शनिवार, 8 नवंबर 2014
गांवों के लिए पत्रकारिता -
बुधवार, 24 सितंबर 2014
सरगुजा की हड़िया
जब से लोग प्रकृति के साथ जीवन जीते रहे।
प्रकृति भी उन्हों अनेकों उपहार में कुछ न कुछ देते रही है। इसी प्रकृति के बीच
हमारे वनवासी आज भी जीने की कोशिश चल रहा है। प्रकृति के साथ यह उनको वर्षो
पीढियों से संबध रहा है। वैसे तो वनवासियों का वनों से हजारों वर्षो से संबध है।
इन वनों क बीच में अपने घर परिवार बसता है। इन वनों से अपने जीवन यापन हेतु
आवश्यकतानुसार पेड़ पौधों से भोजन, लकड़ी तथा अन्य वस्तुओं का संग्रह करता आया है।
वनों के बीच में रहता है अपने पालतू पशु चराना, जगलों के जानवरों का शिकार, खेती करना, मछली मरना आदि दिन भर के काम कर जब शाम वह घर पर आता है। शाम को परिवार और अपने समाज के साथ मिलकर अपनी लोक संस्कृति में पीना, खाना, गाता, बजाना और नाचता दिन भर का यही दिनचर्या है। यही दिनचर्या के साथ हजारों सालों से आनंद के साथ जीवन जीते आये है। अपने मनोरजन के लिए बजा, मस्ती के लिए हड़िया को पीकर लोकगीतों के साथ खुब नाचना। आज भी वनवासियों ने इस परम्परा को बने रखा है। पीने के लिए उसने इसी प्रकृति से कई पेड़ पोधों से रानू ( गोली ) बनाकर भात से हड़िया बनते है। शिकार कर जो भी जीव जतु मिले उसको पकाकर, हँड़िया पीते हुए, सभी के साथ ( परिवार या समाज ) सामूहिक भोजन करते है। अपने जीवन को आनंद पूर्वक जीता है। साथ ही अपनी संस्कृति के रक्षा लिए भगवान, जिसे उनका समुदाय मानता है उसकी श्रृध्दा, भक्ति, भाव और विश्वास के साथ पूजा पाठ करते है। इस पूजा में ताजा हँड़िया को अर्पित कर सभी को प्रसाद के रूप में देते है।
हँड़िया वनवासियों का प्रमुख पेय है। जशपुर के पाठ पर रहने वाले कोरवा लोग ही इसे अधिक उपयोग करते है। उनके लिए एक प्रकार का टानिक का काम करता है। शरीर के लिए आवश्यक पोषण तत्व की पूर्ति इसी से है। मतलब कहे तो हड़िया थोडा सा नशा करता है लेकिन शराब जैसा नशीला नहीं। हड़िया पीने वाला आदमी नशे ( मदहोश ) में नहीं रहता है। सरगुजा संभाग में किसी भी कोना में जाएगे आपको हँड़िया की परंपरा आपको मिलेगा। अतिथि के आने पर, उत्सव होने, घर पर मांगलिक कार्य तथा सामाजिक जीवन में हँड़िया ही अवश्य ही मिलेगा सरगुजा पूरी तरह आदिवासी बहुल रहने के कारण सभी जगह एक सा ही परम्पर रहा है।
मतलब अल्कोहल से कतई नहीं है। बल्कि इसे उत्तर छत्तीसगढ़ के मूल आदिवासियों ने बहुत सोच समझ कर इजाद किया है। हड़िया एक मादक पेय होते हुए भी आदिवासियों की परम्परा और सांस्कृतिक विरासत का एक हिस्सा रहा है। यह खास पेय तैयार होता है चावल, गेहू या मडुआ और रानू नाम की वनों में मिलाने वाले पेड़ पौधों के पत्तों एवं जड़ी को कूट कर पाउडर बनाया जाता है इसे चावल के आटे में मिलकर सफेद गोली छोटे छोटे गोली ( कांच की गोली कांचा) बनाया जाता है। इसलिए जिस रानू की उसमें कई जड़ी में हाई कैलोरी होती है, यह प्रोटीन का भी मात्र भी अच्छा है। चावल, मडुआ और गेहूं के कारण फाइबर और कार्बोहाइड्रेट भी भरपूर मात्रा में मिलता है।
