंका हैक्योंकि कट्टरपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच काफी देर तक फायरिंग हुई। फायरिग की घटनाएँ पाकिस्तान की सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। दुसरे दिन सोमवार को पार्टी के प्रमुख साद हुसैन रिज्वी को गिरफ्तार कर लियाजिसके बाद टीएलपी ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। संगठन के प्रवक्ता का कहना है कि मरने वालों के शव तब दफन किए जाएंगे जब फ्रांस के राजदूत को बाहर निकाल दिया जाएगा। वही हिंसा के लिए जिम्मेदार संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर सख्ती दिखाना इमरान खान सरकार को भारी पड़ गया। 

अब यदि पाकिस्तान फ्रांस से राजनैतिक ( दूतावास )  संबंध तोड़ता है तो पाकिस्तान का बहुत बड़ा आर्थिक व राजनैतिक नुकसान होने वाला है। पाकिस्तान दुनिया का सबसे 115 बिलियन से ज्यादा कर्ज में डूबा देश हुआ है जिसमें पेरिस क्लब से 11 बिलियन तथा यूरोपीय यूनियन से 13 बिलियन से भी ज्यादा कर्ज ले चूका है इमरान खान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान का रुपया का दाम और गिर गया है फ्रांस यूरोपीय यूनियन देशों का एक सदस्य देश है। पाकिस्तान का यूरोपीय यूनियन से सीधा दुश्मनी हो जाएगा। यूरोपीयन यूनियन के सभी देश आपस में एक संबंध रखते हैं। यदि कोई देश इन मित्र देशों पर हमला करता है या किसी प्रकार की क्षति पहुँचता है तो सारे यूरोपीय यूनियन देश एक होकर उस देश का विरोध करते हैं। मतलब की पाकिस्तान का व्यापार का 50 प्रतिशत व्यापार यूरोपीय यूनियन के साथ होता है पाकिस्तान में व्यापार कम होंगे, पाकिस्तान के रुपए का मार्केट वैल्यू गिरेगा। पाकिस्तान में पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ेंगे, जिससे महंगाई और बढ़ जाएगी। पाकिस्तान का व्यापार घाटा और बढ़ जाएगा। जिसके कारण पाकिस्तान में बेरोजगारी और पाकिस्तान के लोगों का जो यूरोपीय यूनियन देशों में काम नही कर रहे हैं, उन्हें वहां से वापस पाकिस्तान आना पड़ेगा। उन्हें रोजगार का जो मौका मिला है, वह समाप्त हो जाएगा।

पाकिस्तान के पास लड़ाकू विमान नहीं है कहने के लिए तो चीन से बना  JF-17 थंडर है, जो एक नाम मात्र का जहाज है केवल हाथी के दांत के समान है। अमेरिका का F16 है वह भारत के खिलाफ युद्ध में उपयोग नहीं कर सकता। अब पाकिस्तान के पास बचता है मिराज 5 जो फ्रांस के कंपनी डाइसॉल्ट ने बनाया है  डाइसॉल्ट कंपनी बनाकर पाकिस्तान को बेची है, पाकिस्तान में इसकी अधिक संख्या में है  किन आधे से अधिक यह खराब हो चुके हैं उनको अग्रेशन और स्पेयर पार्ट्स नहीं देगा जिसके कारण पाकिस्तान का वायुसेना आज के समय ठप हो जाएगा। पकिस्तान के पास फ्रांस में बनी पनडुब्बी भी जिसे अपग्रेडेशन होने वाला था यदि भारत के युद्ध हुआ तो आज के समय सबसे बड़ा पाकिस्तान तबाह हो जायेगा। 

पाकिस्तान को आतंकवादी के लिस्ट में अभी ग्रे सूची में रखा गया है जो फ़्रांस कोशिश करेंगे कि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में कर दिया जाए जिसे पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट में हो जाने के बाद पूरी दुनिया के देशों से व्यापारिक और वहां के आना-जाना लगभग बंद हो जाएगा इससे पाकिस्तान की ही आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी इस समय पाकिस्तान एक सिविल वार के से युद्ध से जूझ रहा है, और आर्थिक रूप से पाकिस्तान का हालत खराब है इस तरह से फ्रांस से दुश्मनी पाकिस्तान को बहुत बड़ा महंगी पड़ने वाला  है।

