सोमवार, 1 मार्च 2021

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वदेशी को वैक्सीन लगवाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत बायोटेक की कोवैक्सिन लगवाई। जो कि भारत बायोटेक के द्वारा भारत के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों द्वारा स्वदेशी कोवैक्सीन बनाया गया है। जिसे लेकर विपक्ष ने संदेह व्यक्त किया तथा फिर से मोदी सरकार पर सवाल खड़े किए थे। पुडुचेरी की नर्स ने टीका लगाया, केरल की नर्स पास खड़ी थीं और प्रधानमंत्री मोदी जी असम का गमछा पहने थे। लेकिन सुई की दर्द विपक्ष को हो रही है 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना का पहला टीका लगवा लिया है। उन्हें भारत बायोटेक की कोवैक्सिन का प्रथम डोज दिया गया। प्रधानमंत्री सोमवार की सुबह असम का गमछा गले में डालकर दिल्ली AIIMS पहुंचे। यहां पुडुचेरी की पी निवेदा ने मोदी को टीका लगाया, इस दौरान केरल की सिस्टर रोसम्मा अनिल पास में खड़ी थीं। इन तीनों राज्यों में 27 मार्च से 6 अप्रैल तक विधानसभा चुनाव होने हैं। अब तक भारत बायोटेक की कोवैक्सिन विपक्ष के द्वारा सरकार पर आरोप लगाया जाता रहा है कि तीसरे चरण की वैक्सीन बिना क्लिनिकल टायल किये ही सरकार ने लॉन्च कर दिया। अभी भारत बायोटेक द्वारा प्रमाणित नही है। सरकार हड़बड़ी में लोगों के जान से खिलवाड़ कर रही है। इन सब बातों का अंत प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं को को वैक्सीन लगाकर कर दिया है। बार बार विपक्ष के कारण जनता में सन्देह बनाया जा रहा था कि भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया को वैक्सीन अभी भी प्रारंभिक जांच में है। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने भारत बायोटेक स्वदेशी निर्मित को वैक्सीन को टीकाकरण रोक दिया है। यहाँ पर कोशिड वैक्सीन लगाया जा रहा है।

भारत में कोविड-19 से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान का दूसरा चरण 1 मार्च से प्रारभ हो गया है। इस दुसरे चरण में 60 वर्ष से अधिक और 45 वर्ष से अधिक गंभीर के व्यक्तियों को लगाया जा रहा है भारत में लोगों को दो तरह की वैक्सीन दी जा रही है। एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया जिसे भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने इसका उत्पादन किया और दूसरा टीका है भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया कोवैक्सीन।

जहां जो भी वैक्सीन लगाई जा रही है, वहां के नियामकों ने उसे सुरक्षित बताया है। वैक्सीन के लिए पहले लैब में सेफ्टी ट्रायल शुरू किए जाते हैं, जिसके तहत कोशिकाओं और जानवरों पर परीक्षण और टेस्ट किए जाते हैं। इसके बाद इंसानों पर अध्ययन होते हैं लैब का सेफ्टी डेटा ठीक रहता है तो वैज्ञानिक वैक्सीन के असर का पता लगाने के लिए आगे बढ़ सकते हैं।पूरे काम और निष्कर्ष को स्वतंत्र रूप से जांचा गया और सत्यापित किया गया। कोविड वैक्सीन के परीक्षण बहुत तेज़ गति से किए गए, लेकिन पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया।

भारत की स्वदेशी कोवैक्सीन के डेटा की कमी को लेकर शुरू में चिंताएं जताई गई थीं, लेकिन इस वैक्सीन को बनाने वाले भारत बायोटेक के अध्यक्ष डॉ. एला ने कहा कि 26,000 में से लगभग 24,000 वॉलंटियर्स तीसरे चरण के परीक्षण में भाग ले चुके हैं, और फरवरी तक वैक्सीन की एफिकेसी यानी वैक्सीन कितनी प्रभावी है, उसका डेटा उपलब्ध होगा।

