शनिवार, 25 मई 2019

नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य था, लोकसभा चुनाव 2019 कों जीतना

जीवन को यशस्वी कैसे बनाये, इसके लिए अपना लक्ष्य खुद से बनना होता है। लोकसभा चुनाव 2014 में नरेन्द्र मोदी ने पूर्ण बहुमत से अपनी नई सरकार बनाई। उसी समय से अपना अगला लक्ष्य तय कर लिया था कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में फिर_से_मोदी_सरकार बनाना है। अपने को बड़ा करो यानी खुदी को कर बुलंद की खुदा भी पूछे बता तेरी रजा क्या है ?

पहला काम किया कि अपने विश्वनीय व्यक्ति अमित शाह को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनवाया। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पार्टी की आंतरिक मामले... तथा पार्टी के NDA गठबंधन के प्रपंच मुक्ति मिली। इससे नरेन्द्र मोदी को सरकार चलाने के लिए पर्याप्त समय, प्रशासनिक अधिकारियों पर नियंत्रण, जिससे योजनाओं को बनाने तथा कियान्वयन पर पूरा ध्यान दिया। मोदी सरकार ने जनहित की योजना बनाई और इन योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने की कोशिश हुई जैसे जनधन योजना, उज्ज्वल योजना, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना, नोटबंदी, आदि योजनाओं क्रियान्वयन करने के लिए समय मिला। परिणाम अब सबके सामने आ गया है।

अमित शाह ने पूरे देश में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बाद प्रवास बनाया। सभी प्रदेश टीम को सक्रिय कर जिला से लेकर बूथ तक टीमवर्क पुनः खड़ा करना तथा सभी पदाधिकारियों को प्रवास के दौरान, एक रात्रि विश्राम के साथ प्रवास जिसे खुद भी पालन किये। दूसरा बात की नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को पता था कि जिन राज्यों में अधिकतम सीट मिली है। 2019 के चुनाव में मुश्किल होगा। इसलिए नए राज्यों की ओर अपनी संगठन को मजबूत करना भी था। ऐसा ही योजना बनाकर पूर्वोत्तर भारत, साथ ही बंगाल, उड़ीसा, तेलंगाना, आंध्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु में फोकस किया जहां पार्टी की जनाधार काम था । 2019 के लोकसभा के चुनाव में परिणाम वैसा ही आया। अमित शाह पर कमेंट करते हुए रवीश कुमार ने अपने प्राइम टाइम में कहा कि दिल्ली के नगर निगम के परिणाम के बाद अमित शाह तमिलनाडु के तीन दिन के दौरे पर है उसके बाद तीन दिन बंगाल के दौरे करने जाने वाले है।

इसलिए मोदी ने पूरे पांच साल लगातार अपने सरकार की प्रचार मतलब की लोकसभा चुनाव 2019 की प्रचार प्रसार प्रतिदिन करते रहे। नये राजनीति के विद्यार्थियों के लिए एक नया संदेश है कि अब नेता को अपनी सरकार की योजना, पार्टी के विचार, अपनी बात प्रतिदिन प्रचार करना पड़ेगा। अब जनता नानी के घर जाने वालों को हमेशा के लिए नानी के घर भेज देगी।

शनिवार, 4 मई 2019

1999 में उड़ीसा में भयानक तूफान सुपर साइक्लोन -

आज से 22 वर्ष पूर्व 1999 में ऐसा ही तूफान उड़ीसा में आया था। इस तूफान को सुपर साइक्लोन नाम दिया गया था। उस तूफान की खौफ आज भी लोगों में है, जिन्होंने ने देखा है। भारत में 100 वर्षो में भी इतना भयानक तूफान नहीं आया था। इस तूफान ने लगभग 9,658 मारे गए 18 हजार करोड़ की सम्पति का नुकसान हुआ यह सरकारी आकड़े थे, लेकिन और भी अधिक जान माल की हानि हुआ था।

उस समय उड़ीसा में कांग्रेस की जानकी वल्लभ पटनायक की सरकार थी। उस तूफान में दस हजार लोग मारे गए थे तथा लाखों लोगों को बेघर हो पड़ा था। यहाँ तक की खेतों तालाबों में मरे हुए मानव, जीवों तथा पशुओं की लाशें तैरते हुए नजर आती थी। तूफान आने से खाने पीने की सभी पदार्थ खराब हो जाते है, यहां तक की पीने का पानी भी साफ नही मिलती है। घर मकान के छप्पर उड़ गए जिससे घर में उपयोगी सामान कपड़े लते भी खराब हो गये। इतना वीभत्स रूप में नुकसान हुआ था कि प्रलय का मंजर ही चारों तरफ दिखता था।

