शुक्रवार, 7 मई 2021

क्या बंगाल में अनुच्छेद 356 लागू कर राष्ट्रपति शासन लग सकता है ?




पश्चिम बंगाल में वैसे तो हिंसा का दौर जब से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई है, तब से अपने विरोधियों पर हमला कर हत्या कर दिया जाता रहा है। उसी तरह से अपने विरोधियों पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लोग भी वैसे ही हमला कर रहे हैं। बंगाल चुनाव परिणाम के बाद हो रही हिंसा अभी तक थमने का नाम नहीं ले रही है। अभी तक 24 लोगों की हत्या हो चुका, महिलाओं साथ बलात्कार, घरों में तोड़फोड़, लूटपाट हो रहा है। एक लाख से अधिक लोग अपनी जान बचने के लिए अन्य राज्यों में शरण ले रहे है। इसी बात को लेकर कोलकात्ता हाईकोर्ट में याचिका लगाया गया है। बंगाल के राजपाल को हिंसा की जानकारी नहीं दी जाए, इसके लिए मुख्य सचिव, डीजीपी पुलिस तथा कोलकाता के कमिश्नर को ममता बनर्जी ने निर्देश दिए हैं।

वही कोलकात्ता हाईकोर्ट के 5 जजों की खंडपीठ ने सुनवाई की जा रही है, कि पश्चिम बंगाल सरकार को दो दिनों में कोलकात्ता हाईकोर्ट को बंगाल हिंसा के बारे सरकार को रिपोर्ट देने को कहा है। पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हो रही हिंसा को लेकर कोलकात्ता हाईकोर्ट के वकील अनिल दास ने याचिका दाखिल किया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य में चुनाव के बाद हो रही हिंसा तथा कोविड-19 से राज्य में भय का माहौल बन गया है। बंगाल हिंसा पर राजनीति के दबाव में पुलिस भी उचित कार्यवाही नहीं कर रही है। जिसके कारण आजादी के बाद पश्चिम बंगाल से, यहाँ के निवासी अन्य राज्यों में पलायन कर रहे है, ऐसी भी आ रही है। इस पर कोलकात्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा पर 10 मई तक रिपोर्ट दे। पहले डिवीजन बेंच के पास यह मामला आया था लेकिन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने बड़ी बेंच का गठन किया है। ऐसा लगता है की कोलकात्ता हाईकोर्ट चुनाव के बाद हो रही हिंसा में जांच के लिए एसआईटी भी गठित किया जा सकता है। पश्चिम बंगाल के कम्युनिस्ट पार्टी ने भी अपने कार्यकर्त्ताओं की हत्या का आरोप टीएमसी पर लगाया है। पश्चिम बंगाल भाजपा प्रदेश ने बलराम मांझी तथा किशोर मंडी की हत्या का आरोप लगाते हुए, कहा कि हत्या अभी तक जारी है। यहां तक कि उनके मुस्लिम भाजपा के उपाध्यक्ष शेर मोहम्मद खान के परिवार सहित मारपीट की गई, उनके घरों में तोड़फोड़ किया है। 

3 मई को केंद्रीय सचिव अजय भल्ला ने बंगाल सरकार को पत्र लिखकर हो रहे हिंसा पर जबाव माँगा था, जो नहीं मिला है। 3 मई तक पश्चिम बंगाल में आदर्श चुनाव आचार संहिता लगा हुआ था और नाम मात्र की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी थी। ममता बनर्जी सरकार ने इस पर अभी तक जवाब नहीं दिया। पुन हिंसा होते देख केंद्र के केंद्रीय सचिव अजय भल्ला ने 4 सदस्य लोगों का जांच समिति बनाकर जांच के लिए पश्चिम बंगाल भेजा। अजय भल्ला ने कानून व्यवस्था बनाए जाए, राज्य अपनी कानून व्यवस्था ठीक से पालन नहीं करती है, तो राजपाल के द्वारा 356 लगाया जा सकता है। लेकिन अभी नई सरकार बनी है, उसे काम करने का और स्थिति को समझकर कानून व्यवस्था लागू करने के लिए समय मिलना चाहिए। इसलिए धारा 365 अभी नहीं लग सकता लेकिन केंद्र सरकार अनुच्छेद 356 लगाने से पूर्व उसकी भूमिका भी बना रही है। अनुच्छेद 256-257 के तहत प्रशासनिक अधिकार पर इस धारा का प्रयोग किया जाता है। जिसमें मुख्य सचिव और डीजीपी को आदेश दिया जाता है, कि सरकार वहां की सरकार कुछ भी करें लेकिन कानून व्यवस्था बनाने के लिए आप केंद्र के गृह मंत्रालय के आदेशानुसार काम करेंगे। इसके तहत गृह मंत्रालय ने 4 सदस्यों की टीम बनाकर पश्चिम बंगाल में जांच करने के लिए भेज दिया गया है। 

