आज समय तेजी से बदल रहा है | बदलते समय में परस्थितियों भी बदल गयी है |शिक्षा ने स्त्री और पुरुष के समानता ला दिया है | आज लड़की कॉलेज में लडको के साथ पढ़ रही है | इसलिए कुछ अच्छी बात तथा कुछ बुरी बात हो रही है | यह समय रहते समझे की है कल परस्थितियाँ और बिगड़ने वाली है |
शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बदलाव हुए है | आज स्त्री भी पुरुषों के साथ- साथ काम कर रही है | इस लिए अब कुछ बातों को ध्यान देना होगा | नहीं तो बहुत सी गलत बाते शुरू हो रही है | अभी पुरे देश में बलात्कार की घटनों में तेजी के साथ चर्चाओं में आने लगी है | लड़की की सुरक्षा का | पहले कोई लड़की बाहर जाती थी तो परिवार से कोई न कोई साथ होता था | इस लिए कि कोई गलत हरकत ना करे , लेकिन समय ने तेजी से करवट बदला है | लड़कियां स्वयं घर से निकल कर कॉलेज ऑफिस जा रही है | यानि काम-काजी महिलाएं के रूप में काम कर रही है | अब पुरुषों के साथ काम करने से समस्याएं और बढ़ रही है |
वर्तमान शिक्षा के कारण लड़के व लड़कियाँ और स्वछ्न्द हो रही है | लड़कियां समाज में अब खुल कर आ रही है जो पर्दा था अब खत्म सा होगा या है तो दूसरी प्रकार कि समस्या उत्पन्न हो रही है | अब जो समस्या आ रही है सामाजिक अराजकता का | पहले कहा जाता था कि विवाह के बाद स्त्री-पुरुष एक गाड़ी के दो पहिए के सामान है | आज स्त्री भी कमा रही है और पुरुष तो जो एक दूसरे के बीच पूरकता था वह खत्म हो गया उसके जगह समानता आ गया जो समस्या कि जड़ है | दूसरी बात है कि एकल परिवार होगा है मकान में बड़े बुजुर्ग नही होने से उन्हें सिखायेगा कौन ? अब इनके बच्चोँ को संस्कार क्या है पता नहीं ? और तो बच्चे एक ही न तो भाई न बहन तो एक दूसरे से रिश्ते कैसे होने चाहिए | उन बच्चोँ को पता नहीं है भाई बहन क्या होता है | अब ऐसे लोग बड़े होगे तो बॉय फ्रेड या गर्लफ्रेंड होगे | आज जो हो राह है वह क्या है इस प्रकार कि समस्या कि शुरुवात है |यह सब जो आज होने लगा है उसकी प्रारंभ अवस्था है | समझना स्त्री को पडेगा कि आज जो समस्या खड़ा हो राह है उसका ईलाज क्या है |
नई दौर के नई राह है इस समस्या का हल है | भारतीय समाज में स्त्री को सामाजिक रूप से पारिवारिक मानता है कि घर परिवार कि ठीक प्रकार से देखभाल करना है | यदि उसे परिवार चलाना है तो बच्चों में अच्छे संस्कार देने होगे | क्योंकि आने वाला समस्या बहुत विकट होने वाला है | आज परिवार चलाने कि लिए अर्थ कि सबसे पहले आवश्कता है तो स्त्री-पुरुष तालमेल के साथ चलना पड़ेगा |आज हर परिवार यही चाहता है कि उसकी भी लड़की अपने पैरों पर खड़ी रहे है | तब लड़की को विवाह कि जरूरत नहीं है लेकिन समाज को जरुरत है | इसलिए विवाह तो करना पड़ेगा लेकिन समय और मर्यादा के साथ तभी समाज रूपी परम्परा ठीक प्रकार से चलता रहेगा | यह अगर कुछ लोग सोचते है अकेले राह जा सकता है तो सही कि अकेला राह जा सकता है लेकिंन आगे चलकर ऐसे लोग अकेलेपन के कारण स्थितियां खराब हुई है | आगे चलकर पुरुष के साथ कंधा से कंधा मिला कर चलना और घर परिवार को भी संभालते हुए सब काम करना ही श्रेष्ठ होगा |
रविवार, 24 जुलाई 2011
ब्रिटेन में फोन हैकिंग पर मचा बवाल ...