पहले धान को बर्तन में उबाला जाता है। इसे फिर इसे पासकर ठंडा होने पर धान को कूट कर चावल बनाया जाता है फिर से चावल को पकाकर भात बनता जाता है गर्म भात को ठंडा किया जाता है। घर में पुराना काला घडा ( पानी पिने वाला मटका ) भात का डाल देते हैं, जिस भात पसारना कहा जाता है। अब इस पसरे हुए न गर्म न ठंडे भात में रानू की गोली को पाउडर बनाकर ठीक से मिलाया जाता है। उसे घड़े में भर के मुंह को ढँक दिया जाता है। उसके बाद इस भात को फर्मेन्टेशन के लिए रख दिया जाता है। कुछ लोग चावल के साथ गेहूं को भी उबालते हैं। अगर मौसम सर्दियों का है तो कम से कम 6 दिन और अगर गर्मियां हैं तो कम से कम 3 दिन तक चावलों को ऐसे ही रखे रहने देते हैं। समय पूरा होने के बाद इसे बस्तर में लादा कहा जाता है। चावल को घोटकर कर उसमें पानी मिलाया जाता है। अब हडिया तैयार हो गया है। हड़िया के मूल रूप में पोषण का ध्यान रखा है। इसमें हाई कैलोरी होती है साथ ही यह प्रोटीन का भी मात्र भी अच्छा है। चावल, मडुआ और गेहूं के कारण फाइबर और कार्बोहाइड्रेट भी भरपूर मात्रा में मिलता है। चावल, गेहूँ या मडुवा के भात से एक बार बना हड़िया 15 दिन तक इस्तेमाल किया जा सकता है। आदिवासी परिवारों में महीनें में दो बार हड़िया बनाने का चलन रहा है।
वनवासियों में परिवारों में कुल देवता की पूजा के लिए हड़िया सबसे चढाया जाता है। शादी-ब्याह, जन्म-मरण के अवसरों पर भी हड़िया का सेवन किया जाता है। अगर किसी को पीलिया है। तो उस व्यक्ति को दिन में तीन बार हड़िया पिलाया जाता है, जानकार बताते हैं कि इससे केवल 3 दिन के भीतर की स्वास्थ्य में बेहतर सुधार दिखाई देता है। इसके अलावा हड़िया पीने से कब्ज से राहत, डायरिया से बचाव और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में भी मदद मिलती है। गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए दिन में दो बार हड़िया पिया जा सकता है।
रथयात्रा के बाद बरसात शुरुआत होते पर हडिया पीना बंद कर दिया जाता है। वनवासियों में माना जाता है की भगवान आराम कर रहे है। इसके बाद चतुर्मास तक वर्जित रहता है, देव उठनी एकादशी के कर्मापूजा से हडिया बनाना शुरू किया जाता है। दूसरी बात है आजकल हडिया को जल्दी बनाने के लिए यूरिया मिलाया जा रहा है। यूरिया नाइट्रोजन का एक रूप है जो शरीर में जाने के बाद जहरीला हो जाता है। इसलिए आप अपने घर में ही हडिया बनाये आजकल कई व्यवसायी स्तर पर हडिया को बनाया जा रहा है जो की खतरनाक है। अधिक लाभ कमाने के लिए लोग अधिक नशीला पदार्थ आक्सीटोसिन डाला जा रहा है। जो की बहुत ही हानिकारक नशीला हो जाता है आप सभी नशीले पदार्थ से दूर रहे है।
जब यहाँ कोयला निकलना प्रारभ हुआ फिर बाहरी लोगों का आना शुरू हुआ। नए कालोनी कुछ स्थानों थोड़े बड़े नगर बन गये। इनमें रहने वाले लोग सरगुजिया ग्रामीण के लोग नहीं है। अधिकाशं बाहरी राज्य के लोग है, जिन्हें स्थानीय रीति परम्परा का ज्ञान नहीं है। उनके हडिया पर टिप्पणी करना ठीक नहीं है बल्कि उनके परम्परा का सम्मान करना चाहिए। क्योंकि आप उनकी धरती पर है।
सहयोग- (11) करन साय | Facebook
