गुरुवार, 11 मार्च 2021

बंगाल के सत्ता परिवर्तन के केंद्र-नंदीग्राम

2021 में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। इन विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल का चर्चा ज्यादा हो रहा है। विधानसभा चुनाव से चंद माह पहले एक बार फिर बंगाल की राजनीति में नंदीग्रामसुर्खियों में है। पिछले तीन दशकों की राजनीति में 2007 की नंदीग्राम आंदोलन को हथियार बना कर ही वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2011 में  लेफ्ट पार्टी को अपदस्थ करने में सफलता पाई थी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पूर्व मंत्री नंदीग्राम आंदोलन के नायक रहे शुभेंदु अधिकारी के टीएमसी छोड़ कर बीजेपी में शामिल होने के बाद लगातार नंदीग्राम की चर्चा में है। नंदीग्राम के लिए टीएमसी और बीजेपी में लगातार संघर्ष की घटनाएं हो रही हैं और वहां से लगातार झड़पें की खबरें आ रही हैं। 

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में नंदीग्राम का एक महत्वपूर्ण स्थान है। स्वतंत्रता के पहले भी नंदीग्राम ने अपने उग्र आंदोलन के कारण ब्रिटिश शासन को झुकाने में सफल रहा था. 1947 में देश की स्वतंत्रता से पहले, “तामलुकको अजय मुखर्जी, सुशील कुमार धारा, सतीश चन्द्र सामंत और उनके मित्रों ने नंदीग्राम के निवासियों की सहायता से अंग्रेजों से कुछ दिनों के लिए मुक्त कराया था और ब्रिटिश शासन से इस क्षेत्र को मुक्त करा लिया था। भारत का यही एकमात्र क्षेत्र है, जिसे दो बार स्वतंत्रता मिली है।

1975 आपातकाल के बाद कम्युनिस्ट के पास पश्चिम बंगाल की सत्ता कांग्रेस से छीन लिया था 

लेकिन तब तक बंगाल से उघोगपति बाहर जा चुके थे। कम्युनिस्ट का जन्म ही पूजीपतियों के विरुद्ध हुआ है। 1968 नक्सलवादी से निकले नक्सलियों ने बंगाल को हिंसा आंदोलन, धरना, प्रदर्शन, मिलों और कारखानों में हड़ताल कर उघोगों को बंगाल से बाहर अन्य राज्यों में जाने के लिए मजबूर कर दिया। बंगाल में कुछ समय बाद चीनी माओवादियों के अनुसार बंदूक की नोंक से सत्ता प्राप्त करने की प्रयोग सफल होने के बाद, यह अन्य राज्यों में शुरू की, लेकिन सफलता नही मिली। 1999 में बंगाल में परिवर्तन की लहर दौड़ पड़ी ज्योति बसु ने समझदारी दिखाते हुए बुद्धदेव भट्टाचार्य को नया मुख्यमंत्री का पद दिया। बेहाल बंगाल को फिर संवृद्धि बनाने के लिए उघोगपतियों को राज्य में निवेश करने के लिए बुलाया। लेकिन हड़ताल, बंद, लेवी, मजदूर यूनियन के कारण कोई भी नहीं आया। 

2007 में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने SEZ तहत स्पेशल इकोनॉमिक्स जोन जिसे आर्थिक गलियारा बनाकर काम शुरू करने की कोशिश की लेकिन 25 वर्षो से उघोगों का विरोध करना मँहगा पड़ा लेफ्ट सरकार को। पश्चिम बंगाल की लेफ्ट सरकार ने स्पेशल इकनॉमिक जोननीति के तहत नंदीग्राम में एक केमिकल हब की स्थापना करने की अनुमति प्रदान करने का फैसला किया था। राज्य सरकार की योजना को लेकर उठे विवाद के कारण विपक्ष की पार्टियों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आवाज उठाई। टीएमसी, SUCI,जमात उलेमा-ए-हिंद और कांग्रेस के सहयोग से भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमिटी (BUPC) का गठन किया गया और सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू किया गया। इस आंदोलन का नेतृत्व तत्कालीन विरोधी नेत्री ममता बनर्जी कर रही थीं और इसके नायक शुभेंदु अधिकारी थे।

सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ट नेताओं ने सभी विपक्षियों की उपेक्षा करते हुए इस आन्दोलन को औद्योगीकरण के खिलाफकरार घोषित किया और हालात तब बिगड़े जब समीप के हल्दिया के तात्कालीन एमपी लक्ष्मण सेठ के नेतृत्व में हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटीने भूमि अधिग्रहण के लिए नोटिस जारी कर दिया.।इसके परिणाम स्वरूप CPI(M) और BUPC दोनों के समर्थकों के बीच हिंसात्मक संघर्ष की घटना घटी। सत्तारूढ़ पार्टी ने अपना पिछला प्रभुत्व जमाने की कोशिश की तो उसने नाकेबंदी को हटाने और परिस्थिति को सामान्यबनाने के बहाने अपने प्रशासन को कार्यप्रवृत्त किया. 14 मार्च 2007 की रात को पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपराधियों की सहायता से राज्य पुलिस के साथ मिलकर एक जॉइंट ऑपरेशनकिया और कम से कम 14 लोगों की हत्या कर दी गई। ममता बनर्जी के नेतृत्व में कई लेखकों, कलाकारों, कवियों और शिक्षा-शास्त्रियों ने पुलिस फायरिंग का कड़ा विरोध किया, जिससे परिस्थिति पर अन्य देशों का ध्यान आकर्षित हुआ


अंततः यह आंदोलन के दौरान सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा, लेकिन इस आंदोलन का राजनीति पर असर पड़ा और ममता बनर्जी ने जनमानस में अपनी छवि बनाने में सफल रही और इसका परिणाम हुआ कि साल 2011 के विधानसभा चुनाव में लेफ्ट की 34 वर्षों के शासन को समाप्त करने में सफल रही और राज्य में मां, माटी, मानुष की सरकार की स्थापना की।


मंगलवार, 9 मार्च 2021

रोहिंग्या को वापस अपने देश म्यांमार जाना ही पड़ेगा ...


जम्मू कश्मीर प्रशासन ने जम्मू में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की बायोमेट्रिक जानकारी सहित अन्य विवरण जुटाने का काम शनिवार से शुरू कर दिया। इसके बाद जम्मू में अवैध रूप से रह रहे 168 रोहिंग्याओं को जेल भेज दिया गया है। 

जम्मू कश्मीर पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल रैंक अधिकारी मुकेश सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि जम्मू में अवैध रूप से रह रहे जिन आप्रवासियों के पास पासपोर्ट अधिनियम की धारा (3) के मुताबिक, वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे, उन्हें हीरानगर के श्होल्डिंग सेंटरश् भेजा गया है। जम्मू कश्मीर के गृह विभाग की फरवरी 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 6523 रोहिंग्या पाँच जिलों में 39 कैंप्स में रहते हैं। लेकिन एक सरकारी आकंड़ों के अनुसार रोहिंग्या मुस्लिमों और बांग्लादेशी नागरिकों समेत 13,700 विदेशी जम्मू और सांबा जिलों में रह रहे हैं। जहां 2008 से 2016 के बीच इनकी जनसंख्या में छह हजार से अधिक की वृद्धि हुई।

जब से जम्मू कश्मीर से धारा 370 समाप्त किया है और देश में NRC तथा CAA लागू किया गया है। वहाँ जम्मू कश्मीर में हिन्दू जो 1947 विभाजन के बाद जम्मू कश्मीर में बस चुके हैं लेकिन उन्हें भारत की नागरिकता नही मिली तथा अन्य राज्य से विगत 15 वर्ष या इससे पूर्व आकर रह रहे है ऐसे नागरिकों को जम्मू की नागरिकता दिया जा रहा है ऐसे में  प्रशासन अधिकारी, कर्मचारियों जो शासकीय नौकरी करने वाले या व्यवसाय करने वाले भारतीयों को भी जम्मू कश्मीर की नागरिकता दी जा रही हैं। इस सर्वे में कई स्थानों पर रोहिंग्या लोगों भी मिले जिनके पास फर्जी आधार कार्ड, पेन कार्ड,पासपोर्ट तथा वोटर आईडी कार्ड भी मिले। जिसके बाद सरकार ने घर जाँच शुरू किया गया है। तो अब तक 168 रोहिंग्या लोग मिले जिन्हें जेल भेज दिया गया है।

