सोमवार, 15 मार्च 2021

बाटला हाउस एनकाउंटर मामला

'बाटला हाउस एनकाउंटरमामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी आरिज खान को मौत की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने सोमवार को 22 पन्नों में आरिज खान की मौत का सजा लिखा। उन्होंने अपने आदेश में कहादोषी ने अपने घृणित कृत्यों से अपने जीने के अधिकार को खो दिया है। मामले में अपराध को गंभीर बनाने वाली परिस्थितियों के साथ उसे कम बताने वाली परिस्थितियों की आपस में तुलना करने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस है, जहां दोषी कानून के तहत मौजूद अधिकतम सजा पाने के लायक है। आरिज खान उर्फ जुनैद ने अपने घृणित कृत्यों से जीने के अधिकार को खो दिया है। उसे तब तक फांसी पर लटकाकर रखा जाए, जब तक वह मर न जाए। इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी में अदालत को न तो सुधार की कोई संभावना दिखी और न उसके जीने से समाज की बेहतरी। दोषी का बिना किसी उकसावे के पुलिस पार्टी पर गोली चलाने से जुड़ा घृणित और क्रूर कृत्य अपने आप दिखाता है कि वह केवल समाज के लिए खतरा नहीं, बल्कि राज्य का भी दुश्मन है। दोषी का दिल्ली समेत देश के विभिन्न राज्यों में हुए बम धमाकों में शामिल होना, जिसमें हजारों बेकसूर लोगों की मौत हो गई और कई जख्मी हो गए, दर्शाता है कि वह समाज और राष्ट्र के लिए खतरा बना रहेगा।

2008 में हुए बाटला हाउस एनकाउंटर केस के बाद से ही आरिज खान और जुबैद फरार हो गया था। तब दिल्ली पुलिस ने दो आतंकियों के भागने का दावा भी किया था। दूसरा आतंकी जुबैद भारत से भाग कर ISIS में शामिल हो गया जिसने कई TV चैनलों में इन्टरव्यू में कहा की वह भी बाटला हाउस एनकाउंटर में शामिल था। इनमें से आरिज खान को 2018 में नेपाल से गिरफ्तार किया गया था। आतंकी आरिज खान को बाटला हाउस एनकाउंटर में जान गंवाने वाले इंस्पेक्टर मोहन शर्मा की हत्या, धारा 302, 307 और आर्म्स एक्ट में दोषी पाया है। 

दिल्ली के जामिया नगर का बाटला हाउस वह इलाका जो एक संकरी गली में एल-18 मकान की 65 सीढ़ियां चढ़ने के बाद तीसरे फ्लोर पर वो फ्लैट है, जहां 19 सितंबर 2008 की सुबह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों के बीच एनकाउंटर हुआ था। उससे ठीक एक हफ्ता पहले 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में 5 जगहों पर सीरियल ब्लास्ट हुए थे जिसमें कुल 39 लोग मारे गए थे और 159 लोग जख्मी हुए थे। इस केस के जाँच करने में स्पेशल सेल के ATC संजीव कुमार यादव ने कहा कि इस एनकाउंटर पर उठे सवालों ने न सिर्फ पुलिस का मनोबल गिराया बल्कि इस आतंकवादी संगठन के खिलाफ पुलिस की जांच के भटकने का खतरा भी पैदा किया। दिल्ली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों ने राजनीतिक दबाव को स्पेशल सेल के ऊपर नहीं पड़ने दिया हमने इंडियन मुजाहिदीन नेक्सस को तोड़ दिया, इसके बाद इस प्रकार की आतंकिय घटना दुबारा नहीं हुआ 

इस बाटला हाउस इनकाउंटर के बाद देश की कांग्रेस पार्टी की सुपर प्रधान श्रीमती सोनिया गांधी जी को रात भर नींद नहीं आई। इस इनकाउंटर को फर्जी कहा था। समाजवादी नेता अमर सिंह और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने जामियानगर में एक मंच से कहा कि बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी है इसकी न्यायिक जांच की मांग की, अगर वे झूठी साबित हुईं तो वो राजनीति करना छोड़ देंगी। इस मामले में सलमान खुर्शीद, दिग्विजय सिंह के विवादित बयान सुने हैं। बाटला हाउस एनकाउंटर पर फैसला आने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सोनिया जी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और दिग्विजय सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। एक तरह से उन्होंने आतंकियों का पक्ष लिया था। उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। 