लिंक - http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/sanskriti/2013/haat_bazar.htm
http://www.anthrobase.com/Txt/S/Satpathy_N_Satpathy_R_01.htm
बुधवार, 17 सितंबर 2014
मोदी जी का जन्मदिवस
आज सुबह देश के प्रधानमंत्री अपनी माँ से आशीर्वाद लेने भाई के घर पहुचे । माँ घर से बाहर आकर बरामदे में मोदी के साथ बैठी और दुलार से अपने बेटे को जन्मदिनपर यशस्वी होने की आशीर्वाद दी। नेग के रूप में जन्मदिवस पर अपने तरफ से पांच हजार रूपये भी दी जिसे मोदी जी बाढ़ पीड़ित लोगों के लिए दान दे दिया ।
मोदी जी सभी मीडिया को वह अदभुत नजारा दिखा दिया। एक देश के प्रधानमंत्री अपना जन्मदिन सादगी पूर्वक मनाया । उन लोगों के लिए एक सबक होना चाहिए जन्मदिन के नाम पर अनाब सनाक खर्च कर देते है। जब भी मोदी अपने माँ से मिलने जाते है मीडिया के लिए एक बड़ी खबर होती है । दुनिया के किसी भी नेता की माँ से मिलने की खबर एक बड़ी खबर बनी हो । आज मीडिया के लिए केवल सरकार के लोगों की चापलूसी खबर ही मिलती है। लेकिन एक राष्ट्र के प्रधानमंत्री जब अपनी साधारण माँ से मिलने मामूली आदमी बनकर जाते है तो दुनिया के लिए एक बड़ी खबर बन जाती है।
माँ भी साधारण जैसा अपनी ही माँ हो । इसी साधारण माँ से दुनिया भर के नेता मिलने आ रहे है । अभी तक किसी ने भी नहीं सोचा होगा की एक नेता ने अपनी माँ का सम्मान इतना बढाया हो। मोदी जी ने अपनी माँ का सम्मान दुनिया में बढ़ाया । हम सभी के लिए प्रेरणादायक हो ।
शुक्रवार, 23 अगस्त 2013
राजीव गाँधी और राहुल गाँधी

राजीव गांधी के जन्म के अवसर पर अचानक कांग्रेसियों द्वारा मनाया गया। मुझे ध्यान आया कि देश में कांग्रेसियों ने राहुल सोनिया के आगे राजीव गांधी को भूल गये, अचानक याद केैसे किया जा रहा है। चैनलों पर राजीव गांधी के विज्ञापन दिखाया जा रहा है। दो बातों ध्यान में आता है कि वर्तमान काग्रेस में वह ताकत नही है, दूसरा बात कि जो राहुल नाम का हवा खडा किया गया अब फुरूरूरूरू हो गया।
अभी कश्मीर में पाकिस्तान के सैनिक के द्वारा जवानों की हत्या का मामला अभी गर्म था। इससे पहले रामबन में बहुसख्यक समुदाय ने सीमा सुरक्षा बल पर हमला किया, इसके बाद कई दिनों तक हिसा होती रही। रामबन का मामला शात नही हुआ कि किष्तवाड में अल्पसंख्यक हिन्दूओं के घरों ,दुकानों पर बहुसंख्यक मुसंलमानों द्वारा हमला किया गया। जिसमें कई अल्पसंख्यक हिन्दूओं की हत्या एवं घरो,दुकानों लूटपाट किया है। किष्तवाड़ में जो सप्रदायिक हिसा (दंगा) से पूरे जम्मू कश्मीर में आग लग गया है। यदि घटना की गंभीरता को देखते हुए सुबह ही इसे रोका गया होता तो यह आग पूरे जम्मूकश्मीर में नही लगती । इस घटना का जितना भी निदा किया जाये वह कम है।