रोहिंग्या म्यांमार के बांग्लाभाषी मुसलमान हैं। जो कि दुनिया के सबसे खतरनाक मुस्लिम समुदाय है। जिन्हें बांग्लादेश भी नही अपनाना चाहता है। बांग्लादेश अपने नागरिकों को रोहिंग्या से शादी करने की अनुमति नहीं देता है जबकि दोनों समुदाय मुसलमान है रोहिंग्या समुदाय को अन्य मुस्लिम देश भी नही अपनायते है। क्योंकि ये आपराधिक प्रवृत्ति के कारण इसे कोई भी देश नही चाहता है क्योंकि किसी भी देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरनाक माना जाता है। ये जहाँ भी रहते हैं वहाँ पर आपराधिक घटनाए बढ़ जाती हैं। ये लोग ड्रग्स माफिया, मानव तस्करी, वेश्यावृत्ति, देहव्यापार तथा आंतकियों घटनाओं में शामिल होते हैं। जहाँ भी जाते है अधिक बच्चे पैदा करते हैं। यहाँ तक की 14 तक की बच्चियों की शादी कर दी जाती है की अधिक से अधिक बच्चा पैदा कर जनसंख्या वृद्धि किया जाए। BBC की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एक बच्ची की शादी 57 साल के रोहिंग्या से किया गया, जब वह 16 साल की हुई तो उसके दो बच्चें थे। 

अब बात यह उठ रही है कि म्यांमार से चलकर हजारों की संख्या में रोहिंग्या हजारों मीलों दूर जम्मू कश्मीर में कैसे पहुँचे ? 

यह जांच का विषय होना चाहिए...




शुक्रवार, 5 मार्च 2021

सुशांत की मौत में ड्रग्स एंगल पर NCB ने रिया सहित चार्जशीट फाइल की



भारत के फिल्मी दुनिया या मुंबई फिल्मी दुनिया के एक होनहार अभिनेता सुशांत सिंह की संधिग्ध मौत ने पुरे देश को हिला दिया था। इसके बाद मुंबई फिल्मी दुनिया की काली सचाई जिसमें नशा खोरी, भाई भतीजावाद, नग्नता, हिंदुत्व और राष्ट्र विरोधी उनकी गतिविधियों देश के सामने आ गया। लोगों के भावना के अनुरूप मुंबई पुलिस ने सही दिशा में जाँच नहीं की।सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद सी बी आई ने जाँच शुरू किया। लेकिन अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया की सुशांत की हत्या या आत्महत्या। अब  सुशांत सिंह की मौत पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी नशीले पदार्थ ( Durg angle ) उपयोग सेवन करने की भी जाँच भी कर रही है।  

आज शुक्रवार को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मुंबई की NDPS कोर्ट में चार्जशीट फाइल कर दी। यह लगभग 12 हजार पेज की है जिसमे चार्जशीट में सुशांत की गर्ल फ्रेंड रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक, सुशांत के मैनेजर सैमुअल मिरांडा, दीपेश सावंत और कई ड्रग पैडलर शामिल हैं।समेत 33 आरोपियों के नाम हैं और 5 लोगों को फरार बताया गया है। इसी केस से मिले सुराग के बाद एक अन्य केस में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बॉलीवुड में कुछ नामचीन एक्ट्रेस से भी पूछताछ की है। इन दस्तावेजों में एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के बयान भी शामिल किए गए हैं। इस चार्जशीट के साथ 50 हजार पेज के डिजिटल एविडेंस भी हैं। इनमें आरोपियों के बीच हुई वॉट्सऐप चैट, उनके कॉल डेटा रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेजों समेत अन्य सबूत को भी शामिल हैं। 200 से अधिक गवाहों के बयान को भी इसमें शामिल किया गया है। 