ब्रिटेन में अभी मचा है बवाल मचा हुआ |१० वर्ष पहले मिली ब्राउलर की हत्या के चले मुकदमा में वर्षों के बाद बनी स्थिति ने ब्रिटेन के संसद को मामले की जाँच कारण पड़ा है |ब्रिटेन की जनता ने अपना रोष व्यक्त कर दिया है | जनता के रोष के कारण ब्रिटेन की संसदीय समिति इस मामले की स्वयं होकर जाँच कर रही है |
2002 में नौ साल पहले जब मिली डाउलर अगुवा की गई, तब वो स्कूल में थी|मिली ब्राउलर के मोबाइल से वायसमेल से कुछ मैसेज हटाये गये | मिली के घर वालों को लगा की मिली जिन्दा है ,लेकिन उसकी हत्या कर दिया गया था | गार्डियन के मुताबिक़ मिली का वॉयसमेल भर गया था लेकिन‘न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड’ अख़बार के एक निजी जासूस ने उसका फ़ोन हैक किया| इस जासूस ग्लेन मलकेयर ने उसके फ़ोन से कुछ संदेश हटा दिए| लेकिन तब तक उसकी हत्या एक नाइटक्लब का चौकीदार लेवी बेलफील्ड ने चुका था| पिछले महीने ही उसे हत्या के लिए दोषी पाया गया और उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई| लेकिन एक पत्रकार शॉन होर ने कह की समाचार के लिए द न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड के लोग फोन हैकिंग करते है |इस पत्रकार की मौत ने फ़ोन हैकिंग विवाद को और गहरा दिया है|'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' के पूर्व पत्रकार और फ़ोन हैकिंग मामले को उजागर करने वाले की मौत हो गई है| शॉन होर ने ही सबसे पहले ये आरोप लगाया था कि 'न्यूज़ आफ़ द वर्ल्ड' अख़बार के पत्रकार ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से लोगों के फ़ोन हैक कर रहे हैं|
तब पता चला की समाचार के लिए पत्रकार (मिडिया), राजनीतिक और पुलिस के साथ अपराधिकरण हो गया है | जिसके कारण मिडिया के लोग अन्य लोगों से मिलकर वह आम तथा फोन हैकिंग कर उनकी बातों को सुनते थे तथा मशाले दार खबर बना कर ब्लैकमेल करते है |शॉन होर ने बीबीसी के पैनोरमा कार्यक्रम में कहा था कि 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' अख़बार में फ़ोन हैकिंग 'एन्डेमिक' था और उस समय के संपादक एंडी कॉलसन ने ख़ुद उन्हें फ़ोन हैक करने को कहा था | एंडी कालसन को ब्रिटेश प्रधानमंत्री श्री डेविड कैमरन ने उसे अपना संचार प्रमुख बनाया था | इस कारण प्रधानमंत्री भी विवाद में आ गये और उन्हें दक्षिण अफ्रीका से अपना अधूरा प्रवास छोडकर वापस आना तथा ब्रिटिश संसदीय समिति में उपस्थिति हो कर जबाब देना पड़ा | मामला और तुल पकड़ चूका था तो फ़ोन हैकिंग के मामले मे लंदन के पुलिस प्रमुख सर पॉल स्टीफ़ेंसन ने इस्तीफ़ा देना पड़ा तथा 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' अख़बार के पूर्व उपसंपादक नील वैलिस को लंदन पुलिस का जनसंपर्क सलाहकार नियुक्त किए जाने के कारण ब्रिटेन के सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आलोचना हो रही थी|नील वैलिस की जनसंपर्क कंपनी चैमी मीडिया ने अक्तूबर 2009 से सितंबर 2010 तक लंदन पुलिस के लिए जनसंपर्क सलाहकार की हैसियत से काम किया था|सर पॉल ने ये भी कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि फ़ोन हैकिंग मामला कितना गहरा है उन्हें भी अपने पद से इस प्रकार जाना पड़ेगा |
यह कम करने वाले मिडिया के सबसे बड़ा रूपक मर्डोक की मिडिया कॉरपोरशन करती थी | यह एक प्रकार से मिडिया का अपराधिकरण है | इसमें पूरा ब्रिटेन की मिडिया संदेह के धेरे में है |फोन हैकिंग मिली डाउलर के साथ तथा शाही राज परिवार और राजनीतिज्ञों, जानी-मानी हस्तियों,अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए सैनिकों के परिवार जनों और हत्या का शिकार हुए लोगों के परिवार वालों के फ़ोन हैक करने के आरोप हैं. अपराध के शिकार हुए लोगों के फ़ोन हैकिंग का आरोप है| पुलिस का मानना है कि तक़रीबन 4,000 लोग इस हैकिंग का शिकार हुए होंगे |ये शिकायतकर्ता हैं पूर्व फुटबॉलर पॉल गैसकॉय, अभिनेता जूड लॉ, खेल एजंट स्काई ऐन्ड्रू, इंटीरियर डिज़ाइनर केली होप्पन और सांसद क्रिस ब्रायंट|बाद में ये सभी जानकारी मेट्रोपॉलिटन पुलिस को जासूस मलकेयर से ही मिली थीं |
