मंगलवार, 19 मार्च 2019

मोदी के एक ट्वीट ने ‘मैं भी चौकीदार’ जन आंदोलन बन गया


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर मैं भी चौकीदारके नाम से सन्देश देकर आम लोगों को जोड़ने की अपील किये है। यह ट्वीट एक दिन ग्लोबल ट्रेड तथा दो दिन पूरे भारत में ट्रेड किया। आगे उन्होंने कहा कि वह भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई में अकेले नहीं हैं। ‘‘आपका चौकीदार मजबूती से खड़ा है और देश की सेवा कर रहा है, लेकिन मैं अकेला नहीं हूं। भ्रष्टाचार, गंदगी, सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ने वाला हर व्यक्ति चौकीदार है। भारत के विकास के लिए कड़ी मेहनत करने वाला हर व्यक्ति चौकीदार है। आज हर भारतीय कह रहा है मैं भी चौकीदार। 

उन्होंने अपना संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए तीन मिनट से अधिक समय का वीडियो भी पोस्ट किया है। यह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के राफेल लड़ाकू विमान समझौते में कथित घोटाले को लेकर कहा करते कि अनिल अंबानी को 30 हज़ार करोड़ रुपए दे दिए और प्रधानमंत्री मोदी अपने को चौकीदार कहते है मोदी चोर हैं, मतलब कि ‘‘चौकीदार चोर है।’’ भारतीय राजनीति में नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया को अपने प्रचार का माध्यम बनाया है। जब से राहुल ने चौकीदार चोर कहना शुरू किया था। तब से मोदी मोदी समय का इंतज़ार कर रहे थे। जब लोकसभा का चुनाव घोषणा होने के बाद शनिवार को 'मैं भी चौकीदार' का अभियान सोशल मीडिया पर कैपनिग शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में यह ट्विटर पर पहले नम्बर पर ट्रेंड करने लगा। उन्होंने ट्विटर हैंडल पर अपना नाम भी बदलकर 'चौकीदार नरेंद्रमोदी' कर दिया। इस पूरे अभियान में उन्होंने कहीं भी राहुल गांधी का नाम तक नहीं लिया। देश के लोगों से कहा कि वे अपने आस पास गंदगी, अन्याय और दूसरी सामाजिक बुराइयों को रोकने के लिए चौकीदार बनें।

पिछले लोकसभा चुनाव २०१४ में 'चायवालामुद्दा बना तो इस बार 'मैं भी चौकीदार को मुद्दा बनाने की मुहिम शुरु हो गई है। यह नरेन्द्र मोदी की बिशेषता है कि वे चुनाव के मुख्य धारा में रहते है। जैसे की पिछले लोकसभा चुनाव के पूर्व मणिशंकर अय्यर ने एक चाय वाला कैसे प्रधानमंत्री बन सकता है। मोदी ने आम लोगों को इस बात से जोड़ दिया की मै बचपन में बडनगर स्टेशन पर चाय बेचता था। यह बात आम जनता से जुड़ा हुआ मुद्दा था। हर गली मोहल्ला, नुक्कड़, चाय के ठेले पर चाय पर चर्चा की अभियान की चलाकर जन मुद्दा बना दिया था। भाजपा ने भारी मतों से लोकसभा में बहुमत प्राप्त किया था। फिर से मोदी ने 'मैं भी चौकीदार के नाम से अभियान शुरू किया, आम लोगों को जोड़ने की कोशिश किया जिसे जनता ने हाथों हाथ ले लिया#MainBhiChowkidar के साथ #WeWantChowkidar  ट्विटर पर ट्रेड कर रहा है। मोदी जी अपने ट्विटर हेंडल पर ChowkidarNarendraModi लिख दिया। बाद में एक करोडों लोगों ने अपने नाम के आगे चौकीदार लिख लिया है। मोदी के वीडियो को एक करोड़ लोगों ने देखा है। बच्चों, जवान, महिलाएं आदि लोगों ने मैं भी चौकीदार के नाम के साथ वीडियो बनाकर शेयर कर रहे है। इनमें कुछ वीडियो को मोदी ने अपने ट्विटर हेंडल से शेयर किया है। एक तरह से 'मैं भी चौकीदार मोदी जी के द्वारा एक मुद्दाके साथ जन आंदोलन बना दिया गया है

रविवार, 17 मार्च 2019

लखनऊ गेस्टहाउस कांड, बीजेपी के ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने मायावती बचाई थी लांज


6 दिसंबर 1992 में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद उत्तरप्रदेश में कल्याण सिंह सहित 5 राज्य के भाजपा सरकार को केंद्र सरकार ने बर्खास्त कर दिया गया। उसी समय जनता दल से नाता तोड़कर मुलायम सिंह ने अपनी नई पार्टी समाजवादी पार्टी बनाई और बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए दोनो ने गठबंधन किया। इस गठबंधन ने 1993 के पांच राज्यों के चुनाव में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को 110 सीटें और बीएसपी को 67 सीटें मिली थीं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बीएसपी और अन्य कुछ दलों के सहयोग से सरकार बनाई। जिसमें मुलायम सिंह उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन बीएसपी ने मुलायम सरकार को सिर्फ बाहर से समर्थन दिया था। 

गठबंधन में आई खटास 
बहुजन समाज पार्टी के प्रमुख नेता काशीराम का आरोप लगाया था कि दीनानाथ भास्कर बीएसपी के विधायकों को तोड़ने प्रयास कर रहे है। बीएसपी सुप्रीमो ने मुलायम सिंह यादव को कहा कि दीनानाथ भास्कर को पार्टी और मंत्रीमंडल से हटाये। बसपा सुप्रीमो काशीराम मुलायम सिंह को चेतावनी दिया, लेकिन मुलायम सिंह नहीं माने। दो साल के भीतर ही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रिश्ते इतने खराब हो गए, कि गठबंधन टूटने की नौबत आ गई। समाजवादी पार्टी को भनक लग गई थी कि बीएसपी ने मुलायम सरकार से समर्थन वापस लेने का मन बना चुकी है। तब ....
 
2 जून 1995 का वह दिन बीएसपी प्रमुख कांशीराम के कहने पर पार्टी की प्रमुख नेता मायावती ने पार्टी के विधायकों की बैठक बुलाई। लखनऊ के गेस्ट हाउस में मायावती अपने विधायकों के साथ गठबंधन तोड़ने पर चर्चा कर रही थी। शाम का समय था, करीब 200 की संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और विधायकों ने गेस्ट हाउस पर हमला बोल दिया। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बीएसपी के विधायकों के साथ मारपीट शुरू कर दी। वहां मौजूद बीएसपी कार्यकर्ताओं के कहने पर मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर दिया। कुछ देर में भीड़ मायावती के कमरे तक पहुंच गई और दरवाजा तोड़ने की कोशिश करने लगी। इस दौरान समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मायावती को गालियां और जातिसूचक शब्द भी बोले। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस दौरान मायावती के साथ बदसलूकी का भी प्रयास किया। 

उसी समय हीरो बनाकर बीजेपी के ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन ने सैकड़ो कार्यकर्ताओं के साथ लाठी लेकर मायावती की जान बचाने के लिए गेस्टहाउस पहुचे थे। जिसका परिणाम यह हुआ कि मायावती की इज्जत और जान बच पाई। बीजेपी के ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन  ने मायावती को बचाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। गेस्टहाउस कांड के समय लखनऊ के तत्काली एसपी ओपी सिंह को कांड के दो दिन बाद ही उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके कुछ देर बाद एसपी और डीएम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मायावती की जान बचाई।

बीजेपी ने किया माया का समर्थन 
बीएसपी ने समाजवादी पार्टी से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया और मुलायम सरकार बर्खास्त हो गई। इसके बाद बीजेपी ने मायावती को समर्थन का ऐलान किया और गेस्ट हाउस कांड के अगले ही दिन (3 जून 1995) मायावती ने यूपी के सीएम पद की शपथ ली। भाजपा और बसपा के साथ मिलकर पहली बार एक दलित महिला सुश्री मायावती उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री बनी। उसके बाद समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ छोड़ कर दिल्ली में डेरा जमा रखा था। जिन लोगों समाजवादी का गेस्टहाउस कांड में हाथ था वे सारे उत्तरप्रदेश से पलायन करना पड़ा।