14 जून 2020 को सुशांत सिंह  का शव उनके बांद्रा स्थित प्लैट में पंखे से लटका मिला था। मुंबई पुलिस ने प्राथमिक रिपोर्ट भी दर्ज करने से बच रही थी। मुंबई पुलिस का कहना था कि सुसाइड नोट भी नहीं मिला , सुशांत सिंह 6 महीने डिप्रेशन में था। मुंबई पुलिस ने सही दिशा में जाँच नही करने पर देश के लोगों में आक्रोश का संदेश गया हत्या या आत्महत्या। फिर सुशांत की मौत के दो महीने बाद उनके पिता ने पटना में बिहार पुलिस में केस दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि रिया चकवर्ती जहर देकर मार दिया तथा मेरे बेटे के 17 करोड़ रुपये ले ली है। पटना पुलिस के अधिकारियों को मुंबई पुलिस के द्रारा सहयोग नहीं किया। बल्कि उनके अधिकारियों को 15 दिनों के लिए क्वरटाइन कर दिया। जिसके बाद बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में मामला लेकर गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र विभाग CBI के द्वारा जाँच किया जाए। 

सुशांत सिंह की मौत पर मुंबई में हो रहे राजनीति में कुछ फोटो और वीडियो भी दिखी जिसमें नशा में दिखे। सुप्रीमकोर्ट ने यह केस  जब सीबीआई को सौंप दिया था। तो यहीं से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री इस केस में हुई और रिया के वॉट्सऐप चैट की जांच से ड्रग्स का एंगल सामने आया। ड्रग्स से जुड़ी चैट मिलने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एंट्री हुई और बॉलीवुड में चल रहे बड़े ड्रग्स का रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। देश ने देखा की किस तरह सफ़ेद पर्दे के पीछे कितना घिनौना खेल होता है देश में प्रतिभावान लोगों को कैसे पीछे कर अभिनेतायो के निक्कमे लड़के या लड़की को काम मिल जाता है लेकिन प्रतिभावान लोगों को किनारे कर दिया जाता है 

सुशांत सिंह राजपूत एक प्रतिभावान व्यक्तित्व था दिल्ली में पढाई हुई है वाही से इंजीयरिंग करने के बाद टीवी सीरियल में काम करना शुरू किया अपनी प्रतिभा के दम पर फिल्मों में काम करना शुरू किया सुशांत सिंह अपने मेहनत से मुंबई फ़िल्मी दुनिया में स्थान बनाया अब वह खत्म हो गया ......


सोमवार, 1 मार्च 2021

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वदेशी को वैक्सीन लगवाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत बायोटेक की कोवैक्सिन लगवाई। जो कि भारत बायोटेक के द्वारा भारत के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों द्वारा स्वदेशी कोवैक्सीन बनाया गया है। जिसे लेकर विपक्ष ने संदेह व्यक्त किया तथा फिर से मोदी सरकार पर सवाल खड़े किए थे। पुडुचेरी की नर्स ने टीका लगाया, केरल की नर्स पास खड़ी थीं और प्रधानमंत्री मोदी जी असम का गमछा पहने थे। लेकिन सुई की दर्द विपक्ष को हो रही है 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना का पहला टीका लगवा लिया है। उन्हें भारत बायोटेक की कोवैक्सिन का प्रथम डोज दिया गया। प्रधानमंत्री सोमवार की सुबह असम का गमछा गले में डालकर दिल्ली AIIMS पहुंचे। यहां पुडुचेरी की पी निवेदा ने मोदी को टीका लगाया, इस दौरान केरल की सिस्टर रोसम्मा अनिल पास में खड़ी थीं। इन तीनों राज्यों में 27 मार्च से 6 अप्रैल तक विधानसभा चुनाव होने हैं। अब तक भारत बायोटेक की कोवैक्सिन विपक्ष के द्वारा सरकार पर आरोप लगाया जाता रहा है कि तीसरे चरण की वैक्सीन बिना क्लिनिकल टायल किये ही सरकार ने लॉन्च कर दिया। अभी भारत बायोटेक द्वारा प्रमाणित नही है। सरकार हड़बड़ी में लोगों के जान से खिलवाड़ कर रही है। इन सब बातों का अंत प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं को को वैक्सीन लगाकर कर दिया है। बार बार विपक्ष के कारण जनता में सन्देह बनाया जा रहा था कि भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया को वैक्सीन अभी भी प्रारंभिक जांच में है। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने भारत बायोटेक स्वदेशी निर्मित को वैक्सीन को टीकाकरण रोक दिया है। यहाँ पर कोशिड वैक्सीन लगाया जा रहा है।