यह घटना का मुख्य कारण था रूपक मर्डोक मिडिया का नीति था | जब रूपक मर्डोक ने जब मिडिया में कदम रखा और उसने मिडिया का व्यवसायकारण का दिया |यह घटना १९९० के दशक की रूपक मर्डोक के बाद जिन्होंने इनकी नकल की आज सभी का हाल यह की अपराधिक रूप में हुआ है |उसने पहले समाचार पत्र को सस्ता कर दिया था उसके घटना के लिए विज्ञापन से पूरा करते थे |विज्ञापन के इस खेल में अपने समाचार का अधिक विस्तार नीति होता है |आप की समाचार पत्र की लोगप्रियता पर होता है | लोगप्रियता बढाने के लिए संपादक और पत्रकार पर भारी दबाव रहता है सनसनीखेज खबर बनाया जाय | जिसके लिए ब्रिटेन 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' ने कई अनैतिक कम किये | जब शाही परिवार की कई गोपनीय बाते समाचार पत्र में छपा तो उन्होंने पुलिस कारवाही करने को कहा | तब जाकर पता चला की मलकेयर और ‘न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड’ के संपादक क्लाइव गुडमैन को वर्ष 2007 में शाही परिवार के फोन टैप करने के आरोप में जेल में बंद कारण पड़ा|
लेकिन विवाद ने इतना तुल पकड़ा की इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी| न्यूज़ इंटरनेशनल रेबेकाब्रुक्स ने सीईओ पद से इस्तीफ़ा दिया था | पुलिस ने पूर्व मुख्य कार्यकारी रेबेका ब्रुक्स को फोन हैकिंग और घूस दिए जाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है| रेबेका की गिरफ़्तारी में ऑपरेशन एल्वेडन टीम का भी हाथ है जो कि इसी मामले में पुलिस को घूस दिए जाने की जांच कर रही है| यह जांच स्वतंत्र पुलिस शिकायत कमीशन कर रही है|ब्रिटेन में फोन हैकिंग का मामला काफ़ी गंभीर मोड़ ले चुका है और इसी कारण न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड नामक 168 वर्ष पुराने अख़बार को बंद करने का फ़ैसला किया गया| जिस समय फोन हैकिंग से जुड़े फैसले किए थे उस समय रेबेका ही अख़बार की संपादक थीं | इस घटना ने ब्रिटिशों जनता को उग्र आंदोलित कर दिया की पुलिस पत्रकार और पोलटिसीयन ने जो गठजोड़ हुआ वह उचित नहीं है | इस प्रकार की जनता के दबाव के आगे ब्रिटिश संसद ने बिशेष सत्र बुलाकर प्रधानमंत्री को अपना बचाव कारण पड़ा तथा खुद रुपर्ड मार्डोक को अपने बेटे के साथ आकार क्षमा मांगना पड़ा है | उसने कहा कि -मैं और मेरा बेटा यहाँ आप सबके लिए, संसद के लिए और ब्रिटेन की उस जनता के लिए बड़े आदर का भाव लेकर आए हैं | ये मेरी ज़िंदगी का सबसे लाचारी भरा दिन है| जो कुछ भी हुआ,मैं फ़ोन हैकिंग का शिकार हुए सभी लोगों को बताना चाहता हूँ कि मैं कितना शर्मिंदा हूँ| माफ़ी माँगने से जो हुआ उसे नहीं बदला जा सकता, फिर भी, मैं उनकी निजता के भयानक उल्लंघन के लिए उनसे माफ़ी माँगना चाहता हूँ |
ब्रिटिश जनता ने अपने देश में पत्रकारिता कि मूल्यों का बचाने का काम किया क्या हम भारतीय लोग पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों को बचाने कि कोशिश करेगे |
2002 में नौ साल पहले जब मिली डाउलर अगुवा की गई, तब वो स्कूल में थी|मिली ब्राउलर के मोबाइल से वायसमेल से कुछ मैसेज हटाये गये | मिली के घर वालों को लगा की मिली जिन्दा है ,लेकिन उसकी हत्या कर दिया गया था | गार्डियन के मुताबिक़ मिली का वॉयसमेल भर गया था लेकिन‘न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड’ अख़बार के एक निजी जासूस ने उसका फ़ोन हैक किया| इस जासूस ग्लेन मलकेयर ने उसके फ़ोन से कुछ संदेश हटा दिए| लेकिन तब तक उसकी हत्या एक नाइटक्लब का चौकीदार लेवी बेलफील्ड ने चुका था| पिछले महीने ही उसे हत्या के लिए दोषी पाया गया और उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई| लेकिन