बुधवार, 7 अगस्त 2013

शेखर कपूर के प्रायोजित “प्रधानमंत्री”


शेखर कपूर के प्रायोजित “प्रधानमंत्री”

       शेखर कपूर द्वारा “प्रधानमंत्री” नामक सीरियल ABP NEWS समाचार चैलन द्वारा दिखया जा रहा है | तीसरे अंक में कश्मीर के बिषय पर दिखाया गया | इस कार्यक्रम के अबतक दिखे गये अंक में नेहरूजी को प्रोजेक्ट किया जा रहा है | इससे लगता है कि प्रधानमंत्री नाम का कार्यक्रम प्रायोजित है | ऐसा लगता है कि कांग्रेस की सरकार ने अपनी छवि सुधारे हेतु प्रायोजित किया गया है | इससे फायदा यह होगा कि लोगो के मन में नेहरु और गाँधी के प्रति विश्वास बना रहे | जो सोशल मिडिया ने बिगड़ दिया है | दुसरे लोगो पर आसानी से कीचड़ उछाला जा सके जैसे – महाराजा हरिसिंह के ऊपर उछाला गया है | कहा गया कि हरिसिंह अपना अधिक समय बाम्बे के रेस कोर्स में या रियासत के जंगलो में शिकार करने में बिताते थे | ऐसे अनेक बाते को बोलने के लिए वरिष्ठ पत्रकार ऍमजे अकबर के द्वारा कहलाया गया | वरिष्ठ पत्रकार ऍम जे अकबर एक मुसलमान है, वे कैसे कह सकते है की महाराजा ने हरिसिंह अच्छे आदमी है |

   महाराजा हरिसिंह जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा लन्दन में आयोजित गोलमेज कॉन्फरेंस में भारत के राजवाड़े के सामने पहली बार भारत कि पूर्ण स्वन्त्रतता कि बात कही थी | यह बात अंगेजो के मुह पर एक तमाचा था | इस बात के कारण अंग्रेज महराजा से नाराज हो गये | अंग्रेजो ने किसी भी कीमत पर जम्मू कश्मीर को महाराजा के हाथो में सत्ता नहीं देना चाहते थे |१९४७ में माउन्टबेटन महाराजा से मिलने श्री नगर गये,वे अकेले में मिलना चाहते थे | महाराजा हरिसिंह अंग्रेजो कि चाल को समझते थे इसलिए माउन्टबेटन से नहीं मिले |

   शेखअब्दुल्ला अंग्रेजो का नाजायज औलाद था | अंग्रेजो ने केवल शेख अब्दुल्ला से एक काम करता रहा महाराजा हरिसिंह जी के खिलाफत करते रहो | सफल हुए तो कश्मीर के राजा बनायेगे| १९४६ में अब्दुल्ला ने महाराजा का विरोध शुरू किया , जगहजगह पर मुसलमानों को महाराजा के खिलाफ भड़का शुरू किया और महाराजा हरिसिंह कश्मीर छोड़ो के नारे लगाने लगे | हिन्दू राजा कैसे, मुसलमानों पर राज कर रहा है | महाराजा के खिलाफ विद्रोह कर दिया | कुछ स्थानों पर मुसलमानों ने हिंदूओ कि घरो पर हमला कर दिया | महाराजा ने परिस्थितियों को ध्यान में रख कर शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया |

    शेखअब्दुल्ला ने नेहरु तक खबर पहुचाया कि किसी तरह मुझे जेल से छुड़ाया जाये | नेहरु ने महाराजा को कहा कि अब्दुल्ला कि छोड़ दिया जाये | लेकिन महाराजा अब्दुल्ला कि चल को समझते इसलिए नेहरु के कहने के बाद भी अब्दुल्ला को जेल से नहीं रिहा किया | इस बात को नेहरु ने जीवन भर अपना अपमान समझते रहे,प्रधानमंत्री बनते ही अपनी रोष कश्मीर के महाराजा के प्रति दिखाया, जो आज भी भारत के लिए नासूर बन गया है | महाराजाहरिसिंह जी को शेख अब्दुल्ला को सत्ता देने के लिए मजबूर कर दिया |१९५० में महाराजा हरिसिंह को नेहरु ने अपमानित करके जम्मू कश्मीर छोड़कर मुम्बई में आखरी समय तक रहना पड़ा | नेहरू ने जिन समस्या में हाथ लगा था आज भी वह सब भारत के लिए नासूर बना हुआ है |