आप सभी जान रहे हैं कि ममता बनर्जी अभी नवनिर्वाचित सरकार है इसे काम करने का मौका मिलना चाहिए। लेकिन जिस तरह से ममता बनर्जी काम कर रही है उससे ऐसा लगता नहीं है कि वह कानून व्यवस्था को उचित ढंग से लागू कर रही है। कुछ दिन पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री बी मुरलीधरण बंगाल में हिंसा क्षेत्रों में अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलने जा रहे थे। तो मिदनापुर में एक गांव में उन्हें रोककर उनकी गाड़ियों पर हमला किया गया। शायद वहां रुकते तो उनकी हत्या भी कर दी जाती। वहां पुलिस भी मूकदर्शक बनी खड़ी है। कहीं ना कहीं इस हिंसा में वहां की पुलिस भी संदेह के दायरे में आती है। अभी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी अपने कार्यकर्त्ताओं की हत्या का आरोप टीएमसी पर लगाया है। 

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बंगाल जाने पर एक बात उन्होंने स्पष्ट कर दी है कि बंगाल में जो भी हो रहा हिंसा के खिलाफ हम लोग लोकतांत्रिक तरीके से इसका हल निकालेंगे यह बहुत बड़ी बात है कि सरकार मोदी सरकार तत्काल में अनुच्छेद 356 के तहत पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन नहीं लगा रही है। लेकिन इसी अनुच्छेद के तहत एक प्रकार पश्चिम बंगाल में भूमिका भी बनाया जा रहा है। यदि सरकार बिना सोचे पश्चिम बंगाल में अनुच्छेद 356 लगाई जाती है। तो उसे कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है। कोर्ट तत्काल लेने अनुच्छेद 356 को रद्द कर देगी क्योंकि हम देख रहे हैं कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार को कोविड-19 से लड़ने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक से ना पालन करने पर ध्यान नहीं देकर, केंद्र सरकार को दोषी ठहराने का कोशिश किया है इन सारे बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्र की सरकार ने बंगाल में अनुच्छेद 356  तत्काल में नहीं लगाने का जो निर्णय कर रखा है। वह वास्तव में सही है, दूसरी बात अनुच्छेद 356  लगते ही मोदी सरकार को बदनाम करने की पूरी दुनिया में कोशिश होगी ऐसे बहुत सारे सिविल सोसाइटी (टूलकिट ग्रुप) संस्थान हैं। जो टूलकिट ग्रुप वामपंथी द्वारा मोदी को हटाने के लिए बहुत कोशिश कर रहे हैं। इसमें मोदी को बदनाम किया जाए तथा देश में एक नई आने वाले लोकसभा में नई सरकार बनाने की भूमिका तय की जाए। जिसमें यह कहा जाए कि मोदी से देश नहीं चल रहा है। मोदी सरकार को बिल्कुल कोरोना काल में अपने इंतजामों के कारण फेल हो चुकी है। हजारों लोग मर रहे हैं, लाखों लोग हॉस्पिटल में है, ऑक्सीजन की कमी है, सरकार लोगों स्वास्थ्य पर लोगों को बचाने पर ध्यान नहीं देकर, पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर, लोकतंत्र व्यवस्था को भारत में लागू ना कर, मोदी तानाशाही व्यवस्था को लागू कर रहा है। इस तरह से हिन्दुओं के खिलाफ मौहाल बनाना और मोदी सरकार अब देश नहीं सभाल पा रहे .......