एक पत्रकार शॉन होर ने कह की समाचार के लिए द न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड के लोग फोन हैकिंग करते है |इस पत्रकार की मौत ने फ़ोन हैकिंग विवाद को और गहरा दिया है|'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' के पूर्व पत्रकार और फ़ोन हैकिंग मामले को उजागर करने वाले की मौत हो गई है| शॉन होर ने ही सबसे पहले ये आरोप लगाया था कि 'न्यूज़ आफ़ द वर्ल्ड' अख़बार के पत्रकार ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से लोगों के फ़ोन हैक कर रहे हैं|
तब पता चला की समाचार के लिए पत्रकार (मिडिया), राजनीतिक और पुलिस के साथ अपराधिकरण हो गया है | जिसके कारण मिडिया के लोग अन्य लोगों से मिलकर वह आम तथा फोन हैकिंग कर उनकी बातों को सुनते थे तथा मशाले दार खबर बना कर ब्लैकमेल करते है |शॉन होर ने बीबीसी के पैनोरमा कार्यक्रम में कहा था कि 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' अख़बार में फ़ोन हैकिंग 'एन्डेमिक' था और उस समय के संपादक एंडी कॉलसन ने ख़ुद उन्हें फ़ोन हैक करने को कहा था | एंडी कालसन को ब्रिटेश प्रधानमंत्री श्री डेविड कैमरन ने उसे अपना संचार प्रमुख बनाया था | इस कारण प्रधानमंत्री भी विवाद में आ गये और उन्हें दक्षिण अफ्रीका से अपना अधूरा प्रवास छोडकर वापस आना तथा ब्रिटिश संसदीय समिति में उपस्थिति हो कर जबाब देना पड़ा | मामला और तुल पकड़ चूका था तो फ़ोन हैकिंग के मामले मे लंदन के पुलिस प्रमुख सर पॉल स्टीफ़ेंसन ने इस्तीफ़ा देना पड़ा तथा 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' अख़बार के पूर्व उपसंपादक नील वैलिस को लंदन पुलिस का जनसंपर्क सलाहकार नियुक्त किए जाने के कारण ब्रिटेन के सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आलोचना हो रही थी|नील वैलिस की जनसंपर्क कंपनी चैमी मीडिया ने अक्तूबर 2009 से सितंबर 2010 तक लंदन पुलिस के लिए जनसंपर्क सलाहकार की हैसियत से काम किया था|सर पॉल ने ये भी कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि फ़ोन हैकिंग मामला कितना गहरा है उन्हें भी अपने पद से इस प्रकार जाना पड़ेगा |
यह कम करने वाले मिडिया के सबसे बड़ा रूपक मर्डोक की मिडिया कॉरपोरशन करती थी | यह एक प्रकार से मिडिया का अपराधिकरण है | इसमें पूरा ब्रिटेन की मिडिया संदेह के धेरे में है |फोन हैकिंग मिली डाउलर के साथ तथा शाही राज परिवार और राजनीतिज्ञों, जानी-मानी हस्तियों,अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए सैनिकों के परिवार जनों और हत्या का शिकार हुए लोगों के परिवार वालों के फ़ोन हैक करने के आरोप हैं. अपराध के शिकार हुए लोगों के फ़ोन हैकिंग का आरोप है| पुलिस का मानना है कि तक़रीबन 4,000 लोग इस हैकिंग का शिकार हुए होंगे |ये शिकायतकर्ता हैं पूर्व फुटबॉलर पॉल गैसकॉय, अभिनेता जूड लॉ, खेल एजंट स्काई ऐन्ड्रू, इंटीरियर डिज़ाइनर केली होप्पन और सांसद क्रिस ब्रायंट|बाद में ये सभी जानकारी मेट्रोपॉलिटन पुलिस को जासूस मलकेयर से ही मिली थीं |
यह घटना का मुख्य कारण था रूपक मर्डोक मिडिया का नीति था | जब रूपक मर्डोक ने जब मिडिया में कदम रखा और उसने मिडिया का व्यवसायकारण का दिया |यह घटना १९९० के दशक की रूपक मर्डोक के बाद जिन्होंने इनकी नकल की आज सभी का हाल यह की अपराधिक रूप में हुआ है |उसने पहले समाचार पत्र को सस्ता कर दिया था उसके घटना के लिए विज्ञापन से पूरा करते थे |विज्ञापन के इस खेल में अपने समाचार का अधिक विस्तार नीति होता है |आप की समाचार पत्र की लोगप्रियता पर होता है | लोगप्रियता बढाने के लिए संपादक और पत्रकार पर भारी दबाव रहता है सनसनीखेज खबर बनाया जाय | जिसके लिए ब्रिटेन 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' ने कई अनैतिक कम किये | जब शाही परिवार की कई गोपनीय बाते समाचार पत्र में छपा तो उन्होंने पुलिस कारवाही करने को कहा | तब जाकर पता चला की मलकेयर और ‘न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड’ के संपादक क्लाइव गुडमैन को वर्ष 2007 में शाही परिवार के फोन टैप करने के आरोप में जेल में बंद कारण पड़ा|