    सरदार पटेल ने महाराजा हरिसिंह को जानते एवं समझते थे | सरदार पटेल के कहने पर  महाराजा ने प्रधानमंत्री रामचन्द्र काक को हटाकर पंजाब के न्यायाधीश मेहरचन्द्र महाजन को प्रधानमंत्री बना था | क्योंकि अब्दुल्ला,रामच्रद्र काक और जिन्ना के साथ गुप्त वार्ता हो चूका था | नेहरु ने जानबूझकर जम्मू कश्मीर का  मामला अपने पास में रखा कि महाराजा को अपमानित करना था | महाराजा हरिसिंह नेहरु के कारण भारत में विलय नहीं चाहते थे | नेहरु और अब्दुल्ला के रिश्ते को जानते रहे | भारत में विलय के बाद जो स्थिति होगी महराजा हरिसिंह जानते थे | आज भी नेहरु के कारण कश्मीर एक समस्या के रूप में दुनिया देखता है | पाकिस्तानी सेना( कबलाई कहा जाता है ) ने कश्मीर पर हमला कर दिया | जम्मू कश्मीर की जनता कि भलाई के लिए महाराजा हरिसिंह ने २६ अक्तूबर १९४७ में नि;शर्त भारत में विलय कि घोषणा पत्र लिख दिया | सरदार पटेल ने तुरत सेना भेजकर श्रीनगर को बचा लिया और कबलाई को भागन शुरू किया | धीरेधीरे पाकिस्थान सेना कबलाई के कदम उखड गये, आधी इलाका पर भारतीय सेना ने कब्ज़ा कर लिया | कुछ दिनों कि बात थी लेकिन नेहरु ने कश्मीर मामले को सयुक्तराष्ट्र संघ में सुलझने ले गये, जो आज तक नहीं हुआ |

    शेखरकपूर यदि इतने इतिहासकार है, तो इन सब बातो को क्यों नहीं शामिल किया | शेखअब्दुल्ला इतना ही अच्छा था, तो नेहरु ने जनसंघ के राष्ट्रीय नेता श्री श्यामाप्रसाद मुखर्जीकी हत्या के बाद शेखअब्दुल्ला की सरकार को बर्खास्त कर जेल में क्यों डाला | शेखअब्दुल्ला का मतलब सिद्ध हो गया | कश्मीर के सत्ता मिलते ही अपनी मुसलमानी रंग दिखने लगा | भारत से अधिक स्वायत लेने लगा | हिंदूओ के ऊपर होते अत्याचार को देखकर जनसंघ राष्ट्रीय नेता ने देश भर में आन्दोलन शुरू किया | श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में एक निशान ,एक प्रधान, एक विधान नामक आन्दोलन छेड़ दिया | कश्मीर में प्रवेश हेतु परमिट सिस्टम का विरोध कर कश्मीर गये | अब्दुल्ला की सरकार ने श्यामाप्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार जेल में उनकी हत्या किया गया | इस पर नेहरु के खिलाफ देश भर में आन्दोलन शुरू हो गया | अपनी छवि ख़राब होते देख नेहरु ने अब्दुल्ला को जेल भेज दिया | आज भी जम्मू कश्मीर की समस्या वही है, शेख अब्दुल्ला के खानदान जमू कश्मीर में राजपाठ चला रहे है,महाराज हरिसिंह कि संतान कर्ण सिंह काग्रेस के नेता होते हुए वनवास है | ये कैसा प्रधानमंत्री का कार्यक्रम बना है स्पष्ट हो रहा है |

 

बुधवार, 31 जुलाई 2013

गरीबी का मजाक


     आज गरीबों का मजाक बनाया जा रहा है । योजना आयोग के द्वारा फिर से यह बताया कि देsश में गरीबी कम हो रही है। रिपोंर्ट आते ही कुछ कांग्रेसियों उत्साहित होकर कहने लगे कि 12 रूपये या 5 रूपये में पेट भर खाना खाया जा सकता । फिर क्या लोगों ने अपने तरीकों द्वारा विरोध प्रगट करने लगे। मीडिया ने जगह जगह जाकर लोगों के विचार लेने लगा और नेताओं का मजाक उडाना शुरू कर दिया।

    कांग्रेस में एक नेता है, उस नेता तक अपनी को पहॅुच सबसे महत्व रखता है क्योकि उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण स्थान में चाहिए। इसलिए वे क्या बोलते है उन्हे बाद में पता चलता, जब लोग खुब आलोचना करते है। इस श्रेणी में दिग्विजय सिह आते है, अव राजबब्बर शामिल हो गये है।