 
    

शनिवार, 17 अप्रैल 2021

पूजास्थल कानून-1991 ( Places of Worship Act 1991 ) की वैधानिकता को चुनौती

 


पूजास्थल कानून-1991 की वैधानिकता को चुनौती देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस संबंध में बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में पूजास्थल कानून-1991 को भेदभावपूर्ण और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कानून की धारा 2, 3 और 4 को संविधान का उल्लंघन बताते हुए इन्हें रद्द करने की मांग की है।

भारतीय मुसलमान भारत के राजनीति में कांग्रेस का एक बहुत बड़ा वोट बैंक रहा है। इसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर नहीं नाराज कर सकती थी। इसलिए 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार ने राम मंदिर आन्दोलन के कारण एक ऐसा कानून बनाया। जो भारत में खास तौर से मस्जिदों को सुरक्षित कर सके, जो मुगल काल में मंदिर को तोड़कर बनाया गया हो। राम मंदिर के आन्दोलन में कई बार मथुरा और काशी के जन्वापी मस्जिद के बारे में आवाज उठाने लगी थी। ऐसा कई इतिहासकारों और लेखकों ने कई बार उल्लेख किया है की भारत में गजनी, गोरी, बाबर, हुमायू, अकबर और औरंगजेब के द्वारा लगभग तीन हजार मंदिरों को तोड़कर कर मस्जिद बनाई गयी है। आजाद भारत में हिन्दुओं बहुसंख्यकों के द्वारा मांग किया जाता रहा कि जो भी मंदिर तोड़कर कर मस्जिद बनाई गयी हो। उसे पुनः वापस मंदिर बनाया जाये, जैसा कि श्रीराम मंदिर अयोध्या मामले के अलावा मथुरा में श्री कृष्ण जन्मस्थान, काशी विश्वनाथ, विदिशा में विजय मंदिर, गुजरात के बटना में रुद्र महालय, अहमदाबाद में भद्रकाली मंदिर, राजा भोज की प्राचीन नगरी धार में भोजशाला जैसे कि अन्य आस्था स्थलों को मुगलकाल में तोड़कर मस्जिद, दरगाह और ईदगाह बना दिया गया।

कांग्रेस की सरकार ने लियाकत नेहरू समझौता 1950 में किया था जिसमे दोनों देशों के अल्पसंख्यकों को सुरक्षित एवं सुनिश्चित किया जाये लेकिन भारत ने माना पाकिस्तान ने नही माना पूजा स्थल कानून 1991 में एक ऐसा कानून बनाया जाये जो जितने भी मंदिर तोड़कर उनपर जो मस्जिद बनाई गई थी उन सभी मस्जिदों को कानून के दायरे लाकर सुरक्षित किया जाये। क्योंकि कांग्रेस का मुख्य बिषय यह था कि मुस्लिम तुष्टीकरण और अपना वोट बैंक को सुरक्षित करना था केंद्र सरकार को इस तरह का कानून बनाने का अधिकार ही नहीं है। संविधान में तीर्थस्थल राज्य का विषय है। यह संविधान की सातवीं अनुसूची की दूसरी सूची में शामिल है। केंद्र की तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने जो पूजा स्थल कानून 1991 में कानून बनाया गया। उसमें अयोध्या को बाहर रखा गया, लेकिन मथुरा को इसके दायरे में रखा गया। सरकार का कार्य कोर्ट का दरवाजा बंद करना नहीं है, लेकिन सरकार ने हिन्दू, जैन, सिखों, बौद्ध को अदालत के दरवाजे पर पहुंचने से रोक दिया है। सनातन भारत के अन्य समुदायों बौद्ध, जैन, सिखपारसी आदि का अपमान भी किया। यहाँ इतिहास में हिन्दुओं के साथ सैकडों वर्षो से नाइंसाफी किया गया था स्वंत्रत भारत में भी होता रहा है। यह इस्लाम की मूल भावना के खिलाफ भी है, जिसमें दूसरे की जमीन हड़पकर या दूसरों के उपासना स्थल तोड़कर मस्जिद बनाना निषिद्ध है।

भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने कहा, ‘सरकार का काम गैरकानूनी कार्य को कानूनी बनाना नहीं होता है, लेकिन कांग्रेस ने वह किया है। इसीलिए उस कानून को मैंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया है उनका कहना है कि हमारा मौलिक अधिकार है कि जो हमारे धार्मिक स्थान हैं उन पर हमारा पूर्ण स्वामित्व हो, उनकी देखरेख करने का हमें अधिकार है। लेकिन बहुत सारे चाहे वह मथुरा का मंदिर हो, भगवान विश्वनाथ का मंदिर हो जिनपर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है। सरकार का कर्तव्य था कि उनको कब्जों से मुक्त करवाकर जिसके हैं उन्हें सौंपा जाता, लेकिन कांग्रेस ने उल्टा किया। उसने जिसके पास उसका कब्जा था, उसी को मालिकाना हक दे दिया। उन्होंने मांग की है कि संवैधानिक प्रावधानों और हिंदू, जैन, बौद्ध और सिखों के मौलिक अधिकारों को संरक्षित करते हुए सुप्रीम कोर्ट उनके धार्मिक स्थलों को पुनर्स्थापित करे। साथ ही कानून की धारा 2, 3 और 4 को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 और 29 का उल्लंघन बताते हुए रद्द करने की अपील की है।


मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

यूरी गागरिन की अंतरिक्ष में 60 वर्ष, रूस ने इस पर घटना का जश्न मनाया

 


12 अप्रैल 1961मॉस्को में सुबह के 9:37 बज रहे थे। पूरा सोवियत संघ सांस थामे एकटक आसमान की ओर देख रहा था। जैसे ही वोस्टॉक-एयरक्राफ्ट को लॉन्च किया गयासभी की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। 108 मिनिट बाद वह कुशलपूर्वक वापस पृथ्वी पर लौट तो इतिहास बन गया था। इस क्षण जो हुआवो इतिहास में इससे पहले कभी नहीं हुआ था। पहली बार किसी इंसान ने अंतरिक्ष में कदम रखा। यह अंतरिक्ष की लड़ाई में अमेरिका पर सोवियत संघ की जीत थी इसके साथ ही यूरी गागरिन का नाम भी इतिहास में दर्ज हो गया। एक किसान माता-पिता के बेटे यूरी गागरिन जब अंतरिक्ष में गए तो कोई उन्हें नहीं जानता था लेकिन जब वे लौटे तो दुनिया भर में मशहूर हो गए थे वे रूस के राष्ट्रीय हीरो तो बन साथ ही पूरी दुनिया ने उनका स्वागत एक हीरो की तरह किया।

1934 में रूस के क्लूशीनो गांव में जन्मे यूरी एलेक्सेविच गागरिन एक बढ़ई के बेटे थे। जब यूरी 6 साल के थे, तब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उनके घर पर एक नाजी अधिकारी ने कब्जा कर लिया। उनके पूरे परिवार को दो साल तक झोपड़ी में रहना पड़ा। नाजियों ने उनकी 2 बहनों को बंधुआ मजदूर बनाकर जर्मनी भेज दिया।

वह जब 16 वर्ष के हुए तो मॉस्को चले गए। वहां उन्हें सरातोव के एक टेक्निकल स्कूल में जाने का मौका मिला। वहां उन्होंने एक फ्लाइंग स्कूल को ज्वॉइन कर लिया। यहीं से उनके मन में प्लेन में बैठकर आसमान छूने का सपना पलने लगा। 1955 में उन्होंने पहली बार अकेले विमान उड़ाया। 1957 में ग्रेजुएशन पूरा कर यूरी एक फाइटर पायलट बन गए थे।

1957 में ही सोवियत संघ ने पहले सेटेलाइट स्पूतनिक-1 को अंतरिक्ष में स्थापित किया था। इसके बाद तय किया गया कि अब इंसान को अंतरिक्ष में भेजा जाए। इसके लिए पूरे देश से आवेदन मंगवाए गए। हजारों लोगों की कड़ी मानसिक और शारीरिक परीक्षा ली गई। आखिरकार 19 लोगों का चयन हुआ। यूरी गागरिन भी इनमें से एक थे।