लेकिन विवाद ने इतना तुल पकड़ा की इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी| न्यूज़ इंटरनेशनल रेबेकाब्रुक्स ने सीईओ पद से इस्तीफ़ा दिया था | पुलिस ने पूर्व मुख्य कार्यकारी रेबेका ब्रुक्स को फोन हैकिंग और घूस दिए जाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है| रेबेका की गिरफ़्तारी में ऑपरेशन एल्वेडन टीम का भी हाथ है जो कि इसी मामले में पुलिस को घूस दिए जाने की जांच कर रही है| यह जांच स्वतंत्र पुलिस शिकायत कमीशन कर रही है|ब्रिटेन में फोन हैकिंग का मामला काफ़ी गंभीर मोड़ ले चुका है और इसी कारण न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड नामक 168 वर्ष पुराने अख़बार को बंद करने का फ़ैसला किया गया| जिस समय फोन हैकिंग से जुड़े फैसले किए थे उस समय रेबेका ही अख़बार की संपादक थीं | इस घटना ने ब्रिटिशों जनता को उग्र आंदोलित कर दिया की पुलिस पत्रकार और पोलटिसीयन ने जो गठजोड़ हुआ वह उचित नहीं है | इस प्रकार की जनता के दबाव के आगे ब्रिटिश संसद ने बिशेष सत्र बुलाकर प्रधानमंत्री को अपना बचाव कारण पड़ा तथा खुद रुपर्ड मार्डोक को अपने बेटे के साथ आकार क्षमा मांगना पड़ा है | उसने कहा कि -मैं और मेरा बेटा यहाँ आप सबके लिए, संसद के लिए और ब्रिटेन की उस जनता के लिए बड़े आदर का भाव लेकर आए हैं | ये मेरी ज़िंदगी का सबसे लाचारी भरा दिन है| जो कुछ भी हुआ,मैं फ़ोन हैकिंग का शिकार हुए सभी लोगों को बताना चाहता हूँ कि मैं कितना शर्मिंदा हूँ| माफ़ी माँगने से जो हुआ उसे नहीं बदला जा सकता, फिर भी, मैं उनकी निजता के भयानक उल्लंघन के लिए उनसे माफ़ी माँगना चाहता हूँ |
ब्रिटिश जनता ने अपने देश में पत्रकारिता कि मूल्यों का बचाने का काम किया क्या हम भारतीय लोग पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों को बचाने कि कोशिश करेगे |
बुधवार, 6 जुलाई 2011
शुक्रवार, 10 जून 2011
कांग्रेस अब अपने राजीव गाँधी ट्रस्ट और पार्टी के खातों का खुलासा करे
दूसरी बात यह है की जिन जिन लोगों ने कांग्रेस के ट्रस्ट में उन सब का भी सम्पति की जाँच होनी चाहिए | क्योंकि ट्रस्ट के बहाने उन लोगों ने देश की गाढ़ी कमाई का नाजायज लाभ तो नहीं उठाया है | तथा ट्रस्ट के पहले उनके पास कितनी सम्पति थी अब कितनी है | इसमें सोनियाजी और उनलोगों जो अब तक ट्रस्ट में है |
तीसरी बात यह है जिन लोगो ट्रस्ट में पैसा दिया वह सरकार से कोई लाभ लेने के लिए तो नहीं किया है | कांग्रेस अभी सत्ता में है अपना ट्रस्टों के लिए अपना २ नंबर का पैसा कही ट्रस्ट में तो जमा करके सोनिया जी वाहवाही तो नहीं लुट रहे है | आज व्यक्ति अपना काम को पहले करने केलिए क्या -क्या नही करता है | तो जिस पार्टी की सरकार उससे काम निकलवाने के लिए वे लोग ट्रस्ट में तो नाजायज पैसा तो नहीं दिये है | बात पारदर्शिता की है हम कितने ईमानदार है | मनमोहन सिंह जैसा न की मैं तो ईमानदार हू लेकिन इनके प्रधानमंत्री रहते कितने कलमाडी राजा लाखो करोड रूपये डकार गये |
चौथी बात यह है कि जिस ट्रस्ट के नाम पर ये लोग दलाली कर रहे है वह ट्रस्ट करती क्या है कही तो कांग्रेस के लिए वोट बैंक का काम तो नहीं करती है | वह ऐसे लोगों के लिए तो नहीं जो केवल एक पार्टी के लिए जनमत तैयार करती है क्या .. इन सब बातों कि जाँच भी होनी चाहिए |
तभी पता चल सकेगा कि राजीव गाँधी के नाम पर कौन कौन क्या क्या कर रहा है | सोनियाजी मूलतः ईसाई है इस देश को मिशनरी से भी उतना खतरा है जितना एक देशदोही से है |
जागो !आलोचकों जागो !एक संत आपके लिए प्रतिपल कष्ट झेल रहा है ताकि हम सब चैन से जी सकें |
यह कैसा सत्यमेव जयते ......