उस समय मोबाइल चालू ही हुआ था। लेकिन तूफान में बेकार ही था। सारे लैड लाइन फोन बेकार हो गये। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री जानकी वल्लभ पटनायक के पास एक सेटेलाइट फोन था। जिससे दिल्ली को खबर किया गया तथा केंद्र सरकार से मदद मांगी गई। लेकिन कुछ लोगों के पास प्राइवेट वारयलेस रेडियो था। जिससे मौके पर मदद तथा सूचनाएं भेजकर सहायता पहुँचाया गया था। सरकार को राहत कार्य हेतु सूचना प्राइवेट वायरलेस रेडियो ने की थी। यहाँ तक की भुवनेश्वर के तत्कालीन कलेक्टर ने अपने परिवार को पहले सुरक्षित स्थान पर पहुचा जिसकी बहुत आलोचना हुआ, बाद में राज्य सरकार ने हटा दिया था।

आज सरकार जागरूक क्योंकि #ModiHaiToMumkinHai ने गुजरात में भूकंप के कारण समझते कि जनता की कठिनाई। अपने चुनाव प्रचार को रोककर #fani के आतंक से बचने के लिए सरकार द्वारा राहत और बचाव की तैयारी की जानकारी और अधिकारियों के साथ मीटिंग कर जान माल की हानि से बचाया है। सरकारें और भी रही थी लेकिन उत्तराखंड की बारिश ने जो तबाही मचाई उसे देख है।  

यह घटना आज भी मुझे याद है-
क्योंकि राहत हेतु राशन तथा कपड़े संग्रह का कार्य उस समय रायपुर में किया था तथा संघ कार्यालय जाग्रति मंडल रायपुर से ट्रकों में भरकर भेजा जाता था।
इस बार भारत सरकार ( NDRF) और उड़ीसा सरकार ( SRC Odisha )  ने तैयारी अच्छी तरह किये कि लक्ष्य रखा जीरो केजुवलटी।
तूफान के रास्ते में आने वाले ग्रामीण और शहरी स्थानों में रहने वालों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचना तथा दवा और भोजन पानी का समुचित व्यवस्था लगभग 10 लाख लोगों कि व्यवस्था किया गया है।
एन डी आर एफ की 28 यूनिट तथा उड़ीसा राहत और बचाव दल के 20 यूनिट तथा चिकित्सा कि 302 यूनिट की तैयार रखा गया है, साथ ही सेना वायुसेना तथा तट रक्षा दल को पूरी तैयारी के साथ है।  


Post Ramashanker Pandey

मंगलवार, 19 मार्च 2019

मोदी के एक ट्वीट ने ‘मैं भी चौकीदार’ जन आंदोलन बन गया


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर मैं भी चौकीदारके नाम से सन्देश देकर आम लोगों को जोड़ने की अपील किये है। यह ट्वीट एक दिन ग्लोबल ट्रेड तथा दो दिन पूरे भारत में ट्रेड किया। आगे उन्होंने कहा कि वह भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई में अकेले नहीं हैं। ‘‘आपका चौकीदार मजबूती से खड़ा है और देश की सेवा कर रहा है, लेकिन मैं अकेला नहीं हूं। भ्रष्टाचार, गंदगी, सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ने वाला हर व्यक्ति चौकीदार है। भारत के विकास के लिए कड़ी मेहनत करने वाला हर व्यक्ति चौकीदार है। आज हर भारतीय कह रहा है मैं भी चौकीदार। 