वैक्सीन से साइड-इफ़ेक्ट हो सकता है -

वैक्सीन आपको कोई बीमारी नहीं देती, बल्कि आपके शरीर के इम्यून सिस्टम को उस संक्रमण की पहचान करना और उससे लड़ना सिखाती है, जिसके ख़िलाफ़ सुरक्षा देने के लिए उस वैक्सीन को तैयार किया गया है। वैक्सीन लगने के बाद कुछ लोगों को हल्के लक्षण हो  सकते हैं। ये कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि वैक्सीन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया होती है।लगभग 10 में से एक व्यक्ति को जो सामान्य रिएक्शन हो सकता है वह भी कुछ दिन में ठीक हो जाता है, जैसे - बांह में दर्द होना, सरदर्द या बुख़ार होना, ठंड लगना, थकान होना, बीमार और कमज़ोर महसूस करना, सिर चकराना, मांसपेशियों में दर्द महसूस होना।

भारत में किसी वैक्सीन को तभी मंज़ूरी मिलती हैजब ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीसीजीआई) ये फ़ैसला करता है कि वैक्सीन इस्तेमाल के लिए सुरक्षित और असरदार है।

इसी तरह अन्य देशों में भी नियामक होते हैं जो वैक्सीन के इस्तेमाल को मंज़ूरी देते हैं। मंज़ूरी के बाद भी वैक्सीन के असर पर नज़र रखी जाती है, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि आगे इसका कोई दुष्प्रभाव या दीर्घकालिक जोखिम नहीं है। इसके बाद किन लोगों को पहले वैक्सीन दी जानी है, ये सरकारें तय करती हैं।

अतः में - मुझे भी कोविडशी वैक्सीन लगा है लेकिन मुझे अबतक ऐसा कुछ भी लक्षण नही दिखाई या महसूस नही हुआ। मैं बिल्कुल स्वास्थ्य हू 


रविवार, 21 फ़रवरी 2021

मालाबार दंगा या मोपला विद्रोह 1921 की



बात है आज से 100 वर्ष पूर्व की जब केरल के मालाबार क्षेत्र में मोपला मुसलमानों के द्वारा दंगा किया गया था। जिसे मालाबार का दंगा या मोपला विदोह 1921 कहा जाता है। इस हिंसा में 2500 से ज्यादा हिन्दू की हत्या, महिलाओं की अस्मिता हरण, सम्पति की लूटपाट और धर्मातरित कर मुसलमान बनाया गया था  इस घटना पर वीर सावरकर ने पुस्तक लिखी है जिसका नाम मोपला विद्रोह के नाम से जाना जाता है। आज ही केरल में Rss के वेश में कुछ दो व्यक्ति है पीछे में मुस्लिम समुदाय के लोग पकड़े हुए हैं। यह आज घटना की उस घटना 1921 की घटना 100वी साल का स्मरण भर नही बल्कि अलग मुस्लिम समुदाय की ओर से नया मुस्लिम राज्य की मांग की गई है। ( आज 2021 में भी कुछ मुस्लिम समुदाय के संगठन ने गजवा ए हिन्द की मानसिकता का माहौल बनाकर रखा गया है। सदियों से इस्लामिक भविष्यवाणी के अनुसार पूरी दुनिया में इस्लाम का शासन तभी सफल होगा जब हिन्द का शासक बेड़ियों मे जकड़ कर मुस्लिम खलीफा के सामने होगा। इसलिए भारत के शासक के प्रतीक RSS के गणवेशधारी व यूरोप (ब्रिटेन/फ्रांस) के शासक के प्रतीक लाल टोपी व लाल सफेद कपड़ों वालों बेड़ियों मे जकड़े दिखाया गया है। तुर्की का टेलीविज़न नाटक अरतुगरुल गाजी से प्रभावित होकर यह खलीफ़ा को दोबारा खड़ा करना चाहते हैं।) 