आज 26 वर्ष बाद अखिलेश सिंह यादव तथा मायावती के बीच में लोकसभा 2019  के लिए गठबंधन हो चूका है। यह घटना मेरे सस्मरण में रहा है, तत्कालीन समय में उत्तरप्रदेश में था। कई बार मुलायम सिंह यादव और मायावती के बीच सुलह की कोशिश की गई। लेकिन मायावती ने नहीं स्वीकार किया था। अब मोदी लहर से जनता के बीच अपने अस्तित्व के लिए यह दोनों गठबंधन हुआ है।   

शनिवार, 16 मार्च 2019

न्यूजीलैंड की शांतिप्रिय धरती पर आंतक

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में एक व्यक्ति ने रायफल से हमला कर 50 लोगों कि मौत के घाट उतर दिया। न्यूजीलैंड के पुलिस कमिश्नर माइक बुश ने कहा कि हमले में 50 लोगों की मौत हो गई है। करीब 48 लोग गोली लगने से घायल हैं, जिनका इलाज क्राइस्टचर्च हॉस्पिटल में किया जा रहा है। वह हमलावर जनता था, कि शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ने के लिए सब लोग मस्जिद एकत्रित होते है। सबसे बुरी बात यह है कि वह हमला किया है, तब से फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमिंग भी करता रहा, जिसे फेसबुक ने हटा दिया है। यह एक प्रकार का आतंकी घटना है। इस घटना का मैं दुःख व्यक्त करता हूँ। न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च के 2 मस्जिदों में हुए, इस कि घटना से मानवता के लिए खतरा मंडराने लगा है।


दुसरे दिन न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिद में भारी खूनखराबे के पीछे की कहानी साफ हो गई कि, हमलावर ने मुसलमानों से बदला लेना चाहता था। इसलिए न्यूजीलैंड जैसे बहुत ही शांतिप्रिय देश को चुना है। यहां तक स्थानीय पुलिस के पास भी गन नहीं होती है। अमेरिका से ठीक उल्टा यहां से फायरिंग की घटनाएँ बिल्कुल नहीं होती हैं। इसलिए न्यूजीलैंड के पुलिस अफसर भी गन कम ही रखते हैं।


बाद में जाँच में पता चला कि वह ऑस्ट्रेलिया का 28 वर्षीय नागरिक ब्रेंटन टैरंट है। इसने गोलीबारी से पहले मैनिफेस्टो में लिखा था कि उसे प्रवासियों से सख्त नफरत है। यूरोप में मुसलमानों द्वारा किए गए हमलों से वह काफी गुस्से में था, इसलिए बदला लेना चाहता था। ऐसा कर वह डर का माहौल पैदा करना चाहता था। इस घटना पर एक दिया जा रहा जिससे इस्लामोफोबिया का नाम दिया जा रहा है। दुनिया में चर्चा का बिषय चल पड़ा है कि इस्लामोफोबिया पर।   

मंगलवार, 12 मार्च 2019

भारत की इंडियन एयरलाइंस प्लेन IC 814 हाईजैक की कहानी, काठमांडू से कंधार तक


24 दिसंबर 1999 को पूरे विश्व में ईसाईंयों का त्यौहार क्रिसमस या ’’ बड़ादिन ’’ मनाया जा रहा था। 20 वर्ष पूर्व इसी दिन भारत का प्लेन IC 814 को हाईजैक किया गया था। यह इंडियन एयरलाइंस के प्लेन था जिसमें 176 यात्री सवार थे। जिन्हें छुड़ाने के लिए भारत सरकार से कश्मीर के जेल में तीन खतरनाक आंतकियों को छोड़ना पड़ा था। उसमें मौलाना मसूद अजहर जिसने जैस ए मोहमद नामक आतंकी संगठन बनाकर मुंबई आतंकी हमला, संसद पर हमला, उरी घटना तथा पुलवामा घटना का जिम्मेदारी लेने वाला आतंकी संगठन है। इनके आतंकी कैप पर एयरफ़ोर्स ने मिराज से पाकिस्तान के बालाकोट एयरस्ट्रिक किया गया है। कंधार की घटना का दुष्परिणाम आज भी पूरा भारत भुगत रहा है   
 