अंतरिक्ष से लौटने के बाद गागरिन दूसरे अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देने लगे। 27 मार्च 1968 को ऐसे ही एक ट्रेनिंग सत्र के दौरान उनका मिग-15 जहाज हादसे का शिकार हो गया। हादसे में यूरी गागरिन और साथी पायलट की मौके पर ही मौत हो गई। उन्हें सम्मान देने के लिए 1968 में उनके होम टाउन का नाम बदलकर 'गागरिन' रख दिया गया।

सोमवार, 12 अप्रैल 2021

ध्येय आया देह लेकर- डॉ केशव बलिराम हेडगेवार


 

आज भारत में हिन्दू, हिंदुत्व, राष्ट्रीयता और राम मंदिर पर बात हो रही, इसकी पृष्ठ भूमिका डॉ हेडगेवार के जन्म से शुरू हो गया था। ऐसा व्यक्तित्व हजारों वर्षो के तप के बाद अवतरण होता है। अपने 50 वर्ष के जीवनकाल में आने वाले 100 वर्ष पूर्व का भारत का कल्पना कर लिए थे। अपने जीवन का अनमोल क्षण एक ध्येय के लिए समर्पित कर गए की आने वाली पीढ़िया ऐसे ही राष्ट्रीय कार्य करने के लिए समर्पित होते रहे।

डॉ॰ हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल, 1889 को महाराष्ट्र के नागपुर जिले में पण्डित बलिराम पन्त हेडगेवार के घर हिन्दू वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था। आपकी माता का नाम रेवतीबाई था। माता-पिता ने पुत्र का नाम केशव रखा। केशव का बड़े लाड़-प्यार से लालन-पालन होता रहा। उनके दो बड़े भाई भी थे, जिनका नाम महादेव और सीताराम था। पिता बलिराम वेद-शास्त्र एवं भारतीय दर्शन के विद्वान थे एवं वैदिक कर्मकाण्ड (पण्डिताई) से परिवार का भरण-पोषण चलाते थे। वैसे तो हेडगेवार परिवार मूल रूप से तेलंगाना के कांडकुर्ती गांव का रहने वाला था। लेकिन हैदराबाद (तेलंगाना) के मुस्लिम शासक निजाम ने वहाँ के हिन्दुओ का जीना दूभर कर दिया था। यहाँ तक कि कोई हिन्दू मंदिर नहीं बना सकता था और यज्ञ आदि करने पर भी प्रतिबन्ध था। इसलिए मराठा वंश के भोसले के राज्य नागपूर में आकर वैदिक कर्मकांड उचित विधान से कर सके। जब केशव 13 बरस के थे, तो प्लेग की वजह से उनके माता-पिता का निधन हो गया। उनके बड़े भाई महादेव पंत और सीताराम पंत ने उनकी पढ़ाई-लिखाई का ख़्याल रखा।