     योजना आयोग ने अभी कहा है कि देश में गरीब 22 प्रतिषत से कम हुआ है। देश में 2004/5 में गरीब का प्रतिषत 30 था । 2010/11 में यह घट कर 30 प्रतिषत रह गया और सरकार ने मनरेगा के कारण अब 22 प्रतिषत रह गया है। सरकार किस पैमाने से यह कह रही है यह स्पश्ट नही करती है। योजना आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री है। योजना आयोग ने पिछले साल कहा था कि शहरी क्षेत्र में 33 रूपये तथा गा्रमीण क्षे़त्र में 27 रूपये आमदनी वाले गरीबी रेखा से उपर र्है। गरीबी के ये आंकड़े योजना आयोग द्वारा तेंदुलकर समिति के द्वारा सुझाए गए मापदंडों पर गरीबी की नई रेखा की परिभाषा पर आधारित हैं।

     ताजा सर्वे में बड़ी संख्या में अर्थ विशेषज्ञ मानते हैं कि इस काम में बढाती मंहगाई घटते रोजगार के अवसर के बारे में विचार नही किया गया है। बीते वर्षो में लगातार बढ़ती हुई महंगाई और रोजगार के अवसरों में अपर्याप्त होने से अनेक लोग गरीबी से कैसे उपर आ गये समझ नही आता। भारत के अर्थ योजक यह कहा रहे है कि गरीबी की नई रेखा से देश के वास्तविक गरीबों की संख्या मालूम नहीं हो पाएगी क्योकि ये आंकडे बाजी दिखाया जा रहा है। यदि योजना आंयोग चाहता हैं कि गरीबी, न केवल आंकड़ों में कम होती दिखाई दे। वास्तव में कम करना हो, गरीबी की रेखा के निर्धारण के लिए केवल कैलोरी नहीं बल्कि बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा सेवाओं की उपलब्धता की जरूरतों का भी ध्यान रखें।

    देश के गरीबों के पास धन का एक बड़ा भाग भोजन की पूर्ति में लगता है। कहने का मतलब गरीब के पास पैसा आने पर वह खाने के उपर ही अधिक खर्च करता है। जो पैसा बच जाता है तो वह शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा जुटाने में व्यय करता है। फिर घुम कर वही आ जांता है । 

     इदिरा गांधी ने गरीबी हटाओं को नारा दिया लेकिन गरीबी कम नहीं हुई और बढ गई। गरीबी देश का सबसे बड़ा अभिशाप माना जाता और बिना भ्रष्टाचार के गरीबी हटाने का प्रयास हुआ होता आज स्थित अलग होती।

शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

गिरता रुपया सोती सरकार


 
              देश की रुपया का स्तर गिरता जा रहा है वित्त प्रबधन हेतु चितम्बरम अमेरिका का चक्कर लगा रहे है और देश में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए कोई भी कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी| लेकिन देश के युवाओ को प्रधानमंत्री पर विश्वास न उठ जाये |

       प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताया है कि आने वाले वर्षो में चालू खाता घाटा (सीएडी) घटकर 2.5 फीसदी तक आ जाएगा | यह मानते हुए कि देश विपरीत परिस्थितियों से गुजर रहा है, उन्होंने कहा, मुझे मालूम है कि अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण उद्योग जगत बेहद चिंतित है| अर्थव्यवस्था को तेज विकास के रास्ते पर वापस लाने के लिए वह सरकार की ओर देख रही है| मैं मानता हूं कि यह उनकी बिल्कुल जायज उम्मीद है और इस पर हमारा सर्वाधिक ध्यान है| हाल के दिनों में सरकार ने अर्थव्यवस्था में सुधार के जितने भी कदम उठाए हैं और उठाने जा रही है, वे साल के अंत से नतीजे देने लेंगे। लेकिन साल के अंत तक का इंतजार कौन करता है तबतक चार राज्यों का चुनाव हो चुके होगे |

       एक अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री के होते हुए भारत एक मंदी के दौर से गुजर रहा है| यह बात प्रधानमंत्री स्वंय कह रहे है| प्रधानमंत्री कह भी रहे है कि तुर्की, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका सहित कई उभरते बाजारों को अवमूल्यन का सामना करना पड़ रहा है| हम भी रुपये की विनिमय दर में गिरावट का सामना कर रहे हैं| इस रूपये के गिरावट के समय हम किन वस्तुओं का निर्यात कर लाभ कमा सकते है| प्रधानमंत्री और देश के वित्त प्रबधन इस तरफ ध्यान क्यों नहीं दिया |