उन्होंने अपना संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए तीन मिनट से अधिक समय का वीडियो भी पोस्ट किया है। यह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के राफेल लड़ाकू विमान समझौते में कथित घोटाले को लेकर कहा करते कि अनिल अंबानी को 30 हज़ार करोड़ रुपए दे दिए और प्रधानमंत्री मोदी अपने को चौकीदार कहते है मोदी चोर हैं, मतलब कि ‘‘चौकीदार चोर है।’’ भारतीय राजनीति में नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया को अपने प्रचार का माध्यम बनाया है। जब से राहुल ने चौकीदार चोर कहना शुरू किया था। तब से मोदी मोदी समय का इंतज़ार कर रहे थे। जब लोकसभा का चुनाव घोषणा होने के बाद शनिवार को 'मैं भी चौकीदार' का अभियान सोशल मीडिया पर कैपनिग शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में यह ट्विटर पर पहले नम्बर पर ट्रेंड करने लगा। उन्होंने ट्विटर हैंडल पर अपना नाम भी बदलकर 'चौकीदार नरेंद्रमोदी' कर दिया। इस पूरे अभियान में उन्होंने कहीं भी राहुल गांधी का नाम तक नहीं लिया। देश के लोगों से कहा कि वे अपने आस पास गंदगी, अन्याय और दूसरी सामाजिक बुराइयों को रोकने के लिए चौकीदार बनें।

पिछले लोकसभा चुनाव २०१४ में 'चायवालामुद्दा बना तो इस बार 'मैं भी चौकीदार को मुद्दा बनाने की मुहिम शुरु हो गई है। यह नरेन्द्र मोदी की बिशेषता है कि वे चुनाव के मुख्य धारा में रहते है। जैसे की पिछले लोकसभा चुनाव के पूर्व मणिशंकर अय्यर ने एक चाय वाला कैसे प्रधानमंत्री बन सकता है। मोदी ने आम लोगों को इस बात से जोड़ दिया की मै बचपन में बडनगर स्टेशन पर चाय बेचता था। यह बात आम जनता से जुड़ा हुआ मुद्दा था। हर गली मोहल्ला, नुक्कड़, चाय के ठेले पर चाय पर चर्चा की अभियान की चलाकर जन मुद्दा बना दिया था। भाजपा ने भारी मतों से लोकसभा में बहुमत प्राप्त किया था। फिर से मोदी ने 'मैं भी चौकीदार के नाम से अभियान शुरू किया, आम लोगों को जोड़ने की कोशिश किया जिसे जनता ने हाथों हाथ ले लिया#MainBhiChowkidar के साथ #WeWantChowkidar  ट्विटर पर ट्रेड कर रहा है। मोदी जी अपने ट्विटर हेंडल पर ChowkidarNarendraModi लिख दिया। बाद में एक करोडों लोगों ने अपने नाम के आगे चौकीदार लिख लिया है। मोदी के वीडियो को एक करोड़ लोगों ने देखा है। बच्चों, जवान, महिलाएं आदि लोगों ने मैं भी चौकीदार के नाम के साथ वीडियो बनाकर शेयर कर रहे है। इनमें कुछ वीडियो को मोदी ने अपने ट्विटर हेंडल से शेयर किया है। एक तरह से 'मैं भी चौकीदार मोदी जी के द्वारा एक मुद्दाके साथ जन आंदोलन बना दिया गया है

रविवार, 17 मार्च 2019

लखनऊ गेस्टहाउस कांड, बीजेपी के ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने मायावती बचाई थी लांज


6 दिसंबर 1992 में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद उत्तरप्रदेश में कल्याण सिंह सहित 5 राज्य के भाजपा सरकार को केंद्र सरकार ने बर्खास्त कर दिया गया। उसी समय जनता दल से नाता तोड़कर मुलायम सिंह ने अपनी नई पार्टी समाजवादी पार्टी बनाई और बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए दोनो ने गठबंधन किया। इस गठबंधन ने 1993 के पांच राज्यों के चुनाव में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को 110 सीटें और बीएसपी को 67 सीटें मिली थीं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बीएसपी और अन्य कुछ दलों के सहयोग से सरकार बनाई। जिसमें मुलायम सिंह उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन बीएसपी ने मुलायम सरकार को सिर्फ बाहर से समर्थन दिया था। 

गठबंधन में आई खटास 
बहुजन समाज पार्टी के प्रमुख नेता काशीराम का आरोप लगाया था कि दीनानाथ भास्कर बीएसपी के विधायकों को तोड़ने प्रयास कर रहे है। बीएसपी सुप्रीमो ने मुलायम सिंह यादव को कहा कि दीनानाथ भास्कर को पार्टी और मंत्रीमंडल से हटाये। बसपा सुप्रीमो काशीराम मुलायम सिंह को चेतावनी दिया, लेकिन मुलायम सिंह नहीं माने। दो साल के भीतर ही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रिश्ते इतने खराब हो गए, कि गठबंधन टूटने की नौबत आ गई। समाजवादी पार्टी को भनक लग गई थी कि बीएसपी ने मुलायम सरकार से समर्थन वापस लेने का मन बना चुकी है। तब ....
 