केशव के सबसे बड़े भाई महादेव भी शास्त्रों के अच्छे ज्ञाता थे ही मल्ल-युद्ध की कला में भी बहुत माहिर थे। वे रोज अखाड़े में जाकर स्वयं तो व्यायाम करते ही थे गली-मुहल्ले के बच्चों को एकत्र करके उन्हें भी कुश्ती के दाँव-पेंच सिखलाते थे। महादेव भारतीय संस्कृति और विचारों का बड़ी सख्ती से पालन करते थे। केशव के मानस-पटल पर बड़े भाई महादेव के विचारों का गहरा प्रभाव था। किन्तु वे बड़े भाई की अपेक्षा बाल्यकाल से ही क्रान्तिकारी विचारों के थे। जब वो हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहे थे तो वंदेमातरम गाने की वजह से उन्हें निकाल दिया गया था क्योंकि ऐसा करना ब्रिटिश सरकार के सर्कुलर का उल्लंघन था। हाई स्कुल के बाद उन्हें साल 1910 में मेडिकल की पढ़ाई के लिए कलकत्ता भेज दिया गया। घर से कलकत्ता गये तो थे डाक्टरी पढने परन्तु वापस आये उग्र क्रान्तिकारी बनकर। कलकत्ता में श्याम सुन्दर चक्रवर्ती के यहाँ रहते हुए बंगाल की गुप्त क्रान्तिकारी संस्था अनुशीलन समिति के सक्रिय सदस्य बन गये। डॉक्टरी करते करते ही उनकी तीव्र नेतृत्व प्रतिभा को भांप कर उन्हें हिन्दू महासभा बंगाल प्रदेश का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। इस प्रकार अनेक क्रान्तिकारियों की साथ में रहकर समस्त गतिविधियों का ज्ञान और संगठन-तन्त्र की गुणदोषों को सीखे और समझे। 1914 में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से प्रथम श्रेणी में डॉक्टरी की परीक्षा भी उत्तीर्ण किया और साल 1915 में वो डॉक्टर के रूप में नागपुर लौट आए। परन्तु घर वालों की इच्छा के विरुद्ध देश-सेवा के लिए नौकरी और विवाह का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

डॉ हेडगेवार के मन में शासकीय सेवा में या अपना अस्पताल खोलकर पैसा कमाने के लिये डॉक्टर नहीं बने। भारत का स्वातंत्र्य यही उनके जीवन का ध्येय था। उस ध्येय का विचार करते करते उनके ध्यान में स्वतंत्रता हासिल करने हेतु क्रांतिकारी क्रियारीतियों की मर्यादा में रहकर करने की आवश्कता है। दो-चार अंग्रेज अधिकारियों की हत्या होने के कारण अंग्रेज यहाँ से भागनेवाले नहीं थे। किसी भी बड़े आंदोलन के सफलता के लिये व्यापक जनसमर्थन की आवश्यकता होती है। क्रांतिकारियों की क्रियाकलापों में उसका अभाव था। सामान्य जनता में जब तक स्वतंत्रता की प्रखर भाव निर्माण नहीं होती, तब तक स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होगी और मिली तो भी टिकेगी नहीं, यह बात अब उनके मनपर अंकित हो गई थी।

1921 में अंग्रेजो ने तुर्की को परास्त कर, वहां के सुल्तान को गद्दी से उतार दिया था वही सुल्तान मुसलमानों के खलीफा भी कहलाते थे। ये बात भारत व अन्य मुस्लिम देशों के मुसलमानों को नागवार गुजरी जिससे जगह-जगह आन्दोलन हुए, हिन्दुस्थान में खासकर केरल के मालाबार जिले में आन्दोलन ने उग्र रूप ले लियास। 1922 में भारत के राजनीतिक पटल पर गांधी के आने के पश्चात ही मुस्लिम सांप्रदायिकता ने अपना सिर उठाना प्रारंभ कर दिया। खिलाफत आंदोलन को गांधी जी का सहयोग प्राप्त था - तत्पश्चात नागपुर व अन्य कई स्थानों पर हिन्दू, मुस्लिम दंगे प्रारंभ हो गये तथा नागपुर के कुछ हिन्दू नेताओं ने समझ लिया कि हिन्दू एकता ही उनकी सुरक्षा कर सकती है। ऐसी कई बातें डॉ हेडगेवार को भी खटकने लगी वह सोचने को प्रवृत हुए कि समाज में जिस एकता और धुंधली पड़ी देशभक्ति की भावना के कारण हम परतंत्र हुए है वह केवल कांग्रेस के जन आन्दोलन से जागृत और पृष्ट नही हो सकती जन-तन्त्र के परतंत्रता के विरुद्ध विद्रोह की भावना जगाने का कार्य बेशक चलता रहे लेकिन राष्ट्र जीवन में गहरी हुयी विघटनवादी प्रवृति को दूर करने के लिए कुछ  उपाय करने की मुझे जरूरत है इसी विचार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि बनी 

1925 में विजयदशमी के दिन भोसले के बाडे जिसे मोहितेबाड़े के कुछ भाग को साफसुथरा कर छोटे बच्चों के साथ खेल खेल से शुरू हुआ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ .....