मंगलवार, 23 जून 2020

सोनम वांगचुक की बॉयकॉट चाइना की अभियान, अब असर दिखना शुरू ...



भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में बॉयकॉट चाइनीज़ प्रोडक्ट्स और वोकल फॉर लोकल मुहिम देश में फिर से शुरू हो गई है। इसकी शुरुवात सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो के माध्यम से किया था, इस अभियान का परिणाम दिखा शुरू हो गया है चीनी कंपनियों के दबदबे वाले स्मार्टफोन बाजार में घरेलू मोबाइल कंपनियां फिर से आने की कोशिश शुरू कर दिए है यानि खुद के लिए कमबैक के तौर पर देख रही हैं। और खास बात है की भारत सरकार ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मिशन को बढ़ाने के मकसद से सरकार ने बड़ा फैसला किया है सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर प्रोडक्ट रजिस्टर करने के लिए 'कंट्री ऑफ ओरिजन'  बताना जरूरी होगा सभी विक्रेताओं को अपने प्रोडक्ट के मूल देश (country of origin) की जानकारी देनी ही होगी प्रोडक्ट के बारे में सभी जानकारी और प्रोडक्ट के मूल देश की जानकारी नहीं देने पर प्रोडक्ट को GeM प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया जाएगा

वही चीन भारत में चीनी सामान के बहिष्कार से तिलमिला उठा है। चीनी समाचार पत्र में  लेख में सोनम वांगचुक का भी उल्लेख करते हुए कहा गया कि सोनम वांगचुक जैसे शख्स आम भारतीयों को चीनी सामानों का बहिष्कार करने के लिए उकसा रहे हैं तथा चीन के खिलाफ आम भारतीयों को भड़काने और बदनाम करने की यह जान-बूझकर की गई कोशिश है। चीनी सामानों के बहिष्कार की अपील पूरी तरह फेल हो जाएगीक्योंकि ये उत्पाद आम भारतीयों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

चीन को सबक सिखाने के लिए सोनम वांगचुक ने यूट्यूब पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने बताया कि चीन को आईना दिखाने के लिए क्या किया जा सकता है। उनके हिसाब से इसके दो तरीके हैं- एक तो सेना की तैनाती और दूसरा भारतीयों की ओर से चीनी सामान का बहिष्कार। सोनम वांगचुक के इस वीडियो को लोगों ने समर्थन देते हुए सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया था। आम भारतीय चीन से उत्पादित सामानों का खुले आम बहिष्कार कर रहा है  


शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

मुकेश अम्बानी की जियो और फेसबुक के बीच बड़ी डील, शेयर मार्केट लंबी छलाग


कोरोना वायरस से पूरी दुनिया लॉकडाउन के बीच आर्थिक संकट से गुजरते हुए, लेकिन इसी बीच अच्छी और बड़ी खबर आई कि - देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो और सोशल मीडिया की अग्रणी कंपनी पेसबुक के बीच सबसे बड़ी साझेदारी हुई। सुबह की यह खबर पर मुकेश अंबानी ने आकर मिडिया को यह जानकारी दी। वैसे ही रिलायंस कंपनी के सारे शेयर के साथ एक महीने से नीचे से ऊपर शेयर बाजार उठ खड़ा हुआ।

इस डील पर फेसबुक और जियो के बीच 14 महीनों से तैयारी की जा रही थी। फेसबुक ने जियो में निवेश के लिए 43574 करोड़ रुपए का खर्च कर कंपनी में 9.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। इस समझौते को लॉकडाउन के बीच दुनिया का सबसे बड़ा डील माना जा रहा है। जहां इस समझौते से जियो की वैल्यूएशन बढ़कर 4.62 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा तो वहीं रिलायंस जियो खुद को कर्जमुक्त करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ सकेगा।

गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

कोरोना के योद्धा स्वास्थ्य कर्मियों से दुर्व्‍यवहार तो होगी जेल


भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने तीन बजे मीडिया में आकर कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ दुव्र्यवहार का दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को तीन महीने से 5 साल तक के लिए जेल भेजा जा सकता है,  50,000 से 2 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। स्वास्थ्य कर्मियों को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाने पर दोषी को छह महीने से लेकर 7 साल तक के लिए जेल भेजा जा सकता है और 1 लाख से 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों की परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर दोषी व्यक्ति को इनकी कीमत का दोगुना मुआवजा भरना होगा। कानून में संशोधन के अनुसार आरोपी के खिलाफ जांच 30 दिन के भीतर पूरी कर ली जाएगी और अंतिम निर्णय एक साल के अंदर आ जाएगा।
इस खबर के बाद देश में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ा क्योंकि आये दिन देश के विभिन्न भागों स्वास्थ्य कर्मियों, डॉक्टर, और पुलिस पर कोरोना की जाँच करने जाने पर आइसोलेजन किये जाने के बाद कुछ विशेष लोगों के द्वारा मारपीट दुर्व्यवहार किये जाने की शिकायत आने लगी जीके बाद सरकार ने कठोर कार्यवाही करने का फैसला लिया है  