दूर तक सोचों -----

ऐसा प्रचारित करेंगे पहली बात सोशल मीडिया के द्वारा पाकिस्तान और चीन तथा टूलकिट ग्रुप, सिविल  सोसाइटी के लोग मोदी सरकार के खिलाफ योजना बनाकर पहले से बैठे हैं। दूसरी बात सबसे महत्वपूर्ण है की वीगर मुसलमानों पर हो रहे चीन में अत्याचार के कारण पूरी दुनिया में चीन की बदनामी हो चूका है अभी चीन और यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार को लेकर एक समझौता होने वाला था लेकिन यूरोपीय यूनियन ने कोविड-19 ने तथा वीगर मुसलमानों पर चीन द्वारा अत्याचार किए जा रहे हैं के कारण चीन के अत्याचारों के कारण यह समझौता रद्द कर दिया, नहीं हो पा रही है यूरोपियन यूनियन का भारत के तरफ रुख हो गया है, वह चाह रहा है कि भारत से यह समझौता हो जाए इस समय कोविद 19 के कारण देश में अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। जिससे हमारी अर्थव्यवस्था पटरी से उतर सकती हैं। लेकिन मोदी जी नहीं चाहते कि वह दुनिया में बदनाम हो और यह समझौता हो जाता है। उससे भारत को बहुत आर्थिक लाभ होने वाला है। जिसमें भारत में नए रोजगार के रास्ते खुलेंगे, नई कंपनी आएगी और भारत में जो प्रोडक्ट बन रहे, नए नए स्टार्टअप हो रहे हैं, उनके लिए एक बड़ा मार्केट मिल रहा है। उसको एक दुनिया में आगे बढ़ने में एक मौका मिलेगा। इन सारे बातों को ध्यान में रखते हुए मोदी जी अभी धारा 356  नहीं लगाएंगे और हम सभी पर मोदी जी को विश्वास रखना है, कि उचित समय पर बंगाल में मोदी जी ध्यान देंगे और एक खास बात मैं आपको बताना चाहता हूं, की भारतीय जनसंघ बाद भारतीय जनता पार्टी बनी उसके बाद अगर 35 वर्षों के बाद भारत में पूर्ण बहुमत का सत्ता मिला है। आप सोच सकते हो कि भारत की जनता भाजपा को इतने सालों तक परखा उसके बाद, आज मोदी सरकार को केंद्र की सत्ता दिए। ऐसे ही बंगाल भी इन 5 सालों में भारतीय जनता पार्टी को वहां देखेगी पहचाने कि और हो सकता है कि अगले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ पश्चिम बंगाल सत्ता में आ जाये आज बंगाल के चुनाव के परिणामों की समीक्षा करते जरुरत हैं। जो पार्टी सरकार बना चुकी है, वे कांग्रेस और लेफ्ट 65 वर्षों तक बंगाल में राज किये है, किन्तु आज पश्चिम बंगाल में उन्हें एक भी सीट नहीं मिली। 



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Ramashanker: भाजपा हर चुनाव जीतने के लिए लडती है... (ramashanker62.blogspot.com)

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Ramashanker: ममता ने जगाई आस (ramashanker62.blogspot.com)

चीन का मॉल चले तो चाँद तक, गिरे तो असमान से जमीन तक .......



चीन ने अपने सोशल मीडिया से भारत का मजा उड़ना महंगा पडा है चीन ने अपने वीबो प्लेटफार्म से भारत में चीनी वायरस कोविद 19 से हो रही मौत के बाद जलती हुए चिताओं और 28 एप्रैल को लंच किया हुआ का चीनी रॉकेट चित्र लगा कर साझा किया था जिसे पूरी दुनिया में आलोचना हो रही थी आलोचना होते ही इसे बाद में हटा दिया गया था वही रॉकेट अब दुनिया के लिए फिर से नया खतरनाक  बन गया है     