24 दिसंबर, 1999 को शुक्रवार के शाम 05:30 नेपाल की राजधानी काठमांडू से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइंस का विमान IC-814 को पाकिस्तान की आतंकवादी संगठन हरकत उल मुजाहिद्दीन के आतंकवादियों प्लेन हाइजैक कर लिया था।हम सभी को शाम तक टी वी के द्वारा पता चला था, कि भारतीय विमान इंडियन एयरलाइंस का विमान IC-814 हाइजैक हो गया है। जिसे पहले पाकिस्तान के लाहौर एअरपोर्ट पर लैंडिंग किया जाना था। लेकिन ईंधन कि कमी के कारण अमृतसर में पायलट ने उतारा था। अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि भारत सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर उचित कार्यवाही नहीं करने के कारण अपहरणकर्ताओं ने प्लेन को पाकिस्तान के लाहौर एअरपोर्ट पर लैंडिंग किया था। उस समय पाकिस्तान ने भी अपेक्षित सहयोग नहीं किया था। तब इंडियन एयरलाइंस का विमान आईसी-814 को दुबई में उतारा गया जहा पर 27 महिलाओं और बच्चों को छोड़कर अफगानिस्तान के कंधार एअरपोर्ट पर लैंडिंग किया था। दुबई में प्लेन में 176 यात्री में से रूपिन कात्याल नाम के एक यात्री ( जिनकी तुरंत विवाह हुआ था ) को आतंकियों ने हत्या कर दिया तथा कई यात्री घायल हो गए थे।

उस समय अफगानिस्तान में मुस्लिम आतंकी तालिबान का शासनकाल हुआ करता था। कंधार में विमान के उतरने के बाद तालिबानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने की एक कोशिश में भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने और अपहर्ताओं एवं भारत सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की सहमति दे दी। 

भारतीय सेना के कमाडो द्वारा उचित कार्यवाही न हो, इसके लिए तालिबान को पाकिस्तान की ISI ने हथियार दिए थे। अफगानिस्तान के आतंकी तालिबान के लडके सशस्त्र लड़ाकों को अपहृत विमान के पास तैनात कर दिया। अपहरण का यह सिलसिला दिनों तक चला और 31 दिसंबर 1999 को भारत द्वारा तीन इस्लामी खूंखार आतंकवादियों - मुश्ताक अहमद जरगरअहमद उमर सईद शेख (जिसे बाद में अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या के लिए गिरफ्तार कर लिया गया) और मौलाना मसूद अजहर ( जिसने बाद में जैश-ए-मुहम्मद की स्थापना की) को रिहा करने के बाद खत्म हुआ। 

हमारे देश के लिए दुर्भाग्य है कि आज तक जनता में राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण नहीं कर पाये। सत्ता के लिए तत्कालीन विपक्ष और मीडियाकर्मियों ने नकारात्मक भूमिका निभाई। मीडिया ने अपहृत परिवारों को उसकाकर प्रधानमंत्री आवास का घेराव करवाया, साथ ही इसे लाइव टेलीकास्ट किया गया था, कि भारत किसी भी कीमत पर अपाहत किये गए लोगों को छुड़ाया जाये। इस घटना का परिणाम आज पूरा देश भुगत रहा है। यदि देश कि जनता ने सरकार पर यह दवाब बनाया होता कि किसी भी परिस्थिति में आतंकियों को नही छोड़ा जाना चाहिए, तो आज स्थिति कुछ और होती।


शनिवार, 1 जुलाई 2017

गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स, यानी जीएसटी - टैक्स सुधार की नई व्यवस्था


स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कर सुधार कहा जा रहा - गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स, यानी जीएसटी - शनिवार, 1 जुलाई, 2017 से लागू हो गया। शुक्रवार मध्यरात्रि को संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घंटा बजाकर इसे लॉन्च किया। देश और राज्यों में फिलहाल लागू लगभग दर्जनभर अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों का स्थान खत्म जीएसटी लागू हो गया। सरकार का कहना है कि इससे 'एक देश, एक बाज़ार, एक कर' व्यवस्था को लागू हो गया असली तो इसे अमली जामा पहनना है ।