यह सरकार जो देश की रक्षा एवं सम्मान भी रखने असमर्थ है |२६/११ मुम्बई हमले मारे गए देश के सम्मानित नागरिक एंव शहीद जवानों की शहादत का सम्मान भी नहीं कर सकती| जिस प्रकार शिकागो अदालत ने राणा को मुंबई हमले की साज़िश रचने के आरोप से बरी कर दिया |
सरकार ने बाबा के पीछे समय खराब किया | उधर अमेरिका जानती की अभी भारत सरकार हिजड़े की सरकार है | अभी तक फांसी की सजा होने पर भी अफजल गुरु को सज्जा नहीं दे रही है | कसाब के मामले में सजा के जगह बिरयानी खिला रही है तो क्यों ना पाकिस्तान जो की अभी नाराज चल रहा है उसे खुश किया जाय |इस लिए अमेरिका ने अपनी कूटनीति के तहत उसे माफ़ी दी यह सब जानते हुआ की राणा एंव हेडली अपराधी है | अमेरिका जानती की राणा को भारत को दे दिया तो सजा देगी नहीं उसे उल्टा बिरयानी खिलायेगी| तो भारत सरकार को क्यों देना ,यही इसे छोड़ देते है | भारत क्या करेगा सरकार में हमारे एजेंट है |
यह अमेरि़क की कूटनीति है | और हमारे हिजडो की सरकार तो केवल बाबा के पीछे पड़े है |
मंगलवार, 31 मई 2011
भाजपा ने ममता से कुछ सीखेगा क्या ....
अब देश में चुनाव की तैयारी शुरू होगई है | पहले उत्तरप्रदेश का चुनाव होगे | फिर म.प.,छत्तीसगढ़ ,राजस्थान, दिल्ली, हिमाचलप्रदेश के चुनाव होगे , तब तक २०१४ आ जायेगा | तो क्या भाजपा केंद्र की सत्ता में आ सकती है | मुझे लगता है की भाजपा की तैयारी नहीं लगता है | इसी लिए मैने कहा की भाजपा ने ममता से कुछ सीखा कि.. किस तरह ममता ने बंगाल में सत्ता के लिए कम्युनिस्ट से लगभग २० वर्षों से लगातार लड़ाई ही लड़ी है |
किसी भी संगठन कि ताकत क्या है तो उस संगठन कि कार्यकर्ता की ताकत पर निर्भर करता है | अभी उत्तरप्रदेश का चुनाव होने वाला है | क्या उत्तरप्रदेश के कार्यकर्ता तैयार है क्या | क्यों की अब जनता एक पार्टी को वोट देता है ,पिछले उत्तरप्रदेश के चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ बसपा ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था | तब से लगभग हर चुनाव में पूर्ण बहुमत किसी न किसी पार्टी को बहुमत मिल ही रहा है | चाहे लोक सभा का चुनाव हो या विधान सभा के चुनाव में पूर्ण बहुमत मिल रहा है | भाजपा के कार्यकर्ता इसके लिए कोई उत्साहित नहीं दिखाते है | वही राहुलगांधी ने किसानो के साथ अपने को जोड़ दिया , धरना पर बैठे काम नहीं बना तो प्रधानमंत्री के निवास पर उन किसानों को लेकर पहुँच गयें | ऐसा भाजपा का कोई नेता नहीं किया किया तो भी केवल दिखने के लिए तो कैसे जीतेगे उत्तरप्रदेश |
ममता ने २० वर्षों से कम्युनिस्ट को सत्ता से बाहर करने के लिऐ लगातार सघर्ष किया | अब कोई भाजपा का नेता इतने वर्षों से संघर्ष किया तो नहीं जबाब नही मिलता है भाजपा के पुराने लोगो को छोड़ दे तो भी नहीं दिखता है | अटल जी अडवाणी जी के समक्ष लोगों को छोड़ दे तो | अब ममता ने सत्ता प्राप्त करने के लिए संघर्ष नहीं किया बल्कि कम्युनिस्ट को सत्ता से बाहर करने के लिए सघर्ष किया |