2 जून 1995 का वह दिन बीएसपी प्रमुख कांशीराम के कहने पर पार्टी की प्रमुख नेता मायावती ने पार्टी के विधायकों की बैठक बुलाई। लखनऊ के गेस्ट हाउस में मायावती अपने विधायकों के साथ गठबंधन तोड़ने पर चर्चा कर रही थी। शाम का समय था, करीब 200 की संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और विधायकों ने गेस्ट हाउस पर हमला बोल दिया। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बीएसपी के विधायकों के साथ मारपीट शुरू कर दी। वहां मौजूद बीएसपी कार्यकर्ताओं के कहने पर मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर दिया। कुछ देर में भीड़ मायावती के कमरे तक पहुंच गई और दरवाजा तोड़ने की कोशिश करने लगी। इस दौरान समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मायावती को गालियां और जातिसूचक शब्द भी बोले। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस दौरान मायावती के साथ बदसलूकी का भी प्रयास किया। 

उसी समय हीरो बनाकर बीजेपी के ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन ने सैकड़ो कार्यकर्ताओं के साथ लाठी लेकर मायावती की जान बचाने के लिए गेस्टहाउस पहुचे थे। जिसका परिणाम यह हुआ कि मायावती की इज्जत और जान बच पाई। बीजेपी के ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन  ने मायावती को बचाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। गेस्टहाउस कांड के समय लखनऊ के तत्काली एसपी ओपी सिंह को कांड के दो दिन बाद ही उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके कुछ देर बाद एसपी और डीएम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मायावती की जान बचाई।

बीजेपी ने किया माया का समर्थन 
बीएसपी ने समाजवादी पार्टी से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया और मुलायम सरकार बर्खास्त हो गई। इसके बाद बीजेपी ने मायावती को समर्थन का ऐलान किया और गेस्ट हाउस कांड के अगले ही दिन (3 जून 1995) मायावती ने यूपी के सीएम पद की शपथ ली। भाजपा और बसपा के साथ मिलकर पहली बार एक दलित महिला सुश्री मायावती उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री बनी। उसके बाद समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ छोड़ कर दिल्ली में डेरा जमा रखा था। जिन लोगों समाजवादी का गेस्टहाउस कांड में हाथ था वे सारे उत्तरप्रदेश से पलायन करना पड़ा।

आज 26 वर्ष बाद अखिलेश सिंह यादव तथा मायावती के बीच में लोकसभा 2019  के लिए गठबंधन हो चूका है। यह घटना मेरे सस्मरण में रहा है, तत्कालीन समय में उत्तरप्रदेश में था। कई बार मुलायम सिंह यादव और मायावती के बीच सुलह की कोशिश की गई। लेकिन मायावती ने नहीं स्वीकार किया था। अब मोदी लहर से जनता के बीच अपने अस्तित्व के लिए यह दोनों गठबंधन हुआ है।   

शनिवार, 16 मार्च 2019

न्यूजीलैंड की शांतिप्रिय धरती पर आंतक

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में एक व्यक्ति ने रायफल से हमला कर 50 लोगों कि मौत के घाट उतर दिया। न्यूजीलैंड के पुलिस कमिश्नर माइक बुश ने कहा कि हमले में 50 लोगों की मौत हो गई है। करीब 48 लोग गोली लगने से घायल हैं, जिनका इलाज क्राइस्टचर्च हॉस्पिटल में किया जा रहा है। वह हमलावर जनता था, कि शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ने के लिए सब लोग मस्जिद एकत्रित होते है। सबसे बुरी बात यह है कि वह हमला किया है, तब से फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमिंग भी करता रहा, जिसे फेसबुक ने हटा दिया है। यह एक प्रकार का आतंकी घटना है। इस घटना का मैं दुःख व्यक्त करता हूँ। न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च के 2 मस्जिदों में हुए, इस कि घटना से मानवता के लिए खतरा मंडराने लगा है।