ईद उल फितर के अवसर पर मुसलमानों के द्वारा एक माह (रमजानका महीना) से रोजा (उपवास) रखा जाता है । जब चांद देख लोग ईद मनाया जाता है। सभी मुसलमान अमीर हो या गरीब वह ईद के दिन मसजिद में जाकर नमाज पढाकर यह त्यौहार मनाते है। यह महीना बहुत पवित्र माना जाता है। जम्मु के किश्तवाड़ शहर में इस दिन बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय हजारों की संख्या में लोग सुबह एकत्र हुए। स्थानीय मसजिद में हजारों मुसलमानों से अधिक लोगों ने नमाज अदा किया । नमाज के बाद एक दूसरे को बधाई दिया जाता है, लोग ईद मनाते है । बडे बुजुर्गो द्वारा बच्चों को तोफा दिया जाता है लेकिन बहुसंख्यक मुसलमानों द्वारा अल्पसंख्यक हिन्दूओं को दंगा रूपी ईदी दिया है। जैसे मसजिद से बाहर निकलते हिन्दूओं के दुकानों पर हमला शुरू कर दिया। सैंकडों लोग मसजिद से निकलते ही ईट,पत्थरों ,लाठी, लोहे के राड से हिन्दूओं के दुकानों घरों पर हमला हुआ। बहुसंख्यक मुसलिम समुदाय द्वारा अचानक हुआ हमला से अल्पसंख्यक हिन्दूओं समझ नही पाय । कोई भी समाज अपने त्यौहार पर खुषी मानते है नेक इरादा रखते है। किष्तवाड़ के मुसनमानों जो किया किस भी धर्म इसकी अनुमति नही देता है।
अल्पसंख्यक हिन्दूओं पर अचानक हुऐ हमला से संभाल नही है जिसमें कई हिन्दूओं की हत्या किया गया। दुकानो को लुटा गया और दुकान में आग लगा दिया। आखिर हिन्दू तो कहां जाये पुलिस हाथ पर हाथ धर कर बैठे हुऐ थे। क्योकि स्थानीय विधायक ने वही डेरा जामाये हुऐ और इस हमला की नेतृत्व तैयारी में लगे रहे। जो राज्यगृहमंत्री होते हुऐ हिन्दूओ के रक्षा के लिए नही बल्कि, मुसलमानों को भडका रहे थे। इस घटना में भाजपा का कई कार्यकर्ता घयाल हो गये । भाजपा के पूर्व किश्तवाड़ जिला अध्यक्ष कैप्टन (सेवानिवृत्त) हूकूमचंद शामिल हैंे जिन्हे गंभीर चोट लगाने से घायल हो गये । दोपहर तक जिला प्रषासन और पुलिसप्रषासन की निक्रियता के कारण भाजपा ने अपने राश्ट्र नेताओं को घटना की गंभीरता कि सुचना दिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह जी तुरत प्रधानमंत्री से बात किया कहाकि राज्य सरकार दंगाईयों की मदद कर रही है बिना सेना भेजे स्थिति और बिगड सकती है। प्रधानमंत्री ने अपनी सक्रियता दिखाते हुऐ तुंरत सेना भेज दिया। दोपहर में सेना के पहुचने पर षाम तक स्थिति नियत्रण में आई है। श्रीनगर में अबदुल्ला सरकार सोई थी, सेना के आगमन की जानकारी मिलते ही जाॅच के आदेष दिये,और कलेक्टर तथा पुलिस अघिक्षक को हटा दिया गया । जो यह कह रहे थे, किष्तवाडा मे षांति है और भाजपा झूठ बोल रही है। दूसरे दिन भाजपा द्वारा पूरे जम्मू क्षेत्र में बंद का आह्वान किया है । सभी लोगों इस बंद का समर्थन किया है।
रमजान के महीने में जो पवित्र महीना माना जाता है इस प्रकार की हिसा जायाज है क्या ? अभी कश्मीर को लेकर पुरे देश में सरकार के निसक्रियता को लेकर नाराजगी है। वही यह घटना पूरे देश में एक प्रकार से नाराजगी दिखाई दे रहा है। यह घटना सुबह से हो रहा था लेकिन मीडिया ने कवर नही किया । जब सोशल मीडिया ने इस खबर को खुब चलाया तो अन्य चैनल ने यह महत्वपूर्ण माना । भाजपा ने बंद की घोशण के बाद तथा इस घटना कि भाजपा प्रवक्ताओं ने प्रेस वार्ता किया तब जाकर । यह समाचार दिखाया जाने लगा , मीडिया द्वारा इस प्रकार की हिन्दूओं के उपर होने वाले अत्याचार को नही दिखाना भी कही न कही इस प्रकार की घटना का समर्थन माना जाय । तो मीडिया की निष्पक्षता कैसे होगी।
शुक्रवार, 9 अगस्त 2013
क्या नेता और शासक इजरायल से प्रेरणा लेंगे ?