किसी भी संगठन कि ताकत क्या है तो उस संगठन कि कार्यकर्ता की ताकत पर निर्भर करता है | अभी उत्तरप्रदेश का चुनाव होने वाला है | क्या उत्तरप्रदेश के कार्यकर्ता तैयार है क्या | क्यों की अब जनता एक पार्टी को वोट देता है ,पिछले उत्तरप्रदेश के चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ बसपा ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था | तब से लगभग हर चुनाव में पूर्ण बहुमत किसी न किसी पार्टी को बहुमत मिल ही रहा है | चाहे लोक सभा का चुनाव हो या विधान सभा के चुनाव में पूर्ण बहुमत मिल रहा है | भाजपा के कार्यकर्ता इसके लिए कोई उत्साहित नहीं दिखाते है | वही राहुलगांधी ने किसानो के साथ अपने को जोड़ दिया , धरना पर बैठे काम नहीं बना तो प्रधानमंत्री के निवास पर उन किसानों को लेकर पहुँच गयें | ऐसा भाजपा का कोई नेता नहीं किया किया तो भी केवल दिखने के लिए तो कैसे जीतेगे उत्तरप्रदेश |
ममता ने २० वर्षों से कम्युनिस्ट को सत्ता से बाहर करने के लिऐ लगातार सघर्ष किया | अब कोई भाजपा का नेता इतने वर्षों से संघर्ष किया तो नहीं जबाब नही मिलता है भाजपा के पुराने लोगो को छोड़ दे तो भी नहीं दिखता है | अटल जी अडवाणी जी के समक्ष लोगों को छोड़ दे तो | अब ममता ने सत्ता प्राप्त करने के लिए संघर्ष नहीं किया बल्कि कम्युनिस्ट को सत्ता से बाहर करने के लिए सघर्ष किया |
ममता ने जगाई आस
ममता ने जगाई आस ....
पशिचम बंगाल में ३४ वर्षों से सी पी म ने जो राज्य की बुरे हालत में लाकर खड़ा किया | उससे लडने के लिए कांग्रेस ने कोई भी विकल्प नहीं दे पाई है | कहा जाता है कि..जब बंगाल सोचता था तब भारत सोचना शुरू करता था | इस कहावत को सी पी म ने खत्म कर दिया | समृद्ध बंगाल को कंगाल बना दिया | सीपीएम जो कि वहाँ कि मुख्य पार्टी थी ,इस लिए उसकी जिम्मेदारी भी अधिक थी |
कम्युनिष्ट पार्टी ने ३४ वर्षों तक बंगाल का शोषण किया ,अब तक इतिहास में नहीं मिलता है | उन्होंने शासन प्रशासन को पंग्गु बनना दिया | इसके लिए अनेक प्रकार के अत्याचार किये | जो उनकी बात नहीं मानी उसको रास्ते से हटा दिया | वह अपनी जान से हाथ धो बैठा | इस का मतलब आप जान सकते है | कम्युनिस्ट पार्टी के लोग कैसे कैसे अत्याचार किये होगे ,इसका उदाहरण है सिगुर कि घटना | यदि सिगुर में ममता दीदी नहीं जाती तो हमें नहीं पता चलता कि वहाँ क्या हो रहा है | वहाँ किस प्रकार से जमीन प्राप्त करने के लिए कितनों किसानों मजदूरों की हत्या हो गया और पता नही कितने माता व बहनों कि इज्जत समाप्त कर दिया होगा | यह एक घटना जो मिडिया के कारण हमे प्राप्त हुआ | कम्युनिस्ट ३४ वर्षों में कितनी घटनाएँ की होगी जिसका विवरण हमारे पास नहीं है | अपनी शाख बनाएँ के लिए कितनों लोगों की जान ले लिए होगे अर्थात कितनों की हम सोच भी नहीं सकते है |
कम्युनिस्टों ने अपना शासन बनाएँ रखने के लिए साम दाम दण्ड भेद का उपयोग करते आप –हम नहीं समझ सकते है | जब चुनाव होते तो वामपंथी कैडर के लोग अन्य विचारके लोगों को मत देने नहीँ देते है उस व्यक्ति को किसी भी हाल में मतदान केंद्र तक पहुचने नहीं देते है ,यदि वह पहुँच गया तो उसके आगे इतना भीड़ कर देते की वह मतदान नहीं कर सकता है | यह तक की पूरा प्रशासन इसी काम में लगा रहता था | दूसरी बात यह है कि... जो व्यक्ति वामपंथी के बातों को यदि नहीं मानता है तो उसे किसी प्रकार कि सहायता नहीं मिलती है | थानों में उसका कोई रिपोर्ट नहीं लिखा जाता है उसे किसी भी हालत ने पुलिस सहायता नहीं मिल सकती है | ऐसा ही हाल सब जगह था , उसे राशनकार्ड नहीं बन सकता यदि बना तो कार्ड से राशन नहीं मिल सकता है गाँवों में पंचायत से कोई भी काम नहीं हो सकता था | सब जगह सिर्फ वामपंथियों के आदमी ही थे | यही बात धीरे धीरे सभी गाँवों में लागु था | आम बंगाली परेशान था ,करे तो करे क्या ..