        प्रधानमंत्री ने अपनी ख़राब होती छवि पर बोले कि देश कि अर्थ व्यवस्था को टीवी पर तोड़मरोड़ कर तस्वीर पेश की गई है। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक आलोचक एक खराब साल के तजुर्बे पर फोकस करते हैं। यह टीवी पर अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि यूपीए शासनकाल में गरीबी 2 फीसदी गिरी। उन्होंने माना कि एक साल खराब रहा है, लेकिन भरोसा दिलाया कि देश जल्द इससे उबर लेगा| लेकिन कैसे उबार पायेगा ? एक तरफ ये कांग्रेसी एफडीआई को लेकर बड़ी बड़ी बाते करते है | अभी दूसरी तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था की तीन बड़ी घटनाये हुई एक  विश्व के दुसरे नम्बर के अमीर वारेन वफेट की इन्वेस्टमेंट कम्पनी बर्कशायर हैथवे ने भारत से अपना सारा कारोबार समेट लिया| दूसरा एल एन मित्तल की कम्पनी मित्तल आर्सेलर ने उड़ीसा में बन रहे पचास हजार करोड़ से निवेश को रद्द कर दिया| स्टील कम्पनी पास्को ने उड़ीसा में बन रहे प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया| आखिर युवा किस तरफ देखेगा |

मतलब साफ़ है की इस देश के अनर्थशास्त्री प्रधानमंत्री ने इस देश का बन्टाधार कर दिया है इस राजनैतिक माहोल में कोई भी देश आज भारत पर विश्वास करने को तैयार नही है !!

शनिवार, 13 जुलाई 2013

बोफोर्स दलाल क्वात्रोच्चि

        16 अप्रैल इटली के रेडियों से एक समाचार का प्रसारण किया गया। पूरे भारत में हडकम मच गया । यह समाचार था कि बोफोर्स के खरीदी में दलाली दी गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस समाचार को रोकने के लिए पूरी कोषिष श्किया । अनेक समाचार पत्र को मैनेज कर लिया गया। लेकिन इंडियनएक्प्रेस ने इस समाचार को प्रमुखता से छापा, पूरे देष इस समाचार से स्तब्ध होगा। राजीव गाधी की छवि एक सामान्य जनक थी । लोगों को विष्वास नही हुआ कि राजीव गांधी ऐसा भी कर सकते है। बोफोर्स घोटला के नाम से जाना गया और कांग्रेस का ग्राफ गिरता ही गया ।

       1986 में स्विस आर्म्स निर्माता कंपनी बोफोर्स ने हाविट्जर तोपों की सप्लाई के लिए भारत के साथ 1600 करोड़ रुपये का सौदा किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया गांधी के करीबी दोस्त माने जाने वाले क्वात्रोच्चि पर इस सौदे में एजेंट की भूमिका निभाया था। सोनिया के मित्र क्वात्रोच्चि पर आरोप था कि इस सौदे के बदले उसे दलाली की रकम का बड़ा हिस्सा मिला। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संसद को आश्वासन दिया था कि बोफोर्स तोप खरीद में कोई घोटाला नहीं हुआ है। देष ने इस घोटाले में राजीच गांधी को दोशी मानते हुए 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया ।

       इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोच्चि बोफोर्स घोटाले का अहम किरदार माना जाता रहा है। क्वात्रोच्चि पर बोफोर्स तोप सौदे में दलाली लेने का आरोप था। क्वात्रोच्चि को भारतीय राजनीति के सबसे ताकतवर गांधी परिवार का निकट माना जाता रहा है। जब भी सत्ता में काग्रेस आई तो क्वात्रोच्चि को अनेक बार बचाया गया। गिरफतारी से बचने के लिए क्वात्रोच्चि 1993 में भारत से फरार कराया गया था। इस मामले में तोता पिजडा में बंद रहा । अनेक बार गिरफतार क्वात्रोच्चि को भारत नही लाया जा सका क्यों कि जिस देषों में  क्वात्रोच्चि गिरफतार किया जाता वहां पर प्रत्यपण संधि न होना । उसकी मौत के साथ ही इस घोटाले से जुड़े कई राज दफन हो गए। 