वैसे भी मैं कोई अर्थशास्त्री तो नही हुँ। लेकिन अर्थव्यवस्था के बारे में थोडा बहुत समझता हूं समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जो बेईमानी से पैसा ( धन ) कमाता है। उस कमाई पर टैक्स नहीं देता है और अधिकारी कर्मचारियों और समाज को भी बेईमान बनता है। कहा जाये कि काला धन पैदा करने वाला होता है। जब भी हम बाजार से सामान खरीदते हैं वे हम सभी से वैट भी वसूल लेता है। जब सरकार को टैक्स देनी होती है तो वह अपनी कमाई कम बताकर काले धन को छुपाने के लिए अन्य लोगों धन देकर चोरी करने के लिए प्रेरित करता है। देश में बेईमानों की संख्या बढ़ाने वाले लोग भी यही टैक्स चोर है। आप किसी भी शहर में देखे मकान, गाड़ी, मॉल, होटल, विदेश यात्रा और लग्जरियस संपत्ति बहुत दिखाई देती है लेकिन अपनी कमाई से देश चलाने के लिए टैक्स देने वाले की संख्या काफी कम है। जब भी जीएसटी का विरोध करता हुआ दिखे तो समझ लेना चाहिए कि मोदी सरकार ने नोटबंदी के बाद जीएसटी लागू कर काली कमाई पर बड़ा प्रहार किया है। यही सभी लोग विरोध कर रहे है कहना यही है कि आम लोगों पर बोझ डाला जा रहा है।लेकिन आम व्यक्ति जो भी सामान खरीदता है तो टैक्स भी देता है वैट भी देता है। सामान्य व्यक्ति मूर्ख नही है इसलिए जीएसटी का विरोध नही कर रहा वह समझ रहा कि आने वाले समय के लिए फायदा होगा।
पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जीएसटी की ओर कदम उठाया था। लगभग 14 वर्षो के अथक परिश्रम के बाद इसे लागू किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सभी के प्रयास परिश्रम से लागू किया गया है।

सोमवार, 29 मई 2017

कांग्रेसियों ने मोदी सरकार के विरोध करने के लिए गौहत्या शुरू की -


केरल के युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीती शनिवार 27 मई, 2017 को कन्नूर में सार्वजनिक गोहत्या कर गौमांस खाने का पार्टी आयोजन किया। कांग्रेसियों की यह कृत्य जिसकी चारों तरफ आलोचना हो रही है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने नए नियम के तहत देश के किसी भी पशु बाजार में कत्लखाने के लिए मवेशियों की खरीद बिक्री पर रोक लगा दिया है। केंद्र सरकार गौमांस तथा तस्करी को रोकने के लिए हो सकता किया है। क्योंकि गाय हजारों वर्षों से हिंदुओं मान्यताओं में पूजनीय माना जाता है। गाय पशु नही बल्कि हमारे अर्थ व्यवस्था का अंग रहा है। गाय जन्म से लेकर अपनी मौत तक दुध, गोबर, मूत्र तथा मृत्यु के बाद भी मानव के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसलिए गाय को एक पशु नही, एक माता के रूप में मान्यता है। लेकिन भारत में मुगलों के आगमन के बाद हिंदुओं की धर्मान्तरण के गौहत्या कर मांस भक्षण शुरू हुआ। इसके पूर्व धार्मिक भावना के कारण गौ हत्या अपराध ही माना जाता रहा है।

ऐसा लग रहा है कि मोदी सरकार की लोकप्रियता से विपक्ष इतना डरा हुआ है कि विरोध करने के लिए कांग्रेस ने वह किया जिसका चारों तरफ विरोध किया जा रहा है। केरल पुलिस ने गो हत्या और इसकी ब्रिकी करने वाले 16 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। कन्नूर में  गो हत्या कर बीफ खाने की पार्टी आयोजन किया और इसके मीट को आसपास के लोगों में बांटा। पुलिस ने मामले में जानकारी देते हुए बताया कि जिस जानवर का वध किया गया उसे एक टेंपो में लादकर लाया गया था जो कि नियम का उल्लंघन है।