जब फिलिस्तीनी
आतंकवादियो ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक गेम्स विलेज में घुसकर 11 इस्राइली खिलाडियों की हत्या कर दिया था । तब तत्कालीन इस्राइली प्रधानमंत्री श्रीमती गोल्डा मायर ने कोई
भी बयान नहीं दिया | उन्होंने सारे मृत खिलाडियो
के घरवालो को खुद फोन करके कहा की हम बदला
लेकर रहेंगे | उन्होंने अपनी गुप्तचर एजेंसी मोसाद को पूरी छुट दे दी, मोसाद का एकमात्र मिशन था कि दुनिया के किसी भी कोने से इन
आतंकियों को तलाश करो, उसको ख़त्म करो | एक
बार मिशन म्यूनिख के आतंकियों के ख़ात्मे का ज़िम्मा सौंपे जाने के बाद मोसाद ने अपने मिशन का आग़ाज़ किया | तारीख़ थी 9 अप्रैल 1973 और मिशन का नाम था रॉथ ऑफ गॉड | इसके लिए मोसाद का सबसे पहला काम था | दुनिया के किसी भी कोने में छिपे आतंकियों को खोज निकालना | यह ज़िम्मा मोसाद के यूरोपियन एजेंट्स को सौंपा गया था |१ - एक आतंकवादी सलाह खलिफ जेदाह में अपने परिवार के साथ रहता था । मोसाद ने उसके घर में रखे टेबल जिस पर फ़ोन रखा था, ठीक वैसा ही टेबल रख दिया और टेबल के अन्दर बम फिट करके उसका कनेक्शन फोन से जोड़ दिया, फिर उसके फोन की घंटी बजी उसने जैसे ही फोन उठाया उसके चीथड़े उड़ गए |
2 - एक आतंकवादी अबू दयुद बेरुत में छुपा था मोसाद ने उसकी पूरी दिनचर्या पर नज़र रखी । वो एक क्लब में रोज जाता था । इजराइल ने अपने खतरनाक कमांडो को बेरुत भेजा, जिसमे सिर्फ 3 लोग थे, एक कमांडो बेंजामिन नेतान्याहू जो बाद में इसराइल के राष्ट्रपति बने | एक ख़ूबसूरत लड़की का भेष रखकर उस क्लब में नाच रहे थे, जैसे ही वो आतंकवादी उनके करीब नाचने के लिए आया, बेंजामिन ने अपनी फुल्ली औटोमटिक गन से गोलियों की बौछार कर दी 15 लोग मरे गए, और बेंजामिन और उनका साथी जो उनको कवर कर रहा था | लेबनानी पुलिस के नकली गाड़ी में फरार हो गए।
3 - एक आतंकवादी अमिन अल हिंदी को मोसाद ने अम्मान में उसके बिल्डिंग के नीचे गोलियों से भुन दिया |
4 - अब बाक़ी बचे आतंकवादियो ने डरकर आत्मसमर्पण करने का प्रस्ताव भेजा। लेकिन गोल्डा मायर ने कुछ नहीं बोला चौथे आतंकवादी अबू फयाज, जो छुप कर हेलसिंकी में रहता था, उसे कार से कुचल कर मार दिया गया ।
5 -पाचवे आतंकवादी अली हसन सलामेह जो पेरिस में छुपा था, वही उसको साइनाइड जहर देकर मार दिया गया
6 - महमूद हम्शारी को दमिस्क में गोली मारी गयी ।
गुरुवार, 8 अगस्त 2013
बेचारे रक्षा मंत्री एंटनी का दोष
भारत के जम्मू और कश्मीर के पुंछ सेक्टर में 6 अगस्त को पाकिस्तान के कमांडो ने नियंत्रण रेखा पर भारतीय चौकी पर हमला
किया | इस पाकिस्तान हमले में पाँच भारतीय सैनिकों की हत्या की गई है| खबर आते ही देश भर से जोरदार प्रतिक्रिया हुआ |
संसद में गृहमंत्री एंटनी ने दोनों सदनों में अपनी ओर से दिए वक्तव्य में कहा था
कि पांच भारतीय सैनिकों की हत्या आतंकवादियों और पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहने
लोगों ने की। राज्यसभा में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास जो भी सूचना उस समय
थी, कल का बयान उसी के आधार पर था। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा
कि देश की सुरक्षा और अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ये बात लोगो को हजम
नहीं हुआ | देश भर से गृहमंत्री एंटनी के
बयान पर सोशल मिडिया द्वारा जोरशोर से विरोध दर्ज किया जाने लगा |