उस समय कांग्रेस पार्टी की मनमोहन सिंह की सरकार थी। इस इनकाउंटर में अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर बहुत राजनीति हुई है। मानवाधिकार संगठनों ने खास समुदाय के लोगों को टारगेट करने पर दिल्ली पुलिस को कटघरे में खड़ा किया था। लेकिन दिल्ली पुलिस ने सही दिशा में जाँच कर अपराधियों को सजा तक पहुँचाया। आप समझ सकते हैं कि दिल्ली पुलिस में कितने दबाव में होने के बाद में देशद्रोह को फाँसी की सजा तक पहुँचाया। 

दिल्ली पुलिस को सह्रदय से बधाई ....

अशोक चक्र से सम्मानित शहीद मोहनचन्द्र शर्मा नमन ..... 

 

 

 

 

 

 


शुक्रवार, 12 मार्च 2021

नमक सत्याग्रह या दांडी यात्रा से अमृत महोत्सव

नमक सत्याग्रह या दांडी मार्च भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इस आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को 78 सत्याग्रहियों के साथ अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से नवसारी जिले के दांडी गांव के लिए पैदल कूच किया था। अंग्रेजों के नमक कानून के विरोध में गांधीजी ने दांडी मार्च कर 6 अप्रैल 1930 को सांकेतिक रूप से नमक बनाकर अंग्रेजी कानून को तोड़ा था, जिसके बाद उन्हें सत्याग्रहियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था। इस आंदोलन ने अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी।

1929 के कांग्रेस की लौहार अधिवेशन में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया जिसमें जवाहरलाल नेहरू को अध्यक्ष बनाकर तथा दूसरा पूर्ण स्वराज ( पूर्ण स्वतंत्रता) की घोषणा की गई। 26 जनवरी 1930 को भारत के सभी प्रमुख स्थानों में राष्ट्रीय ध्वजारोहण कर देशभक्ति की गीत गाकर स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इसी समय गाँधी जी ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ नमक सत्याग्रह की घोषणा की। यह कानून भारतीयों को मूल्य से 14 गुना अधिक कीमत पर बेचा जाता था। इस आंदोलन को लेकर गाँधी जी ने तत्कालीन वायसराय इर्विन को पत्र लिखकर सूचित किया। कहा कि भारत के सवार्धिक घृणित कानूनों में से एक है नमक का कानून इसे जल्द समाप्त किया जाये। प्रत्येक भारतीय के घर में नमक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की जनता के भावना के अनुरूप बड़ा आंदोलन बन गया। 6 अप्रैल 1930 को वे दांडी पहुँच कर मुठ्ठी भर नमक उठाकर नमक कानून को तोड़ कर अंग्रेजों को ललकारा दिया। यही से सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई।

नमक सत्याग्रह के स्मृति में केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2021 से 15 अगस्त 2022 तक 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' मनाने की घोषणा की है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह के 91 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में अमृत महोत्सव की शुरुआत करते हुए इसकी वेबसाइट लॉन्च की। उन्होंने दांडी मार्च यात्रा को भी हरी झंडी दिखाई। इस यात्रा में शामिल 81 लोग 386 किमी की यात्रा कर 5 अप्रैल को दांडी पहुंचेंगे।




QUAD देशों की पहला शिखर सम्मलेन, चीन को घबराहट

QUAD (Quadrilateral Security Dialogue)  भारतजापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच शिखर समेल्लन हो रहा है, जो इन देशों के बीच इंडो पेसेफिक में आपसी सहयोग का एक समझौता है। यह 2007 में हिंद प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते दादागिरी को देखते हुए जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने ऐसे संगठन का प्रस्ताव दिया, जिसमें इस हिंदमहासागर और प्रशांत महासागर के समुद्री क्षेत्र में ताकतवर देश जिसमें भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हो सके। जिसमें इस क्षेत्र में शान्ति, स्थिरता, सुरक्षित और मिलकर समृद्ध बनाने के लिए मिलकर काम करे। 