चीन ने अपने 28 अप्रैल को रॉकेट छोड़ा था। अपना काम तो किया लेकिन अनियंत्रित हो कर धरती पर गिरने वाला है दुनियाभर में लोग परेशान है, की कहाँ गिरेगा  100 फुट लंबा और 16 फुट चौड़ा करीब 21 टन वजनी यह रॉकेट घनी आबादी वाले महानगरों जैसे अमेरिका का न्‍यूयॉर्क, स्‍पेन का मैड्रिड और चीन के पेइचिंग शहर को निशाना बना सकता है, भारी जन हानि होगी। अभी तक वैज्ञानिक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि यह रॉकेट ठीक-ठीक कहां पर गिरेगा। चीन के कारण दुनिया फिर से नए संकट खड़ा हो गया है पूरी दुनिया चाइना वाइरस कोविद से परेशान है।


गुरुवार, 6 मई 2021

पश्चिम बंगाल में केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन के काफिले पर हमला



पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा थामने का नाम नहीं ले रही। लगातार बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्याएं हो रही हैं। उनके साथ मारपीट हो रही है लगभग हजारों कार्यकर्त्ता गाँव छोड़कर असम भागकर अपनी जान बचा रहे है भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में एक दल इन क्षेत्रों का दौरा कर रहा है। इसके भाग के रूप में, मुरलीधरन पश्चिम मिदनापुर पहुंचे थे।



पश्चिम बंगाल में केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन के काफिले पर गुरुवार को हमला किया गया। चुनाव के बाद, राज्य में हो रही हिंसा को लेकर केंद्रीय मंत्री का दल राज्य में पहुंचा था। हमले में मंत्री की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। मुरलीधरन ने हमले का आरोप तृणमूल कार्यकर्ताओं पर लगाया है। वी मुरलीधरन पर पश्चिम मिदनापुर में हमला किया गया। उन्होंने वाहन पर हमले का वीडियो फुटेज भी जारी किया है। वीडियो में दिख रहा है कि उनके वाहन पर लाठियों से हमला किया जा रहा है। पत्थर बरसाए जा रहे हैं। बवाल बढ़ने और तोड़फोड़ होने पर मंत्री वहां से अपना काफिला लेकर वापस लौट आए।




बुधवार, 5 मई 2021

छत्तीसगढ़ में अंत्योदय कार्डधारकों का टीकाकरण रुका, स्पष्ट नीति बनाए राज्य सरकार - उच्च न्यायालय

 


 

छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा अतिउत्साह में लिया गया निर्णय पहली मई से सभी 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगो को मुफ्त में कोरोना टीकाकरण किया जायेगा। लेकिन एक मई से यह अभियान शुरू होने से पूर्व शर्त यह जोड़ा गया की अन्त्योदय कार्ड धारकों को प्राथमिकता दिया जायेगा इस पर कई लोगों ने सोशल मीडिया के द्वारा विरोध किया जाने लगा। इस विरोध पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान याचिका लिया और फटकार लगाकर पूछा की समाज में वर्गीकरण कोविद टीकाकरण में उचित है क्या ?  उच्च न्यायालय ने टीकाकरण को लेकर राज्य शासन को आगामी शुक्रवार तक अंत्योदय कार्डधारकों के लिए टीकाकरण करने वाले आदेश को संशोधित कर स्पष्ट नीति बनाने का निर्देश दिया है, जिससे सभी वर्गों के लोगों को इसका लाभ मिल सके। बिना विचारे लिया गया निर्णय।