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद मोपला विद्रोह अंग्रेजी सरकार के द्वारा तुर्की के खलीफा को हटाकर वहाँ के नए राष्ट्वादी विचारक युवा तुर्क मुस्तफा कमालपाशा के हाथों में सत्ता दे दिया। लेकिन भारत के मुस्लिम तुर्की के ख़लीफ़ा को अपना खलीफा मानते आए थे। लेकिन अंग्रेजों के द्वारा तुर्की खलीफा को हटाए जाने के कारण अंग्रेजो के खिलाफ भारत में खिलाफत आंदोलन शुरू किया। सबसे बड़ी बात है कि कांग्रेस ने इस खिलाफत आन्दोलन का समर्थन किया था महात्मा गाँधी ने भी इस आन्दोलन का समर्थन किया कहा कि मुसलमानों के बेगैर भारत की आजादी संभव नहीं है यही बात मुस्लिम नेताओं तक गई और भारत की विभाजन की पृष्ट भूमि तैयार हो गया 

उस समय ऐसे बहुत सारे नेता थे जो गाँधी जी के मुस्लिम तुष्टीकरण को नापसंद करते थे। एक बात कहा जाता है की तुर्की में खलीफा को हटाया गया है इस बात से भारत का क्या लेना देना है लेकिन यह बात गाँधी और उनके समर्थकों को पसंद नहीं आता था। उस समय की कांग्रसियों ने मालाबार में जाकर स्थिति का जायजा भी लेना उचित नहीं समझा | आर्य सामाजिक स्वामी श्रद्धानंद ने उस ने मालाबार में जाकर बलात्पुर्वक धर्मान्तरित हिन्दुओं को घरवापसी (शुद्धिकरण अभियान) कार्यक्रम चलाकर उन्हें वापस हिन्दू बनाया  






शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

पुलवामा का बदला, बालाकोट से


जब से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की नरेन्द्र मोदी की सरकार बनी है। ऐसे में जम्मू कश्मीर सहित देश अन्य भागों में आतंकिवादियों लोगों की खैर नहीं है। ऐसे में चाहे पुर्वोत्तर भारत में म्यांमार से संचालित आतंकी हो या माओवादी हो और कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकिय क्यों न हो। 2014 से ही इन आतंकियों लोगों दमन की करवाई बहुत तेज हो गया। कश्मीर में आये दिन कोई न कोई आतंकी मारा जाता वहा पर तैनात सुरक्षा बलों ने लिस्ट बनाकर आतंकवाद का सफाया किया जा रहा था। लेकिन इसी बीच 14 फरवरी 2019 कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर पाकिस्तानी आतंकियों ने हमले किया। पुलवामा आतंकी हमला की आज दूसरी बरसी है इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारतीय सेना ने ऐसा बदला लिया कि उसे याद करते ही आज तक पाकिस्तान कांप उठता है। 

पुलवामा आतंकी हमला 14 फरवरी 2019 को हुआ था जब 78 वाहनों का काफिला 2500 जवानों को लेकर जम्मू से श्रीनगर जा रहा था। ये काफिला अवंतीपोरा के पास लेथीपोरा में नेशनल हाइवे 44 से गुजर रहा था। दोपहर करीब 3.30 बजे 350 किलो विस्फोट से भरी एक एसयूवी काफिले में घुसी और भयंकर धमाका हुआ। जिस बस से एसयूवी टकराई उसके परखच्चे उड़ गए। उस बस में सवार ब्त्च्थ् के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस खबर से पूरा देश दहल गया। सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और सिविल सोसायटी के सदस्यों ने इस हमले की निंदा की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों की भावनाओं से खुद को जोड़ते हुए कहा था कि जैसी आग आपके भीतर जल रही है, वैसी ही मैं भी अपने सीने में महसूस कर रहा हूं। उन्होंने पाकिस्तान को कठोर चेतावनी दी कि हर आंसू का बदला लिया जाएगा। उन्होंने भारतीय सेनाओं को कार्रवाई के लिए खुली छूट दे दी। अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने इस हमले की आलोचना की थी।


गुरुवार, 11 फ़रवरी 2021

भारत सरकार की कूटनीति ... चीनी सेना अब पैंगोंग झील से भागना पडा

 