इस हिन्दपैसिफिक मार्ग से विश्व का 70 प्रतिशत व्यापार होता है। इसका फायदा चीन उठाने का कोशिश कर रहा है साऊथ चाइना शी में इस क्षेत्र में लगाने वाले देशों को चीन परेशान कर रहा है इससे प्रभावित देश जापान, वियतनाम, इंडोनेशिया, पिलिपिन्स, आदि देश की सीमा पर अपना क्षेत्र बताकर कब्ज़ा करने की कई बार कोशिश कर चूका है साऊथ चाइना शी में कृतिम टापू बना चूका है आये दिन मछली पकड़ने वाले जहाजों को चीन समुद्र में डूबा देता है चीन के इस विस्तारवादी नीतियों के कारण जापान सहित ताइवान समेत कई देश परेशान हो चूका है अतत हिंद प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते दादागिरी को देखते हुए जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने ऐसे संगठन का प्रस्ताव दिया लेकिन पिछले कुछ वर्षो में इनके बीच में इस ग्रुप में कोई खास गतिविधि नहीं थी। जापान चाहता था की भारत इसमें अपनी बड़ी भूमिका निभाए, ऐसा नहीं हुआ क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसमें खास रुचि नहीं दिखाए। इसका कारण यह है कि उस समय लेफ्ट पार्टियों की मनमोहन सरकार में गठबंधन था। वे नही चाहते थे कि भारत सरकार को बड़ी काम चीन के खिलाफ करें। 2017 में अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की नई सरकार बनी। उन्होंने ने अमेरिका फर्स्ट का अभियान चलाया जो चीन को चुभ गया और आखिरी में ट्रंप प्रशासन और चीन के बीच बढ़ते टकराव ने नई समीकरण बनना शुरू हुआ। जिसके कारण अमेरिका की ओर से इस ग्रुप को फिर से जीवित किया गया। इसकी पहले विदेश मंत्रियों की बैठक हो चुकी है। 2019 में चीन से फैले कोरोना के चलते 2020 में इन देशों के नेताओं की बैठक नहीं हो सकी थी।

ट्रंप प्रशासन और चीन के बीच बढ़ते टकराव के कारण अमेरिका की ओर से इस ग्रुप को फिर से जीवित किया गया। इससे पहले क्वाड देशों के विदेश मंत्री मिल चुके हैं लेकिन पहली बार QUAD के सभी देशों के नेता मिलेंगे। कोरोना काल में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का यह गठबंधन क्वाड पहला शिखर सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है। वैक्सीन के साथ ही साथ हिंद- प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की दिशा में भी प्रयास होगा।

इस समूह के गठन के बाद से ही चीन चिढ़ा हुआ है और लगातार इसका विरोध कर रहा है। लद्दाख में चल रहे सैन्‍य तनाव के बीच चीन का सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स भारत को लगातार धमकी दे रहा है। साथ ही नसीहत दे रहा है कि भारत क्‍वॉड से दूर रहे और गुटन‍िरपेक्षता की अपनी नीति का पालन करे।

 


गुरुवार, 11 मार्च 2021

बंगाल के सत्ता परिवर्तन के केंद्र-नंदीग्राम

2021 में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। इन विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल का चर्चा ज्यादा हो रहा है। विधानसभा चुनाव से चंद माह पहले एक बार फिर बंगाल की राजनीति में नंदीग्रामसुर्खियों में है। पिछले तीन दशकों की राजनीति में 2007 की नंदीग्राम आंदोलन को हथियार बना कर ही वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2011 में  लेफ्ट पार्टी को अपदस्थ करने में सफलता पाई थी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पूर्व मंत्री नंदीग्राम आंदोलन के नायक रहे शुभेंदु अधिकारी के टीएमसी छोड़ कर बीजेपी में शामिल होने के बाद लगातार नंदीग्राम की चर्चा में है। नंदीग्राम के लिए टीएमसी और बीजेपी में लगातार संघर्ष की घटनाएं हो रही हैं और वहां से लगातार झड़पें की खबरें आ रही हैं। 

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में नंदीग्राम का एक महत्वपूर्ण स्थान है। स्वतंत्रता के पहले भी नंदीग्राम ने अपने उग्र आंदोलन के कारण ब्रिटिश शासन को झुकाने में सफल रहा था. 1947 में देश की स्वतंत्रता से पहले, “तामलुकको अजय मुखर्जी, सुशील कुमार धारा, सतीश चन्द्र सामंत और उनके मित्रों ने नंदीग्राम के निवासियों की सहायता से अंग्रेजों से कुछ दिनों के लिए मुक्त कराया था और ब्रिटिश शासन से इस क्षेत्र को मुक्त करा लिया था। भारत का यही एकमात्र क्षेत्र है, जिसे दो बार स्वतंत्रता मिली है।