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

देशवासियों के सुझाव पर लॉकडाउन 3 मई तक प्रधानमंत्री मोदी जी ने घोषणा की -



आज सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की देशवासियों और मुख्यमंत्रियों के सुझाव को ध्यान में  रखते हुए  लॉकडाउन 3 मई तक बढाया जा रहा है अभी तक लॉकडाउन ही करोना वायरस से लड़ने का सबसे सव्र्शेष्ठ तरीका है। क्योंकि अभी तक कोरोना वायरस से बचने के लिए कोई भी दवाई का अविष्कार नहीं हुआ भारत में कोरोना वायरस  लेकर 25 अप्रेल से लॉकडाउन किया गया है इसका परिणाम है कि भारत अभी यूरोप और अमेरिका जैसे गंभीर स्थिति में नहीं पहुँचा है। प्रधानमंत्री ने वेद के वाक्य का उद्घोषित किया कि  वयं राष्ट्रे जागृयाम - हम सभी राष्ट्र को जीवंत और जागृत बनाए रखेंगे। 

लॉकडाउन घोषित होने के बाद 28 मई को तमिलनाडु पुलिस के द्वारा जाँच में पता चला की निजामुद्दीन दरगाह के पास इस्लामिक संस्था तबलीगी जमात का मरकज़ में 2300 से अधिक लोग रुके हुए है उनमे से एक व्यक्ति जो तमिलनाडु का था, जो घर पहुँचते ही कोरोना वायरस से गसित था उसकी मौत हो गई है। जिन व्यक्ति मरकज से संबध तो कोरोना गर्सित होने पर पुलिस जाँच शुरू की, तथा जम्मूकश्मीर तथा तेलंगाना से मौत की खबर ने पुरे देश को हिला दिया।  इसी बीच इस्लामिक संस्था तबलीगी जमात का मरकज़ के मौलाना का तकरीर वारल होने लगा की मरना है तो मस्जिद से अच्छा जगह क्या हो सकता है कोरोना तो मुसलमानों को मस्जिद में आने से रोकना है इसे हम नहीं मानेगे ऐसा ही यु-तुबे पर रिकार्डिंग चलने इसका हेतु या था की मुसलमान इस लॉकडाउन को नहीं माने और मस्जिद में जाकर नमाज पढ़े       



शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

इस्लामी धार्मिक संस्था तबलीगी जमात ने फैला दिया covid19 देश भर में


हजरत निजामुद्दीन ( औलिया ) दरगाह के पास ही इस्लामी धार्मिक संस्था तबलीग़ी जमात ने लॉकडाउन के पूर्व दिल्ली के अपने मुख्यालय में एक बड़े सम्मलेन का आयोजन किया था दिल्ली पुलिस और प्रशासन को खबर मिली तो सभी के हाथ पैर फुले की कोरोना वायरस के बीच ये सम्मलेन कराना एक भारी भूल थी  इससे पूरे समाज को कोरोना वायरस से प्रभावित होने का ख़तरा पैदा हो गया है। यह आशंका सही साबित हो रहा है, लगभग 9 हजार लोगों ने तबलीगी जमात के सम्मेलन में शामिल हुए थे। इसमें  हजारों विदेशी लोग इंडोनेशिया, मलेशिया , गल्फ देशों से भी लोग शामिल हुए थे इन्ही लोगों विदेशी लोगों के माध्यम से 15 दिनों में हजारों तबलीगी के द्वारा पुरे भारत में फैल गया है।  तबलीग़ी जमात के माध्यम से, उन्होंने देश के हर कोने में कोरोना बम लगाए हैं, अगर वे अपने मक़सद में क़ामयाब हो जाते हैं तो यह देश पर अब तक का सबसे बड़ा जिहादी हमला साबित होगा, निज़ामुद्दीन में जमात के हज़ारों लोगों का जमा होना, जिनमें कई विदेशी तबलीगी जमात के लोग भी शामिल थे जो भारत भर से मस्जिदों से उमड़ रहे हैं और जिनमें कोरोना वायरस के कई मामले हैं ये कुछ और नहीं बल्कि कोरोना जिहाद द्वारा भारत को बर्बाद करने की एक कोशिश है

  
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बेंगलुरु में होने वाली तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक बेंगलुरु में 15 से 17 मार्च को कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण स्थगित कर दिया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने यहां ट्विटर पर कहा- महामारी कोविड-19 की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के निर्देशों और परामर्श के प्रकाश में बेंगलुरु में होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक को स्थगित किया जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सभी स्वयंसेवकों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में जागरुकता लाने और इस चुनौती का सामना करने के लिए शासन-प्रशासन का सहयोग करें। 