ऐसे हाल में थी बंगाल कि जनता उसे कुछ भी रास्ता नहीं दिखा रहा था ,पूरा भारत विकास कर रहा है लेकिन बंगाल में पढ़ें-लिखे युवा बेरोजगार है दूसरे राज्य जा कर मजदूरी करना पड़ा रहा है | उन्हें सम्मान कि नौकरी भी नसीब नहीं हो रही है | इधर दिल्ली में वामपंथी टीवी पर बड़े बड़े भाषण देते हुए दिखाते है ,सभी सांसद विधायक दिल्ली में बैठ कर कार्यालय में मीटिग करते एवं विज्ञप्ती जारी करते और टीवी चैनलों में जाकर अन्य सरकार विरोधी इंटव्यू देते नहीं थकते है | इधर बंगाल कि जनता बेहाल हो रही थी |
एक साधारण सफ़ेद सूती साडी एवं सूती झोला लेकर दिल्ली से बंगाल तक दहाडती बंगाल कि शेरनी ममता दीदी का नाम से पूरा देश जनता है | २० वर्षों से केवल एक उदेश्य वामपंथियों कि सत्ता को उखाडकर फेकना | ममता के जीवन यही एक काम है | वामपंथियों ने ममता पर कितने बार हमला किया लेकिन वह रुकी नहीं थकीं नहीं केवल वामपंथियों के अत्याचार से लड़ती रही | वह जानती थी वामपंथी सत्ता को जनता हाथ में इतनी आसानी से देने वाले नहीं है | इन्हें इन्ही कि भाषण में जबाब देने पड़ेगा | फिर तो ममता ने उसी भाषा में जबाब देना शुरू किया | वामपंथी ममता के इस प्रकार कि जबाब से परेशान हो गए | इसी समय सिगुर कि घटना हो गयी जिसमे वामपंथी लोगों ने पता नहीं कितनों के हत्या कर ,किसानों के जमीन पर कब्जा कर लिया | सिगुर में जनता त्राहिमाम त्राहिमामा करने लगी | ममता दीदी उनलोगों के लिए इस संघर्ष में कूद पड़ी | कम्युनिस्ट कि भाषा में जबाब मिलने से वेलोग तिलमिला गए | ममता ने गाँव-गाँव जा कर लोगों के दुःख को पूरी दुनिया के सामने लाया | इस सिगुर कि घटना ने पुरे देश को हिल्ला कर रख दिया | मजदूरों एवं किसानों के नाम से दुनिया में नेता गिरी करने वाले कम्युनिस्ट कि अत्याचार कि गाथा दुनिया के सामने आ गया |
ममता दीदी के हिम्मत को देखा कर बंगाल की जनता को लगा की उनकी तलाश पूरी हुई | अब सिगुर गाँव की घटना ने बंगाल के इतिहास को बदल दिया | लोगों को लगने लगा की दीदी ही वामपंथियों के अत्याचार से लड़कर उनकी सत्ता को उखाड फेकेगी | वामपंथियों ने ममता के बारे में अनगल बातें करने लगे लोगों ने अब कम्युनिस्ट के बातों को सुनना बंद कर दिया | इस बार के विधानसभा के चुनाव में वामपंथियों को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया |
बंगाल की जनता ३४ वर्षों के बाद पुनः आजादी की अहसास महसूस करने लगी है |
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