1975 आपातकाल के बाद कम्युनिस्ट के पास पश्चिम बंगाल की सत्ता कांग्रेस से छीन लिया था 

लेकिन तब तक बंगाल से उघोगपति बाहर जा चुके थे। कम्युनिस्ट का जन्म ही पूजीपतियों के विरुद्ध हुआ है। 1968 नक्सलवादी से निकले नक्सलियों ने बंगाल को हिंसा आंदोलन, धरना, प्रदर्शन, मिलों और कारखानों में हड़ताल कर उघोगों को बंगाल से बाहर अन्य राज्यों में जाने के लिए मजबूर कर दिया। बंगाल में कुछ समय बाद चीनी माओवादियों के अनुसार बंदूक की नोंक से सत्ता प्राप्त करने की प्रयोग सफल होने के बाद, यह अन्य राज्यों में शुरू की, लेकिन सफलता नही मिली। 1999 में बंगाल में परिवर्तन की लहर दौड़ पड़ी ज्योति बसु ने समझदारी दिखाते हुए बुद्धदेव भट्टाचार्य को नया मुख्यमंत्री का पद दिया। बेहाल बंगाल को फिर संवृद्धि बनाने के लिए उघोगपतियों को राज्य में निवेश करने के लिए बुलाया। लेकिन हड़ताल, बंद, लेवी, मजदूर यूनियन के कारण कोई भी नहीं आया। 

2007 में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने SEZ तहत स्पेशल इकोनॉमिक्स जोन जिसे आर्थिक गलियारा बनाकर काम शुरू करने की कोशिश की लेकिन 25 वर्षो से उघोगों का विरोध करना मँहगा पड़ा लेफ्ट सरकार को। पश्चिम बंगाल की लेफ्ट सरकार ने स्पेशल इकनॉमिक जोननीति के तहत नंदीग्राम में एक केमिकल हब की स्थापना करने की अनुमति प्रदान करने का फैसला किया था। राज्य सरकार की योजना को लेकर उठे विवाद के कारण विपक्ष की पार्टियों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आवाज उठाई। टीएमसी, SUCI,जमात उलेमा-ए-हिंद और कांग्रेस के सहयोग से भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमिटी (BUPC) का गठन किया गया और सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू किया गया। इस आंदोलन का नेतृत्व तत्कालीन विरोधी नेत्री ममता बनर्जी कर रही थीं और इसके नायक शुभेंदु अधिकारी थे।

सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ट नेताओं ने सभी विपक्षियों की उपेक्षा करते हुए इस आन्दोलन को औद्योगीकरण के खिलाफकरार घोषित किया और हालात तब बिगड़े जब समीप के हल्दिया के तात्कालीन एमपी लक्ष्मण सेठ के नेतृत्व में हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटीने भूमि अधिग्रहण के लिए नोटिस जारी कर दिया.।इसके परिणाम स्वरूप CPI(M) और BUPC दोनों के समर्थकों के बीच हिंसात्मक संघर्ष की घटना घटी। सत्तारूढ़ पार्टी ने अपना पिछला प्रभुत्व जमाने की कोशिश की तो उसने नाकेबंदी को हटाने और परिस्थिति को सामान्यबनाने के बहाने अपने प्रशासन को कार्यप्रवृत्त किया. 14 मार्च 2007 की रात को पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपराधियों की सहायता से राज्य पुलिस के साथ मिलकर एक जॉइंट ऑपरेशनकिया और कम से कम 14 लोगों की हत्या कर दी गई। ममता बनर्जी के नेतृत्व में कई लेखकों, कलाकारों, कवियों और शिक्षा-शास्त्रियों ने पुलिस फायरिंग का कड़ा विरोध किया, जिससे परिस्थिति पर अन्य देशों का ध्यान आकर्षित हुआ


अंततः यह आंदोलन के दौरान सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा, लेकिन इस आंदोलन का राजनीति पर असर पड़ा और ममता बनर्जी ने जनमानस में अपनी छवि बनाने में सफल रही और इसका परिणाम हुआ कि साल 2011 के विधानसभा चुनाव में लेफ्ट की 34 वर्षों के शासन को समाप्त करने में सफल रही और राज्य में मां, माटी, मानुष की सरकार की स्थापना की।


मंगलवार, 9 मार्च 2021

रोहिंग्या को वापस अपने देश म्यांमार जाना ही पड़ेगा ...