दुसरे दिन न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिद में भारी खूनखराबे के पीछे की कहानी साफ हो गई कि, हमलावर ने मुसलमानों से बदला लेना चाहता था। इसलिए न्यूजीलैंड जैसे बहुत ही शांतिप्रिय देश को चुना है। यहां तक स्थानीय पुलिस के पास भी गन नहीं होती है। अमेरिका से ठीक उल्टा यहां से फायरिंग की घटनाएँ बिल्कुल नहीं होती हैं। इसलिए न्यूजीलैंड के पुलिस अफसर भी गन कम ही रखते हैं।


बाद में जाँच में पता चला कि वह ऑस्ट्रेलिया का 28 वर्षीय नागरिक ब्रेंटन टैरंट है। इसने गोलीबारी से पहले मैनिफेस्टो में लिखा था कि उसे प्रवासियों से सख्त नफरत है। यूरोप में मुसलमानों द्वारा किए गए हमलों से वह काफी गुस्से में था, इसलिए बदला लेना चाहता था। ऐसा कर वह डर का माहौल पैदा करना चाहता था। इस घटना पर एक दिया जा रहा जिससे इस्लामोफोबिया का नाम दिया जा रहा है। दुनिया में चर्चा का बिषय चल पड़ा है कि इस्लामोफोबिया पर।   

मंगलवार, 12 मार्च 2019

भारत की इंडियन एयरलाइंस प्लेन IC 814 हाईजैक की कहानी, काठमांडू से कंधार तक


24 दिसंबर 1999 को पूरे विश्व में ईसाईंयों का त्यौहार क्रिसमस या ’’ बड़ादिन ’’ मनाया जा रहा था। 20 वर्ष पूर्व इसी दिन भारत का प्लेन IC 814 को हाईजैक किया गया था। यह इंडियन एयरलाइंस के प्लेन था जिसमें 176 यात्री सवार थे। जिन्हें छुड़ाने के लिए भारत सरकार से कश्मीर के जेल में तीन खतरनाक आंतकियों को छोड़ना पड़ा था। उसमें मौलाना मसूद अजहर जिसने जैस ए मोहमद नामक आतंकी संगठन बनाकर मुंबई आतंकी हमला, संसद पर हमला, उरी घटना तथा पुलवामा घटना का जिम्मेदारी लेने वाला आतंकी संगठन है। इनके आतंकी कैप पर एयरफ़ोर्स ने मिराज से पाकिस्तान के बालाकोट एयरस्ट्रिक किया गया है। कंधार की घटना का दुष्परिणाम आज भी पूरा भारत भुगत रहा है   
 
24 दिसंबर, 1999 को शुक्रवार के शाम 05:30 नेपाल की राजधानी काठमांडू से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइंस का विमान IC-814 को पाकिस्तान की आतंकवादी संगठन हरकत उल मुजाहिद्दीन के आतंकवादियों प्लेन हाइजैक कर लिया था।हम सभी को शाम तक टी वी के द्वारा पता चला था, कि भारतीय विमान इंडियन एयरलाइंस का विमान IC-814 हाइजैक हो गया है। जिसे पहले पाकिस्तान के लाहौर एअरपोर्ट पर लैंडिंग किया जाना था। लेकिन ईंधन कि कमी के कारण अमृतसर में पायलट ने उतारा था। अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि भारत सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर उचित कार्यवाही नहीं करने के कारण अपहरणकर्ताओं ने प्लेन को पाकिस्तान के लाहौर एअरपोर्ट पर लैंडिंग किया था। उस समय पाकिस्तान ने भी अपेक्षित सहयोग नहीं किया था। तब इंडियन एयरलाइंस का विमान आईसी-814 को दुबई में उतारा गया जहा पर 27 महिलाओं और बच्चों को छोड़कर अफगानिस्तान के कंधार एअरपोर्ट पर लैंडिंग किया था। दुबई में प्लेन में 176 यात्री में से रूपिन कात्याल नाम के एक यात्री ( जिनकी तुरंत विवाह हुआ था ) को आतंकियों ने हत्या कर दिया तथा कई यात्री घायल हो गए थे।

उस समय अफगानिस्तान में मुस्लिम आतंकी तालिबान का शासनकाल हुआ करता था। कंधार में विमान के उतरने के बाद तालिबानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने की एक कोशिश में भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने और अपहर्ताओं एवं भारत सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की सहमति दे दी। 