प्रधानमंत्री मोदी जी देश में कोविद महामारी से बचने के लिए पुरे भारत में मुफ्त में टीकाकरण अभियान चला रहे है। यह अभियान अभी 45 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए चल रहा था। अतिउत्साह में छत्तीसगढ़ के नेता चुनावों में घोषणा किया की छत्तीसगढ़ में 18 से ऊपर के लोगों राज्य शासन मुफ्त में टीकाकरण करेगा। केंद्र सरकार के पास निश्चित मात्रा में वैक्सीन का निर्माण हो रहा है। मोदी ने टीकाकरण अभियान में यह देखा की पहले लहर में अधिक आयु तथा गंभीर बीमारी के लोग प्रभावित हो रहे थे। इसलिए उन्होंने ने टीकाकरण में इन्ही आयु के लोगों को प्राथमिकता में रखकर टीकाकरण शुरू किया टीकाकरण के बाद आ रहे। रिसर्च  (अनुभव) के आधार पर निर्णय लेना था। कई देशों में जल्दीबाजी में खून में थक्का ज़माने लगा जिसके बाद निर्णय लिय गया की 28 दिनों के अंतर को 42 दिन कर दिया गया है। इसी बीच केंद्र सरकार ने 18 वर्ष के ऊपर के लोगों को भी टीकाकरण की अनुमति दे दिया। छत्तीसगढ़ में एक मई से हुए 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगो के टीकाकरण अभियान विस्तृत कार्ययोजना के बिना शुरू किया।

जब केंद्र सरकार की अनुमति मिलने के बाद राज्य सरकार ने वैक्सीन उत्पादकों से संपर्क वैक्सीन की 75 लाख खुराक मांगी थी। लेकिन 30 अप्रैल तक सरकार को वैक्सीन नहीं मिली थी। उस दिन देर शाम राज्य सरकार को बताया गया कि एक मई को वैक्सीन की 1.5 लाख डोज पहुंचेगी। वैक्सीन लगवाने वालों की अनुमानित संख्या 1.35 करोड़ थी। ऐसे में कानून व्यवस्था और भीड़ इकट्‌ठा होने से बचाने के लिए एक समूह विशेष को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया था। इसलिए मजबूरी में अति गरीब लोगों के प्रति सुरक्षात्मक नीति अपनानी पड़ी है।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता  तिवारी ने बताया कि राज्य शासन के इस फैसले के खिलाफ पांच याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति दर्ज करते उच्च न्यायालय से इस मामले की सुनवाई करने का आग्रह किया था याचिकाओं में कहा गया कि टीकाकरण में वर्गीकरण का यह निर्णय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के विपरीत है सभी याचिकाओं में आदेश को तत्काल निरस्त करने और नई नीति बनाने की मांग की गई, जिससे बिना किसी भेदभाव के सभी वर्ग के लोगों को टीकाकरण का लाभ मिल सके उच्च न्यायालय में मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश पी आर रामचन्द्र मेनन और जस्टिस पी पी साहू की युगल पीठ के समक्ष मामले की आनलाइन सुनवाई हुई राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने इस मामले में शासन का पक्ष रखा याचिककर्ताओं की तरफ से अधिवक्तागण किशोर भादुड़ी, पलाश तिवारी, अनुमेह श्रीवास्तव, सुमित सिंह, हिमांशु चौबे तथा अन्य ने अपना-अपना पक्ष रखा

उच्च न्यायालय का आदेश मिलने के बाद राज्य सरकार ने मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में सचिवों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। यह समिति टीकाकरण में अन्त्योदय, BPL और APL वर्गों में प्राथमिकता का अनुपात तय करेगी। इसकी सिफारिशों के आधार पर सरकार अपना जवाब उच्च न्यायालय में पेश करेगी।


आधार-http://www.navabharat.news/chhattisgarh-news/antyodaya-card-holders-first-vaccinated-high-court-said-state-government-should-make-clear-policy/


पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हिन्दुओं पर हो रहे हिंसा के खिलाफ धरना

 


पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिन्दुओं पर हो रहे हिंसा के खिलाफ अपने घर पर धरना दे रहा हूँ . टीएमसी के लोगों से कहना चाहता हूँ कि हिंसा कर बंगाल की बदनाम मत करो. बंगाल स्वामी विवेकानंद, रवीन्द्रनाथ टैगोर, सुभाषचन्द्र बोस की भूमि है. यहाँ हिन्दुओं के दुकानों को लुटा गया. घरों में आग लगाया गया है हिन्दुओं की माता बहनों के साथ दुष्कर्म किया गया है. यह बंगाल के लिए अपमान है. ममता बनर्जी से अनुरोध है कि अपने पार्टी के अपराधिक लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाये जिन लोगों ने अपराध किया है, उनको तत्काल सजा दिया जाये.       