आज भारत सरकार की कूटनीति और कठिन हालात लदाख सीमा के बार्फिले क्षेत्र में डटे भारतीयों सेना के जवानों के शौर्य की बदौलत पिटे मुह से चीनी सेना अब पैंगोंग झील से उल्टे पैर वापस लौटने लगा है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में यह बड़ी जानकारी देते हुए कहा कि बुधवार से सेना की वापसी शुरू हो गई है। भारत ने इस बातचीत में कुछ भी नहीं खोया है हम अपनी एक इंच जमीन किसी को भी नहीं लेने देंगे हमारे संकल्प के कारण यह फल मिला है कि चीनी सेना पैगॉन्ग लेक के दक्षिणी और उत्तरी इलाके से हटने लगी है चीनी सरकार ने भी कहा है कि बुधवार से कि पैगॉन्ग लेक के दक्षिणी और उत्तरी इलाके से भारत-चीन की सेना ने डिसइंगेजमेंट की प्रोसेस शुरू कर दी है। चीन की सरकार मीडिया ने बुधवार को दावा किया कि लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारत के साथ 10 महीने से चल रहा टकराव खत्म हो गया है।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जब देश को यह जानकारी दी उस समय सदन में पीएम नरेंद्र मोदी और गैलरी में आर्मी चीफ मुकुंद नरवणे भी मौजूद थे। भारत और चीन के बीच 24 जनवरी को 9वें राउंड की बातचीत 15 घंटे चली थी। उन्होंने बताया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन और भारत के बीच सेना की वापसी का समझौता हुआ है। चीन की मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के स्पोक्सपर्सन वू कियान ने बताया कि चीन और भारत के बीच हुई कमांडर लेवल की 9वें दौर की बातचीत में डिसइंगेजमेंट पर सहमति बनी थी। इसके तहत ही दोनों देशों ने अपने सैनिकों को पैंगॉन्ग हुनान और नॉर्थ कोस्ट से पीछे हटाना शुरू कर दिया है। इसके बाद चीनी विदेश मंत्रालय का बयान आया। स्पोक्सपर्सन वांग वेनबिन ने कहा कि रूस में हुई बैठक में दोनों देशों के विदेश मंत्री इस मसले का हल निकालने पर राजी हुए थे। 

भारत और चीन के बीच 24 जनवरी को 9वें राउंड की बातचीत 15 घंटे चली थी। इसमें भारत ने कहा था कि विवाद वाले इलाकों से सैनिक हटाने और तनाव कम करने के प्रोसेस को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब चीन पर है। इस दौरान दोनों पक्ष कोर कमांडरों की 9वें दौर की बातचीत जल्द करने पर भी सहमत हुए थे, ताकि सैनिकों की वापसी का काम तेज हो सके। पेंगोंग झील क्षेत्र में चीन के साथ हुए समझौतों में चीन की सेना उत्तरीय किनारे में फिगर 8 के पूर्व दिशा की ओर रहेगा वही भारत की सेना फिगर 3 के पास अपने धन सिंह थापा पोस्ट पर रहेगा चीनी सेना इस दौरान जो भी निर्माण किया है, उसे भी हटाना होगा इन सारी कारवाही के 48 घंटे बाद पुनः वरिष्ठ कमांडर स्तरीय बातचीत होगी जो बचे हुए मुद्दें पर बातचीत होगी   

2019 में चीन से फैला करोना वाइरस पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया इसी समय पूरी दुनिया में चीन का विरोध होने लगा। कई देशों में दिनदिनों में करोना वाइरस के कारण जन और आर्थिक हानि होने लगी भारत सहित कई देशों में लाकडाउन लगाना पड़ा था इसी समय कई देश मांग करने लगे की कोरोना वाइरस की जाँच हो की इस वाइरस को फैलाने में चीनियों का हाथ है इस मुद्दे पर भारत सरकार भी सहमत है, की WHO कोरोना वायरस की जाँच करे। चीन इस मौका का फायदा उठाकर भारत के कुछ क्षेत्र में घुसने की कोशिश किया। चीन और भारत की सेनाएं पूर्वी लद्दाख में पिछले साल अप्रैल-मई से आमने-सामने हैं। 15 व 16 जून 2020 को गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे तथा चीन के भी 80 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे, लेकिन अब चीन ने स्वीकार नहीं किया की उसके भी सैनिक मारे गए है। अमेरिका द्वारा लिए गए सेटेलाइट से चित्र से पता चला की कई बार चीनी सेनाओं से वहा से घायलों को ले जाने के लिए गाड़ी और एयरलिप्त किया गया है।   