कांग्रेस ने पहले तो कहा कि वे पार्टी से जुड़े लोग नही है। लेकिन भाजपा नेता के द्वारा जारी किया गया वीडियो है जिसमें वहाँ के युवा कांग्रेस के लोग झंडे और नारेबाजी करते हुए दिख रहे हैं। चारों तरफ से विरोध के बाद कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाल दिया है। इससे कांग्रेस उपाध्य राहुल गांधी ने इसकी निंदा की है। उनके ट्विटर के जरिए घटना पर अपना विरोध जताया। राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा, ‘कल केरल में जो भी हुआ उसका उसे मैं बिल्कुल भी स्वीकार नहीं सकता और ना ही कांग्रेस पार्टी इसे स्वीकारती है। मैं इस घटना का पुरजोर विरोध करता हूं।ये ट्वीट कांग्रेस उपाध्यक्ष ने 28 मई (2017) को किया था। लेकिन बहुसंख्यकों में गौ हत्या पर कांग्रेसियों कों दोषी मान रहा है। कांग्रेस ने गाय नहीं काटी बल्कि 100 करोड़ हिन्दुओं को चुनौती दी है, 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं को भड़काने का काम किया है

केंद्र सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार पशु (गाय, बैल, भैंस, ऊंट) को बाजार में लाकर इनकी हत्या किए जाने के इरादे खरीद ब्रिकी पर रोक लगा दी है। 23 मार्च को जारी की गई अधिसूचना के अनुसार धार्मिक उद्देश्यों के लिए जानवरों की हत्या किए जाने पर रोक लगाई गई है।


शनिवार, 21 जनवरी 2017

चरखा चलाने का अधिकार गांधी को है क्या ?








भारत के सोशल मीडिया पर खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के कैलेंडर पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर की काफी चर्चा हुई । सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसकी आलोचना की और कहा कि मोदी ने बापू की जगह ले ली । लेकिन चरखा चलाने का अधिकार गांधी को ही है। यदि देश का प्रधानमंत्री चरखा चलाकर देश के नागरिकों को आह्वान करता है। पुरे देश में खादी की मांग 35 % बढ़ जाती है। उस व्यक्ति का चित्र वह विभाग अपने कैलेंडर पर लगता है तो कुछ कांग्रेसियो के पेट में दर्द होना स्वभाविक है। लेकिन महात्मा गांधी पर उनका अधिकार नही है अधिकार भी देश की जनता का है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आदरणीय महात्मा गांधी को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता है और ना केवल और खादी ग्राम उद्योग के अभी तो भारतवर्ष के हम सब की आत्मा महात्मा गांधी हैं।


इसके पूर्व में 'खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग' के कैलेंडर पर गांधी की ही तस्वीर होनी चाहिए, उन्हें ये जानना चाहिए कि ऐसा कोई नियम नहीं है। इसलिए किसी नियम का उल्लघंन नहीं हुआ हैं। गांधी जी खादी ग्रामोद्योग की आत्मा हैं उनके दर्शन के अनुसार ही वहां काम होता है। साल 1996, 2002, 2005, 2011, 2012 और 2013 में विभाग ने कैलेंडर पर महात्मा गांधी की तस्वीर नहीं थी। वहीं खादी ग्राम उद्योग के चेयरमैन ने भी कहा है कि ये तस्वीर 2016 के खादी ग्राम उद्योग में से ली गई है, जहां पर पीएम ने 500 महिलाओं को चरखे दिए थे। भाजपा प्रवक्ता  बोले कि मोदी जी ने नारा दिया था कि खादी मतलब भारत और भारत मतलब खादी। भाजपा ने कहा कि एक पॉलिटिकल पार्टी ऐसी है जिन्होंने गांधी के नाम का इस्तेमाल कर शासन किया जब कि उनका गांधी से कोई लेना देना नहीं है। वे गांधीजी के नाम का दुरुपयोग करते रहे हैं और उनके नाम का राजनीतिकरण किया है। हमने तो गांधी जी के दर्शन को आगे बढ़ाया है।