भारत में कोविड-19 से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान का दूसरा चरण 1 मार्च से प्रारभ हो गया है। इस दुसरे चरण में 60 वर्ष से अधिक और 45 वर्ष से अधिक गंभीर के व्यक्तियों को लगाया जा रहा है भारत में लोगों को दो तरह की वैक्सीन दी जा रही है। एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया जिसे भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन।

जहां जो भी वैक्सीन लगाई जा रही है, वहां के नियामकों ने उसे सुरक्षित बताया है। वैक्सीन के लिए पहले लैब में सेफ्टी ट्रायल शुरू किए जाते हैं, जिसके तहत कोशिकाओं और जानवरों पर परीक्षण और टेस्ट किए जाते हैं। इसके बाद इंसानों पर अध्ययन होते हैं लैब का सेफ्टी डेटा ठीक रहता है तो वैज्ञानिक वैक्सीन के असर का पता लगाने के लिए आगे बढ़ सकते हैं।पूरे काम और निष्कर्ष को स्वतंत्र रूप से जांचा गया और सत्यापित किया गया। कोविड वैक्सीन के परीक्षण बहुत तेज़ गति से किए गए, लेकिन पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया।

भारत की स्वदेशी कोवैक्सीन के डेटा की कमी को लेकर शुरू में चिंताएं जताई गई थीं, लेकिन इस वैक्सीन को बनाने वाले भारत बायोटेक के अध्यक्ष डॉ. एला ने कहा कि 26,000 में से लगभग 24,000 वॉलंटियर्स तीसरे चरण के परीक्षण में भाग ले चुके हैं, और फरवरी तक वैक्सीन की एफिकेसी यानी वैक्सीन कितनी प्रभावी है, उसका डेटा उपलब्ध होगा।

वैक्सीन से साइड-इफ़ेक्ट हो सकता है -

वैक्सीन आपको कोई बीमारी नहीं देती, बल्कि आपके शरीर के इम्यून सिस्टम को उस संक्रमण की पहचान करना और उससे लड़ना सिखाती है, जिसके ख़िलाफ़ सुरक्षा देने के लिए उस वैक्सीन को तैयार किया गया है। वैक्सीन लगने के बाद कुछ लोगों को हल्के लक्षण हो  सकते हैं। ये कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि वैक्सीन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया होती है।लगभग 10 में से एक व्यक्ति को जो सामान्य रिएक्शन हो सकता है वह भी कुछ दिन में ठीक हो जाता है, जैसे - बांह में दर्द होना, सरदर्द या बुख़ार होना, ठंड लगना, थकान होना, बीमार और कमज़ोर महसूस करना, सिर चकराना, मांसपेशियों में दर्द महसूस होना।

भारत में किसी वैक्सीन को तभी मंज़ूरी मिलती हैजब ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीसीजीआई) ये फ़ैसला करता है कि वैक्सीन इस्तेमाल के लिए सुरक्षित और असरदार है।

इसी तरह अन्य देशों में भी नियामक होते हैं जो वैक्सीन के इस्तेमाल को मंज़ूरी देते हैं। मंज़ूरी के बाद भी वैक्सीन के असर पर नज़र रखी जाती है, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि आगे इसका कोई दुष्प्रभाव या दीर्घकालिक जोखिम नहीं है। इसके बाद किन लोगों को पहले वैक्सीन दी जानी है, ये सरकारें तय करती हैं।

अतः में - मुझे भी कोविडशी वैक्सीन लगा है लेकिन मुझे अबतक ऐसा कुछ भी लक्षण नही दिखाई या महसूस नही हुआ। मैं बिल्कुल स्वास्थ्य हू