 

रविवार, 2 मई 2021

खेला होबे , हो गया बंगाल में खेला ...


बंगाल में विधानसभा चुनाव 2021 में ममता बनर्जी जीत कर भी हार गई और भाजपा हार कर भी नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी जीत गया है। भारतीय जनता पार्टी का अति आत्मविश्वास, सही रणनीति से ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव जीती - प्रत्येक चुनाव किसी भी पार्टी के लिए नया सीख देता  है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल से भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा में 18 सीटो में जीत मिली थी। इस पर भाजपा ने मोदी लहर कहा था, मोदी के कार्यों से बंगाल की जनता ने उन्हें पसंद किया था। उसी उत्साह के कारण भाजपा ने 2021 का बंगाल विधानसभा चुनाव को चुनाव लड़ा। यही भाजपा की सबसे बही भूल थी लोकसभा के चुनाव 20 महीनों के बाद व्यक्ति और नारा भी बदल गया था लेकिन ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर जैसे प्रोफेशनल व्यक्ति से चुनावी प्रबंधन सलाह लेकर और लोकसभा 2019 के कमियों को दूर कर चुनाव लड़ीं और बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई है।

एक साधारण सफ़ेद  सूती साडी एवं सूती झोला लेकर दिल्ली से बंगाल तक दहाडती बंगाल की शेरनी ममता दीदी का नाम से पूरा देश जानता है 20 वर्षों से केवल एक उदेश्य वामपंथियों कि सत्ता को उखाडकर फेकना यही ममता के जीवन यही एक उद्देश्य था वामपंथियों ने ममता पर कितने बार हमला किया लेकिन वह रुकी नहीं थकीं नहीं केवल वामपंथियों के अत्याचार से लड़ती रही वह जानती थी वामपंथी अपनी सत्ता की चाभी आम जनता के हाथ में इतनी आसानी से देने वाले नहीं थी लेकिन 2011 वामपथियों से सत्ता को लड़कर ले लिया। आप सोचे की जिसने वामपथियों से सत्ता छीना हो वह भाजपा की इतना सरलता से सत्ता की चाभी नहीं देने वाली है। 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 भाजपा ने जीत ली हो। तो ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर जैसे प्रोफेशनल व्यक्ति से चुनावी प्रबंधन सलाह का कार्य दिया। प्रशांत भाजपा के साथ काम कर चुके है इसलिए भाजपा में क्या कमी है उसे पता था। ममता बनर्जी ने धीरे धीरे अपने पार्टी के कमजोरियों को ठीक करना शुरू किया।

चुनाव आते ही टीएमसी में भगदड़ मचा उनके लोग भाजपा में जाने लगे ममता चाहती थी की कुछ लोगों को पार्टी से निकलना वैसे लोग खुद ही चले गए। उनके स्थान पर नए चेहरों को टिकट दिया वे नये चेहरें जीते, जो भाजपा में आते भाजपा ने उन्हें टिकट दिया अधिकांश हार गए। इससे भाजपा के पुराने लोग नाराज हो गए की वर्षो से काम कर रहे थे। लेकिन चुनाव के समय पार्टी ने उन्हें किनार कर दिया। ममता ने बांग्ला भाषा पर फोकस किया और भाजपा ने सोनार बंगला कहा। आपको को यद् होगा बांग्लादेश बांग्ला भाषा के नाम पर बना है। यहाँ पर ग्रामीण क्षेत्रों में बांग्ला भाषा ने काम किया उनको लगा की भाजपा वाले बांग्ला जानते नहीं वे कैसे हमको समझेगे। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी काम टीएमसी ने ठीक से किया। आप देखे तो नगरी क्षत्रों में भाजपा ने अच्छे मत मिले है, ग्रामीण में नहीं मिला है। भाजपा को लगा की मुस्लिम वोट कांग्रेस में बंटेगा लेकिन मुसलमानों ने ममता बनर्जी को एक तरफ़ा वोट किया है।