जम्मू कश्मीर प्रशासन ने जम्मू में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की बायोमेट्रिक जानकारी सहित अन्य विवरण जुटाने का काम शनिवार से शुरू कर दिया। इसके बाद जम्मू में अवैध रूप से रह रहे 168 रोहिंग्याओं को जेल भेज दिया गया है। 

जम्मू कश्मीर पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल रैंक अधिकारी मुकेश सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि जम्मू में अवैध रूप से रह रहे जिन आप्रवासियों के पास पासपोर्ट अधिनियम की धारा (3) के मुताबिक, वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे, उन्हें हीरानगर के श्होल्डिंग सेंटरश् भेजा गया है। जम्मू कश्मीर के गृह विभाग की फरवरी 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 6523 रोहिंग्या पाँच जिलों में 39 कैंप्स में रहते हैं। लेकिन एक सरकारी आकंड़ों के अनुसार रोहिंग्या मुस्लिमों और बांग्लादेशी नागरिकों समेत 13,700 विदेशी जम्मू और सांबा जिलों में रह रहे हैं। जहां 2008 से 2016 के बीच इनकी जनसंख्या में छह हजार से अधिक की वृद्धि हुई।

जब से जम्मू कश्मीर से धारा 370 समाप्त किया है और देश में NRC तथा CAA लागू किया गया है। वहाँ जम्मू कश्मीर में हिन्दू जो 1947 विभाजन के बाद जम्मू कश्मीर में बस चुके हैं लेकिन उन्हें भारत की नागरिकता नही मिली तथा अन्य राज्य से विगत 15 वर्ष या इससे पूर्व आकर रह रहे है ऐसे नागरिकों को जम्मू की नागरिकता दिया जा रहा है ऐसे में  प्रशासन अधिकारी, कर्मचारियों जो शासकीय नौकरी करने वाले या व्यवसाय करने वाले भारतीयों को भी जम्मू कश्मीर की नागरिकता दी जा रही हैं। इस सर्वे में कई स्थानों पर रोहिंग्या लोगों भी मिले जिनके पास फर्जी आधार कार्ड, पेन कार्ड,पासपोर्ट तथा वोटर आईडी कार्ड भी मिले। जिसके बाद सरकार ने घर जाँच शुरू किया गया है। तो अब तक 168 रोहिंग्या लोग मिले जिन्हें जेल भेज दिया गया है।

रोहिंग्या म्यांमार के बांग्लाभाषी मुसलमान हैं। जो कि दुनिया के सबसे खतरनाक मुस्लिम समुदाय है। जिन्हें बांग्लादेश भी नही अपनाना चाहता है। बांग्लादेश अपने नागरिकों को रोहिंग्या से शादी करने की अनुमति नहीं देता है जबकि दोनों समुदाय मुसलमान है रोहिंग्या समुदाय को अन्य मुस्लिम देश भी नही अपनायते है। क्योंकि ये आपराधिक प्रवृत्ति के कारण इसे कोई भी देश नही चाहता है क्योंकि किसी भी देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरनाक माना जाता है। ये जहाँ भी रहते हैं वहाँ पर आपराधिक घटनाए बढ़ जाती हैं। ये लोग ड्रग्स माफिया, मानव तस्करी, वेश्यावृत्ति, देहव्यापार तथा आंतकियों घटनाओं में शामिल होते हैं। जहाँ भी जाते है अधिक बच्चे पैदा करते हैं। यहाँ तक की 14 तक की बच्चियों की शादी कर दी जाती है की अधिक से अधिक बच्चा पैदा कर जनसंख्या वृद्धि किया जाए। BBC की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एक बच्ची की शादी 57 साल के रोहिंग्या से किया गया, जब वह 16 साल की हुई तो उसके दो बच्चें थे। 

अब बात यह उठ रही है कि म्यांमार से चलकर हजारों की संख्या में रोहिंग्या हजारों मीलों दूर जम्मू कश्मीर में कैसे पहुँचे ? 

यह जांच का विषय होना चाहिए...