शुक्रवार, 28 जून 2013

देश में आपदा प्रबंधन पर करे पुन: विचार


      उत्तराखंड में केदारनाथ धाम से शुरू हुआ आपदा ने आपदा प्रबंधन पर विचार करने के विवश किया है | आपदा प्रबधन किसी भी स्थान पर किसी प्रकार की आपदा से आने पर लोगों द्वारा सहयोग किया जाता रहा है । जैसे अधिक वर्ष के समय पर अनेक गांव में पानी भर जाते है ऐसे स्थानों के लोगों को सुरक्षित ले जाना एवं भोजन पानी की व्यवस्था करना यदि काम करना ही आपदा प्रबंधन होता है। यदि यहां बडे स्तर हो जैसे भूकंप,तूफान या बाढ आने पर लोगों को सहायता करना, फंसे लोागो तक भोजन पानी तथा सुरक्षित स्थान पर ले जाना आदि अनेक कार्य है। प्रकृति द्वारा जो आपदा आती है ,प्रकृति आपदा की सरल परिभाषा है कि यह प्रकृति से छेड़छाड़ और कुप्रबंध का परिणाम है। प्रकृति का हमने वर्षों से जैसा शोषण किया है उसका यह परिणाम है। मूक प्रकृति ने इस दुर्व्यवहार का बदला लेना शुरू किया है और प्राकृतिक आपदा अब बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने है।

     आपदाओं की चिंता के तहत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक आपदा प्रबंधन इकाई का गठन किया। इसका मूल उद्देश्य आपदाओं के प्रति सचेत व नियंत्रण रखने की रणनीति पर अमल करना है। देश के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर आपदा नीति भी है और साथ में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी भी। इनकी सहायता के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान भी गठित किया गया। प्रधानमंत्री स्वयं अथॉरिटी के अध्यक्ष हैं। लेकिन अनेक वर्षो से बैठक ही नही हुआ है ।

     उत्तराखंड में आये आपदा के बाद नरेन्द्र मोदी ने देहरादून जाकर वहां से गुजरात के लोगों को अपने साधन से गुजरात भेज दिया तो मीडिया में खबर चला कि मोदी 15000 हजार लोगों को लेकर उड गये । यदि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र स्तर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन से राज्यों को जोडा होता तो देश की पूरी आपदा प्रबंधन की टीम उत्तराखंड में हजारों लोगों को और बचाया जा सकता था । चारधाम की यात्रा में देश के सभी कोने से लोग यात्रा करते है। सभी राज्य के लोगों को बचाया जा सकता था।

       आपदा प्रबंधन पर राज्यों में कोई आपदा नीति नहीं है और वहां आपदा आने पर ही चर्चा या कार्रवाई होती है। औपचारिक तौर पर आपदा कार्यालय हर राज्य में आवश्यक है | लेकिन केंद्र और राज्यों में कोई समन्वय नहीं दिखता है। हम एक दृष्टि आपदाओं और उनके प्रबंधन पर नजर डालें, तो निराशा हाथ लगेगी। हमारे देश में आपदा के बाद रेड अलर्ट शुरू होता है। आपदा आने पर ही हलचल होगी और सच तो यह है कि विभाग अपनी उपस्थिति दर्ज करते है बस ।

      किसी भी आपदा प्रबंधन को तीन चरणों में देखा जाता है। आपदा में तत्काल, अल्प अवधि व दीर्घकालीन प्रबंधन की बात होती है। दीर्घकालीन प्रबंधन में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। परंतु तत्काल व अल्प अवधि प्रबंधन स्थानीय संसाधनों पर ही निर्भर रहता है। स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन के गुर लोगों को प्रषिक्षण देने होगे । यह काम स्कूलों से शुरू किया जाय तो आने वाले समय के लिए और अच्छा रहेगा। नरेन्द्र मोदी ने जो काम किया वह एक मांडल के रूप में दिखाया है। सभी लोग निस्वार्थ भाव से आपदा प्रबंधन का कार्य करे तो देश को बडे हानि से बचाया जा सकता है।

गुरुवार, 27 जून 2013

चार धाम की यात्रा


       उत्तराखड में अत्याधिक वर्षा तथा केदारनाथ के उपर महात्मा गाँधी बांध के टूट जाने से हुई भारी तबाही एवं जनहानि हआ है । यह अत्याधिक हदयविदारक एवं प्रकृति घोर उपेक्षा से तबाही हुआ है। यह कहा जाय कि प्रकृति ने लोगों का एक प्रकार से चेतावनी दिया है कि पहाड एव वनों से छेडछेडा अधिक हो रहा है। यही हाल रहा तो दुनिया तबाही की ओर जा रही है। केदारनाथ से रुद्ररूप में निकली गंगा( मंदाकिनी ) जी ने जो तबाही मचाई कि उत्तराखंड के मुख्यमत्री को कहना पडा कि केदारनाथ कि या़त्रा दुबारा शुरू करने में दो साल लगेगे।