भाजपा ने केवल हवा बनाया इसका उन्ही को नुकसान हुआ है। ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की जमीनी पकड़ को फिर से मजबूत करने की पूरा प्रयास किया 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद अमित शाह ने कहना शुरू किया कि अब भाजपा मैदान में आ गई है, हमे अब बंगाल में 200 सीट मिलेगी ही। लेकिन यहाँ पर लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने अपना वोटबैंक बचा लिया था। इस विधानसभा चुनाव में ममता ने अपना वोटबैंक को बढ़ाने पर ध्यान दिया। 10 वर्षो में लोक हितों के कार्य किये होगे इसका भी प्रभाव पडा है। बंगाल का एक परम्परा रहा है कि कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शकर रे थे उनके बाद कोई भी राष्ट्रीय पार्टी चुनाव नहीं जीती है केंद्र में कांग्रेस पार्टी थी तो बंगाल में वामपथियों की सरकार 34 वर्ष तक बनती रही है वैसे ही जब ममता बनर्जी की पार्टी क्षेत्रीय पार्टी के तहत वामपंथियों लड़कर सरकार बनाई थी अब तक बंगाल में राष्ट्रीय पार्टी की सरकार नहीं बनी है 

अमित शाह जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह जानते थे की लोकसभा २०१४ के बाद जिस राज्यों से भाजपा को अधिक सीत मिले है आगामी लोकसभा में कम हो सकती है इसलिए मोदी अमित शाह की जोड़ी ने कई राज्यों की ओर भाजपा का कदम बढ़ाना शुरू किया जिसमे पूर्वोत्तर भारत बंगाल उड़ीसा आंध्रप्रदेस तमिलनाडु केरल जैसे राज्य जहा भाजपा की केवल उपस्थिति था। अमित शाह ने पार्टी के अध्यक्ष होते हुए बंगाल के बूथों पर फोकस कर प्रवास करने लगे। पुरे 5 वर्षो में कई दिनों तक बंगाल में रहे उन्होंने ने मध्यप्रदेश के भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय को पुरे समय बंगाल का प्रभारी बनाया। एक ही काम भाजपा का विस्तार और बूथ मैनेमेंट का काम खड़ा किया जाये और भाजपा इसमें सफल हो गई उसका परिणाम २०१९ के लोकसभा चुनाव में बंगाल से भारतीय जनता पार्टी को 18 सीटों पर चुनाव जीतने में सफल हो गई। इसी बूथ मैनेमेंट के आधार पर अमित शाह बार बार दावा किया करते थे कि  अबकी बार भाजपा 200 के पार ...... लेकिन ऐसा नहीं हुआ         

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अगर आप हर बार जीतेगे, ऐसा कभी कभी नहीं होता है यदि ऐसा होता तो आज  भी कांग्रेस की सरकार होतीआज भाजपा भी नहीं होती समय है भाजपा की अपनी कमी को दूर करने की समय है। अब विपक्षी पार्टी हो गई है। कांग्रेस और वामपंथियों का सूपड़ा साफ हो गया है। अब बंगाल में दो पार्टियों के बीच ही मुकाबला हों होने वाला है। भाजपा तीन सीटों से 77 पर पहुच गई है। अब भाजपा को जनहित के मुद्दे को उठाकर आम बांग्ला भाषी लोगों तक पहुचंने की जरुरत है।   

 लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है..... 

अब परीक्षा ममता बनर्जी को होनी है वह प्रदेश को जीत जरुर गई, लेकिन अपना विधान सभी सीट हार गई है अब मुख्यमंत्री कौन बनेगा ....

बंगाल आज कंगाल है वहा उघोग धंधे कम है, लोगों की जरूरते ज्यादा है...   


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शनिवार, 1 मई 2021

भाजपा हर चुनाव जीतने के लिए लडती है...