चीन और भारत की सेना कई बार बातचीत हुई लेकिन सहमति नहीं बनी वही भारत ने धीरे धीरे चीन के साथ आर्थिक प्रतिबन्ध लगाने शुरू किये चीन के सामानों का भारत में जोरदार विरोध होने लगा, जनता के मांग को भारत सरकार ने माना और चीनी APP को प्रतिबन्ध लगा दिया, इससे चीन को बहुत ही आर्थिक नुकसान होने लगा कोरोना वायरस के कारण जापान और अमेरिका की कई कम्पनी चीन से अपना कारोबार बंद कर भारत तथा कई देशों में जाने लगे इससे चीन को बहुत ही आर्थिक नुकसान होने लगा है भारत ने चीनी सामानों पर प्रतिबन्ध काम आया चीन भारत के सामने घुटने के बल पर आ गया है        

शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

एक समय ऐसा आया की लड़ाकू विमान तेजस को फाइलों में बंद करने नौबत आ गई थी -

आज प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि एक समय था जब हमारे अपने लड़ाकू विमान तेजस को फाइलों में बंद करने नौबत आ गई थी लेकिन हमारी सरकार ने अपने इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तेजस की क्षमताओं पर भरोसा किया और तेजस आज शान से आसमान में उड़ान भर रहा है। कुछ सप्ताह पहले ही तेजस के लिए ही 48 हजार करोड़ रुपए का आर्डर दिया गया है।एचएएल को भारतीय वायुसेना से 83 नए स्वदेशी एलसीए तेजस एमके1ए के निर्माण का अनुबंध मिला है, जिसकी अनुमानित लागत 48,000 करोड़ रुपये से अधिक है।  

तेजस का नाम 4 मई 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था। तेजस एक संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब होता है अत्यधिक ताकतवर ऊर्जा। तेजस के तेज का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब बहरीन इंटरनेशनल एयर शो के लिए तेजस का नाम प्रस्तावित हुआ था तब पाकिस्तान और चीन ने अपना थंडरबर्ड का नाम इस एयर शो से वापस ले लिया था। यह भारत के हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एक सीट और एक जेट इंजन वाला एक हल्का व कई तरह की भूमिकाओं वाला जेट लड़ाकू विमान है। यह एचएएल इंजीनियरिंग द्वारा, अनेक भूमिकाओं को निभाने में सक्षम एक हल्का युद्धक विमान है तथा यह बिना पूँछ का, कम्पाउण्ड-डेल्टा पंख वाला विमान है। इसका विकास 'हल्का युद्धक विमान' या (एलसीए) नामक कार्यक्रम के अन्तर्गत हुआ है, जो 1980 के दशक में शुरू हुआ था। यह विमान पुराने पड़ रहे रसियन मिग-21 का स्थान लेने के लिए बनाया गया है। इसे 1994 में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जब पूरी दुनिया पोकरण के बाद प्रतिबन्ध लगाया तब ही 4 जनवरी 2001 दो प्रोटोटाईप तेजस तैयार हुआ। इसे भारतीय वायु सेना में कमीशन होने में 35 वर्ष लग गये। यह कहा जाये तो कि तेजस के मिशन में बहुत देर किया गया है। 

यह हमारे देश की राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी तथा विदेश पर निर्भर रहना तथा देश में नेता व अधिकारियों की कमीशन खोरी के कारण यह देरी हुई है। 1 जुलाई 2016 को भारतीय वायुसेना की पहली तेजस यूनिट का निर्माण किया गया, जिसका नाम 'नम्बर 45 स्क्वाड्रन आई ए एफ फ्लाइंग ड्रैगर्स' है।


गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

चौरी चौरा शताब्दी समारोह की शुरूआत


 