        प्राचीनकाल से पूरे भारत वर्ष को जोडने के लिए आद्य शकराचार्य ने चारोधाम की या़त्रा प्रांरभ किये था । यात्रा का मुख्य उददेष यही था कि पूरे भारत वर्ष को सांस्कृतिक रूप से, ज्ञान ,उपदेषों ,प्रवचनों के द्वारा एवं धार्मिक, अध्यामिक शक्ति से एक राष्ट्र  की भावना का जागरण हो। हजारों वर्षो से युवा सन्यासियों , अध्यात्मिकता ओर जाने वाले संनसारिक लोग भी यात्रा के लिए निकल पडते थे। यात्रा पर जाने से पूर्व अपने सगे सबधियों से मिल कर जाते थे कि वापस आने कि उम्मीद नही के बराबर होता था। यदि यात्रा के समय मृत्यु हो जाय तो जीवन धन्य माना जाता कि भगवान की कृपा से मोक्ष प्राप्त हुआ है।

        उत्तराखंड में आऐ इस आपदा ने लोगों के मनोबल को कमजोर किया जाने की कोशिश मीडिया और विधर्मीयों किया जा रहा है। केदारनाथ मंदिर के पुजारी जी ने कहा कि आज आस्था एवं मोक्ष प्राप्त करने के लिए चारधाम की यात्रा का भाव नही है बल्कि अधिकाश पिकनीक मौज मस्ती के लिए धार्मिक यात्रा आते है। टीवी पर मीडिया द्वारा जो दिखाया जा रहा जो लोग बच गये रोते बिलखते दिखते है | यह कहते है कि अब दुबारा यात्रा पर नही जायेगे। अपने भारत के सांस्कृतिक महत्व की अज्ञानता के कारण चारोधाम यात्रा के बारे भ्रम फैला रहे है | कहने का मतलब यही है हमारी आस्था और सास्कृतिक भावना मजबूत होना चाहिए |

बुधवार, 12 जून 2013

नवीन जिंदल भी कोयले से काले.............

                                                                                  
                कोयले की कालीख से अनेक नेताओ के मुह हो रहे है। जब से सुप्रीप कोर्ट ने सीबीआई को कोर्ट में रिपोर्ट करने कहा है] तब से कांग्रेस की सरकार भी हेरा फेरी नही कर सकती है। अभी नवीन जिदल के उपर CBI ने एफ आई आर दर्ज किया है। नवीन जिदल ने मंत्री को घूस दिया था। नवीन के पिता श्री ओम प्रकाश जी ने छत्तीसगढ के रायगढ के पास लोहे की फैकटरी ला गई । कुछ वषो में अच्छा लाभ कमाया फिर पिछे मुडकर नही देखा । 1993 मे उदारीकरण के कारण कांग्रेसी सरकार उन्हे कैपिटिव कोल माईस तमनार के पास दिया गया।



            तमनार के अनेक गाव में कोयला निकालनेके लिए  जमीन चाहिए था |  गरीब आदिवासीयों  किसानों के जमीन पर कोयला डाल कर उनकी जमीन को सस्ते में खरीद लेना, इस प्रकोर का काम अनेक बार किया है। सस्ते जमीन पर से कोयला निकालना और गरीवों के जमीन पर कब्जा करना जेएसेपीएल नाम का कंपनी का सामाज्य खडा किया ।
 

            यह सब वहा के अनेक सामाजिक सगठनों ने अनेक बार जिदल के खिलाफ आंदोलन किया है ।  कोर्ट ने कुछ अडगा किया जिसके कारण जिदल ने लीपा पोती किया है। २०१२ में कोयला घोटला उजागर होने के बाद जी न्युज टीवी ने एक रिपोर्ट टीवी दिखाया था । जिस पर जिदल ने स्टिग आपरेषन कर सरकार के सहयोग से जी न्युज को फॅसाया था। लेकिन आज सीबीआई ने मामला दर्ज किया और जिदल के ठीकाने पर छापा मारा है।


             मैने अपने परिचित मित्रों से पता किया तो उन्होने बताया कि छापा कि खबर मिलते रायगढ आफिस के कागजों को छिपा दिया गया है ।  जिदल के उपर हो रही कार्य वाही से सामाजिक संगठन एवं जनता में न्याय की आस फिर से महसुस होने लगी है।