शुक्रवार, 5 मार्च 2021

सुशांत की मौत में ड्रग्स एंगल पर NCB ने रिया सहित चार्जशीट फाइल की



भारत के फिल्मी दुनिया या मुंबई फिल्मी दुनिया के एक होनहार अभिनेता सुशांत सिंह की संधिग्ध मौत ने पुरे देश को हिला दिया था। इसके बाद मुंबई फिल्मी दुनिया की काली सचाई जिसमें नशा खोरी, भाई भतीजावाद, नग्नता, हिंदुत्व और राष्ट्र विरोधी उनकी गतिविधियों देश के सामने आ गया। लोगों के भावना के अनुरूप मुंबई पुलिस ने सही दिशा में जाँच नहीं की।सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद सी बी आई ने जाँच शुरू किया। लेकिन अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया की सुशांत की हत्या या आत्महत्या। अब  सुशांत सिंह की मौत पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी नशीले पदार्थ ( Durg angle ) उपयोग सेवन करने की भी जाँच भी कर रही है।  

आज शुक्रवार को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मुंबई की NDPS कोर्ट में चार्जशीट फाइल कर दी। यह लगभग 12 हजार पेज की है जिसमे चार्जशीट में सुशांत की गर्ल फ्रेंड रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक, सुशांत के मैनेजर सैमुअल मिरांडा, दीपेश सावंत और कई ड्रग पैडलर शामिल हैं।समेत 33 आरोपियों के नाम हैं और 5 लोगों को फरार बताया गया है। इसी केस से मिले सुराग के बाद एक अन्य केस में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बॉलीवुड में कुछ नामचीन एक्ट्रेस से भी पूछताछ की है। इन दस्तावेजों में एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के बयान भी शामिल किए गए हैं। इस चार्जशीट के साथ 50 हजार पेज के डिजिटल एविडेंस भी हैं। इनमें आरोपियों के बीच हुई वॉट्सऐप चैट, उनके कॉल डेटा रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेजों समेत अन्य सबूत को भी शामिल हैं। 200 से अधिक गवाहों के बयान को भी इसमें शामिल किया गया है। 

14 जून 2020 को सुशांत सिंह  का शव उनके बांद्रा स्थित प्लैट में पंखे से लटका मिला था। मुंबई पुलिस ने प्राथमिक रिपोर्ट भी दर्ज करने से बच रही थी। मुंबई पुलिस का कहना था कि सुसाइड नोट भी नहीं मिला , सुशांत सिंह 6 महीने डिप्रेशन में था। मुंबई पुलिस ने सही दिशा में जाँच नही करने पर देश के लोगों में आक्रोश का संदेश गया हत्या या आत्महत्या। फिर सुशांत की मौत के दो महीने बाद उनके पिता ने पटना में बिहार पुलिस में केस दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि रिया चकवर्ती जहर देकर मार दिया तथा मेरे बेटे के 17 करोड़ रुपये ले ली है। पटना पुलिस के अधिकारियों को मुंबई पुलिस के द्रारा सहयोग नहीं किया। बल्कि उनके अधिकारियों को 15 दिनों के लिए क्वरटाइन कर दिया। जिसके बाद बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में मामला लेकर गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र विभाग CBI के द्वारा जाँच किया जाए। 

सुशांत सिंह की मौत पर मुंबई में हो रहे राजनीति में कुछ फोटो और वीडियो भी दिखी जिसमें नशा में दिखे। सुप्रीमकोर्ट ने यह केस  जब सीबीआई को सौंप दिया था। तो यहीं से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री इस केस में हुई और रिया के वॉट्सऐप चैट की जांच से ड्रग्स का एंगल सामने आया। ड्रग्स से जुड़ी चैट मिलने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एंट्री हुई और बॉलीवुड में चल रहे बड़े ड्रग्स का रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। देश ने देखा की किस तरह सफ़ेद पर्दे के पीछे कितना घिनौना खेल होता है देश में प्रतिभावान लोगों को कैसे पीछे कर अभिनेतायो के निक्कमे लड़के या लड़की को काम मिल जाता है लेकिन प्रतिभावान लोगों को किनारे कर दिया जाता है 

सुशांत सिंह राजपूत एक प्रतिभावान व्यक्तित्व था दिल्ली में पढाई हुई है वाही से इंजीयरिंग करने के बाद टीवी सीरियल में काम करना शुरू किया अपनी प्रतिभा के दम पर फिल्मों में काम करना शुरू किया सुशांत सिंह अपने मेहनत से मुंबई फ़िल्मी दुनिया में स्थान बनाया अब वह खत्म हो गया ......