भारतीय सेना के कमाडो द्वारा उचित कार्यवाही न हो, इसके लिए तालिबान को पाकिस्तान की ISI ने हथियार दिए थे। अफगानिस्तान के आतंकी तालिबान के लडके सशस्त्र लड़ाकों को अपहृत विमान के पास तैनात कर दिया। अपहरण का यह सिलसिला दिनों तक चला और 31 दिसंबर 1999 को भारत द्वारा तीन इस्लामी खूंखार आतंकवादियों - मुश्ताक अहमद जरगरअहमद उमर सईद शेख (जिसे बाद में अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या के लिए गिरफ्तार कर लिया गया) और मौलाना मसूद अजहर ( जिसने बाद में जैश-ए-मुहम्मद की स्थापना की) को रिहा करने के बाद खत्म हुआ। 

हमारे देश के लिए दुर्भाग्य है कि आज तक जनता में राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण नहीं कर पाये। सत्ता के लिए तत्कालीन विपक्ष और मीडियाकर्मियों ने नकारात्मक भूमिका निभाई। मीडिया ने अपहृत परिवारों को उसकाकर प्रधानमंत्री आवास का घेराव करवाया, साथ ही इसे लाइव टेलीकास्ट किया गया था, कि भारत किसी भी कीमत पर अपाहत किये गए लोगों को छुड़ाया जाये। इस घटना का परिणाम आज पूरा देश भुगत रहा है। यदि देश कि जनता ने सरकार पर यह दवाब बनाया होता कि किसी भी परिस्थिति में आतंकियों को नही छोड़ा जाना चाहिए, तो आज स्थिति कुछ और होती।


शनिवार, 1 जुलाई 2017

गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स, यानी जीएसटी - टैक्स सुधार की नई व्यवस्था


स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कर सुधार कहा जा रहा - गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स, यानी जीएसटी - शनिवार, 1 जुलाई, 2017 से लागू हो गया। शुक्रवार मध्यरात्रि को संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घंटा बजाकर इसे लॉन्च किया। देश और राज्यों में फिलहाल लागू लगभग दर्जनभर अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों का स्थान खत्म जीएसटी लागू हो गया। सरकार का कहना है कि इससे 'एक देश, एक बाज़ार, एक कर' व्यवस्था को लागू हो गया असली तो इसे अमली जामा पहनना है ।

वैसे भी मैं कोई अर्थशास्त्री तो नही हुँ। लेकिन अर्थव्यवस्था के बारे में थोडा बहुत समझता हूं समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जो बेईमानी से पैसा ( धन ) कमाता है। उस कमाई पर टैक्स नहीं देता है और अधिकारी कर्मचारियों और समाज को भी बेईमान बनता है। कहा जाये कि काला धन पैदा करने वाला होता है। जब भी हम बाजार से सामान खरीदते हैं वे हम सभी से वैट भी वसूल लेता है। जब सरकार को टैक्स देनी होती है तो वह अपनी कमाई कम बताकर काले धन को छुपाने के लिए अन्य लोगों धन देकर चोरी करने के लिए प्रेरित करता है। देश में बेईमानों की संख्या बढ़ाने वाले लोग भी यही टैक्स चोर है। आप किसी भी शहर में देखे मकान, गाड़ी, मॉल, होटल, विदेश यात्रा और लग्जरियस संपत्ति बहुत दिखाई देती है लेकिन अपनी कमाई से देश चलाने के लिए टैक्स देने वाले की संख्या काफी कम है। जब भी जीएसटी का विरोध करता हुआ दिखे तो समझ लेना चाहिए कि मोदी सरकार ने नोटबंदी के बाद जीएसटी लागू कर काली कमाई पर बड़ा प्रहार किया है। यही सभी लोग विरोध कर रहे है कहना यही है कि आम लोगों पर बोझ डाला जा रहा है।लेकिन आम व्यक्ति जो भी सामान खरीदता है तो टैक्स भी देता है वैट भी देता है। सामान्य व्यक्ति मूर्ख नही है इसलिए जीएसटी का विरोध नही कर रहा वह समझ रहा कि आने वाले समय के लिए फायदा होगा।
पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जीएसटी की ओर कदम उठाया था। लगभग 14 वर्षो के अथक परिश्रम के बाद इसे लागू किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सभी के प्रयास परिश्रम से लागू किया गया है।