2014 मई के लोकसभा चुनाव के परिणाम आते ही बीजेपी की मोदी सरकार केंद्र में बन  गई पहले नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी जैसे अटल आडवाणी की जोड़ी नई जोड़ी बन थी उस समय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह थे उन्होंने नरेन्द्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री के लिए आगामी लोकसभा २०१४ में घोषणा किये थे अमित शाह को नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की घोषणा के बाद तुरंत ही उत्तर प्रदेश का प्रभारी अमित शाह को बनाया अमित शाह ने पूरी मेहनत से रात-दिन एक करके उत्तर प्रदेश से 80 में से 73 सीटों को जीत कर दिखाया है

नरेन्द्र मोदी जानते थे कि उत्तरप्रदेश से अधिक से अधिक सीट जीत ज्यादा जरूरी है केंद्र में भाजपा की सरकार तभी बन सकती है, जब उत्तरप्रदेश से चुनाव लड़कर प्रधानमंत्री बनना है तो राजनीति के पंडित बीजेपी को उत्तर प्रदेश में 40 सीट दे रहे थे किसी ने नहीं सोचा था कि बीजेपी 73 सीट जीत जाएगी भारतीय जनता पार्टी का काम करने का एक संगठनात्मक तरीका है। राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर भाजपा के बूथ तक के कार्यकर्त्ताओं कार्य करने का एक तरीके है बीजेपी एक बूथ 10 जवान 10 सियान 10  महिलाएं के अनुसार टीम में काम करती है मैंने 30 वर्षों से देख रहा हूं यही नारा है यही काम अमित शाह ने बूथ पर फोकस किया उत्तर प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं को जगा दिया और 6 महीने के अंदर बुध मैनेजमेंट के कारण उत्तर प्रदेश में 73 सीटें प्राप्त हुए नरेन्द्र मोदी ने भी उत्तरप्रदेश से चुनाव लड़ेंगे खासतौर से धार्मिक संस्कृति नगरी काशी (बनारस) यहां से भी एक प्रकार से राजनीति खेल हुआ उत्तरप्रदेश में मोदी लहर चल पड़ी इसका असर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान के विधानसभा पर पडा और हिंदी भाषी क्षेत्रों में जैसे बिहार, झारखंड, में भी असर पड़ना शुरू हुआ 2013 के छत्तीसगढ़ विकास यात्रा के समापन में मोदी के भाषण ऐतिहासिक रैली यादगार बनाया गया यह तक अंबिकापुर की रैली के समापन पर मोदी जी को लालकिला के प्रतीक में मंच बनाकर प्रचारित किया गया 

भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह गृहमंत्री के कारण उन्होंने अपना अध्यक्ष पद छोड़ दिया। सभी लोग जानते थे कि मोदी जी अमित शाह को पार्टी अध्यक्ष बनाएंगे यह बात बीजेपी का साधारण कार्यकर्ता भी समझ रहा थामोदी ने अमित शाह को पार्टी अध्यक्ष बनाकर अपनी सरकार और संगठन सही तालमेल बना लिया दिल्ली में अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में बीजेपी का राष्ट्रीय दायित्व सौंपा गया। उस दिन बीजेपी के प्रेस वार्ता में एक पत्रकार के रूप में मैं भी वहां था इसके बाद अमित शाह का काम शुरू इसके बाद अमित शाह का काम शुरू हुआ पार्टी से जुड़े नए पुराने कार्यकर्ताओं का सदस्यता अभियान मोबाइल से मिस कॉल कर शुरू किया इसे कार्यकर्ता पुराने और नए कार्यकर्ताओं का एक डाटाबेस तैयार होना शुरू हुआ पार्टी के नियम में काम जुड़ा प्रवासी कार्य यानी जो भी नेता है प्रदेश का प्रभारी है वह किसी प्रदेश में जाएगा तो कम से कम एक रात भी शाम करेगा तभी उसका प्रवास माना जाएगा इससे यह असर हुआ कि राष्ट्रीय स्तर के नेता धीरे-धीरे प्रदेश स्तर की राजधानियों में जाने लगे संभाग स्तर से जिला स्तर पर जाने लगे इसका परिणाम यह हुआ कि प्रदेश के पदाधिकारी धीरे-धीरे अपने ब्लॉक स्तर पर प्रदेश के ब्लॉक स्तर पर नेता जाकर एक नेट्वर्क तैयार करना शुरू हो गया