भारतीय स्वत्रन्त्रता आन्दोलन के इतिहास के पन्नों में दर्ज है 4 फरवरी, 1922 को चौरीचौरा से सटे भोपा बाजार में सत्याग्रही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जुलूस निकाल रहे थे। चौरीचौरा थाने के सामने तत्कालीन थानेदार गुप्तेश्वर सिंह ने उन्हें रोका तो झड़प हो गई। एक पुलिसकर्मी ने किसी सत्याग्रही की टोपी पर बूट रख दिया तो भीड़ बेकाबू हो गई। पुलिस की फायरिंग में 11 सत्याग्रही शहीद हो गए और कई जख्मी भी हुए। इससे सत्याग्रही भड़क उठे और उन्होंने चौरीचौरा थाना फूंक दिया। इसमें 23 पुलिसवाले जिंदा जल गए। इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत ने सैकड़ों सत्याग्रहियों पर मुकदमे चलाए, 19 सत्याग्रही फांसी पर चढ़ा दिए गए। घटना से व्यथित महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था।

घटना में मारे गए पुलिसवालों की याद में 1924 में अंग्रेज अफसर विलियम मौरिस ने थाना परिसर में शहीद स्मारक बनवा दिया। देश आजाद होने के बाद भी वर्षों तक किसी ने कोई पहल नहीं की। करीब 60 साल बाद बाबा राघवदास जैसे मनीषी जब आगे आए और इस स्मारक को खुद ही तोड़ने निकले तब बहस और तेज हुई। बाद में 1993 में तब के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने अमर शहीदों की याद में स्मारक का लोकार्पण किया। तब से यहां शहीदों की याद में कार्यक्रम होते हैं।

 

म्यांमार की सेना ने की तख्ता पटल ...चीनियों का हाथ तो नहीं .....

भारत के पडोसी देश म्यांमार की महिला अरोबिग डांसर खिंग हनिन वाई, वह अपना एक्सरसाइज डांस कर रही है। वही पीछे में सेना देश की संसद में घुसकर तख्ता पटल कर, म्यांमार में आपातकाल १ वर्ष के लिए लगा दिया है। उस महिला ने बताया कि म्यांमार की संसद भवन के पास ही एक्सरसाइज करते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी। इसी समय म्यांमार की सेना ने काफिले के साथ संसद भवन में घुस रही थी। जिसे महिला अरोबिग डांसर खिंग हनिन वाई केइस वीडियो को सोशल मीडिया पर 1 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है।

म्यांमार की सेना ने एक वर्ष के लिए आपातकाल के तहत देश की सत्ता को अपने कब्ज़ा में कर लिया है। खबरों में बताया गया है कि स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। भारत सहित विश्व भर की सरकारों एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने तख्तापलट की घोर निंदा की है इससे म्यांमार में सीमित लोकतांत्रिक सुधारों को बहुत बड़ा झटका लगा है। एक प्रकार से म्यांमार में लोकतंत्र की सेना ने हत्या कर दिया। रोहिंग्या के अत्याचार के कारण विश्व मंच पर म्यांमार की  कमजोर साख है, साथ ही सेना ने सत्ता पर कब्ज़ा कर को बट्टा लग गया है। अत में इसके पीछे चीन का हाथ तो नहीं है ...... 

म्यांंमार में तख्तातपलट पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा है, 'म्यांमार में जो कुछ हुआ है, हमने उसका संज्ञान लिया है चीन, म्यांमार का मित्र और पड़ोसी देश है। हमें उम्मीद है कि म्यामांर में सभी पक्ष संविधान और कानूनी ढांचे के तहत अपने मतभेदों को दूर करेंगे और राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखनी चाहिए।' चीन की इस प्रतिक्रिया पर अधिकांश देश शक की नजरों से देख रहे है। क्योंकि चीन-म्यांतमार आर्थिक कॉरिडोर को ड्रैगन आगे बढ़ाना चाहता है। लेकिन आने वाले महीने एक महीने पहले की स्थिति की तुलना में उसके लिए अनिश्चित होने जा रहे हैं। पाकिस्तान में सीपेक ( चीन पाकिस्तान आर्थिक कारीडोर ) का भारी विरोध हो रहा है। जिसमे चीन को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, इस आर्थिक नुकसान की भरपाई करने के लिए चीन म्यांमार की तरफ ध्यान देना शुरू किया था। लेकिन म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की कोरोना काल में भारत के तरफ ज्यादा झुकाव हो रहा था। चीन म्यांमार की सेना के सहारे म्यांमार की सत्ता तक पहुचना चाह रहा था। यहाँ पर म्यांमार की सेना पाकिस्तान की तरह नहीं है।