संदर्भ यह है कि भारत में WHO के गाइड लाईन के अनुसार की भारत में भी कोरोना वायरस फैल सकता है। इसलिए भारत सरकार ने बार बार एद्वाजरी जारी किया कि 200 से ज्यादा नहीं इकठ्ठा होना है। कुछ दिन बाद भी 50 से अधिक नहीं होना चाहिए फिर 5 लोगों से ज्यादा एकत्रित नहीं हो।  इस सूचना का अक्षर से पालन करते हुए। अपनी सबसे बड़ी बैठक तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक को स्थगित कर दिया। लेकिन कुछ और लोग है कहते है कि मोदी सरकार या भारत सरकार जो भी कहेगा उसका विरोध करेगें। जैसे शाहीन बाग में धरना जारी रखा था धरना में शामिल खातून कहते देखा गया कि कोरोना तो कुरान से निकला है हम मुसलमानों को कोरोना नहीं हो सकता। दिल्ली में सरकार ने धारा 144 लागू होने के बाद भी शाहीन बाग का धरना खत्म नहीं हुआ तो 24 मार्च को अचानक दिल्ली पुलिस ने धरना के तम्बू को उखाड़ फेका तथा विरोधियों को गिरप्तार किया। 



सोमवार, 30 मार्च 2020

दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण, 33 वर्ष पूर्व भारत की राजनीति को बदल दिया


भारत के  टीवी सीरियल के इतिहास में 1987 में रामायण सीरियल दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था, एक इतिहास रच दिया था पहली बार 25 जनवरी 1987 में दूरदर्शन पर रामायण का प्रसारण  हुआ था, लगभग 78 एपिसोड के बाद इसे 31 जुलाई 1988 तक प्रसारित कर समाप्त कर दिया गया था कोरोना वारस के कारण पुरे देश में घोषित बंद ( Lockdown ) के बाद में इसे कई बार री-टेलीकास्ट किया गयाइस बीच केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को साफ किया कि जनता की मांग पर दूरदर्शन में शनिवार से रामायण सीरियल का प्रसारण होगा। पहला एपिसोड कल सुबह 9 बजे और दूसरा कल ही रात 9 बजे दिखाया जाएगा। 

सोमवार, 23 मार्च 2020

100 Days बाद शाहीनबाग का खेल खत्म,




आज ही लगभग 100 दिनों के बाद शाहीनबाग में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हटा दिया है। 15 दिसंबर से नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में तथाकथित वामपंथीकांग्रेस तथा आप पार्टी के समर्थन से चल रहा था शाहीनबाग का आन्दोलन का खेल को पुलिस ने खत्म कर दिया पुरे विश्व में कोरोना वायरस के खतरे के कारण  से दिल्ली समेत पूरे भारत में लॉकडाउन तथा धारा 144 लागू किया गया है। लेकिन इसके बाद भी शाहीनबाग में प्रदर्शनकारी मंगलवार सुबह भी प्रदर्शन की तैयारी में थे। लेकिन अब पुलिस ने वहां महिला प्रदर्शनकारियों को पूरी तरह से हटाकर दिया है। 

गृहमंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) कानून भारत की संसद के दोनों सदनों पटल पर रखा और 12 दिसंबर को पारित तथा राष्ट्रपति महोदय ने भी अपनी मुहर लगा दे दी। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र लगातार सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे थे। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागु होने के पहला शुक्रवार 15 दिसंबर 2019 को नमाज खत्म होने के बाद जामिया नगर के लोग सीएए के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। इस प्रदर्शन में जामिया मिल्लिया के छात्रों भी घुस आये, दिल्ली की सड़को पर हिंसा करना शुरू कर दिए।जामिया मिल्लिया के छात्रों के अचानक इस प्रदर्शन ने हिसंक रूप में बसों में तोड़फोड़ औऱ उसे जलाने लगे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पथराव शुरू हो गयाजिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इतना ही नहीं पुलिस ने जामिया की लाइब्रेरी में घुसकर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कियाजिसमें कई छात्र भी घायल हुए। वामपथी मीडियाकर्मियों तथा कांग्रेस, आप पार्टी और विपक्षी पार्टियों ने इस आन्दोलन को हाथों हाथ ले लिया। चारों तरफ से आलोचनाओं के कारण दिल्ली पुलिस बैकफुट पर आ गई और आगे से कोई दूसरी कार्रवाई नहीं करना चाहती थी। जामिया का हिंसक प्रदर्शन से परेशान प्रशासन ने इलाके को चारों तरफ से बंद कर दिया था। शाम से आठ बजे से शाहीन बाग इलाके की कुछ महिलाएं रोड पर आ कर बैठ गईं। दिल्ली पुलिस से सबसे बड़ी गलती यही हुई कि ये महिलाएं रात में वापस चली जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह दिल्ली पुलिस की गलती ने देश के देशदोहियो को एकजुट कर दिया  

16 दिसंबर की शाम में करीब 500 महिलाएं इस प्रदर्शन में शामिल हो चुकी थीं इसी बीच जेएनयू और जामिया के छात्र-छात्राएं शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए इसके बाद इस प्रदर्शन की कमान महिलाओं ने अपने हाथों में ले ली और क्षेत्र के लोग वॉलिंटियर के रूप में लग गए।  शाहीन बाग के आंदोलन में 29 दिन की बच्ची को मां गोद में लेकर धरने पर बैठी नजर आई तो 80 साल की दादी इस प्रोटेस्ट का हिस्सा बनी इतना ही नहीं शाम होते ही आसपास की महिलाएं आंदोलन स्थल पर पहुंच जाती हैं